MCD House Construction Rules: देश की राजधानी दिल्ली में अपना सपनों का घर, दुकान या कोई भी कमर्शियल इमारत बनाने की सोच रहे लोगों के लिए दिल्ली नगर निगम (MCD) और दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के नियमों को समझना बेहद जरूरी है. दिल्ली में बिना नियमों को समझे एक ईंट रखना भी भारी पड़ सकता है. क्या हैं ये नियम जानिए.
ADVERTISEMENT
FAR और ग्राउंड कवरेज का समझें गणित
दिल्ली में निर्माण की अनुमति प्लॉट के क्षेत्रफल, एफएआर और ग्राउंड कवरेज के हिसाब से तय होती है. 100 वर्ग मीटर तक के प्लॉट पर 90% ग्राउंड कवरेज और 350% FAR मिलता है. वहीं 100 से 250 वर्ग मीटर के प्लॉट पर 75% ग्राउंड कवरेज और 300% FAR का नियम है. प्लॉट का आकार बढ़ने के साथ ग्राउंड कवरेज और FAR घटता जाता है. दिल्ली में हर प्लॉट पर तीन या चार मंजिल बनाने का कोई एक फिक्स नियम नहीं है, बल्कि यह FAR, बिल्डिंग हाइट, सेटबैक और पार्किंग की उपलब्धता पर निर्भर करता है.
स्टिल्ट पार्किंग और बेसमेंट के लिए सख्त कायदे
अगर मकान में स्टिल्ट पार्किंग बनाई जाती है तो बिल्डिंग की अनुमेय ऊंचाई बढ़ जाती है. हालांकि स्टिल्ट पार्किंग का इस्तेमाल सिर्फ गाड़ियों की पार्किंग के लिए ही किया जा सकता है, इसे बंद करके कमरा या दुकान बनाना पूरी तरह गैरकानूनी है. इसी तरह बेसमेंट के निर्माण के लिए वेंटिलेशन, ड्रेनेज और फायर सेफ्टी के कड़े नियमों का पालन करना अनिवार्य है. इसके अलावा आवासीय कॉलोनियों में व्यावसायिक गतिविधियां सिर्फ सरकार द्वारा अधिसूचित 'मिक्स यूज स्ट्रीट' पर ही संभव हैं.
ADVERTISEMENT


