DUSU Election 2026: दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन (DUSU) चुनाव 2026 को लेकर कैंपस में चुनावी सरगर्मी अपने शबाब पर है. 18 सितंबर को होने वाली वोटिंग से पहले प्रत्याशी और विभिन्न छात्र संगठन कॉलेज-कॉलेज जाकर जोरों-शोरों से प्रचार में जुटे हैं. शिवाजी कॉलेज में जब दिल्ली तक की टीम ने पहुंचकर जन-जी (Gen-Z) वोटर्स का मूड टटोला, तो छात्रों के बीच मिला-जुला रुख और कड़ा मुकाबला देखने को मिला.
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एक तरफ जहां छात्र अपनी बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सीजेपी (CJP) के हालिया विरोध प्रदर्शन को लेकर भी बहस छिड़ी हुई है.
क्या सीजेपी प्रोटेस्ट बनेगा बड़ा मुद्दा?
कैंपस में सीजेपी के हालिया प्रदर्शन और सत्यनिकेतन की घटना के असर को लेकर छात्रों के दो अलग-अलग पक्ष दिखे. कुछ छात्रों का मानना था कि प्रोटेस्ट एक सामयिक मुद्दा था जो समय के साथ खत्म हो गया और छात्र हमेशा उसी संगठन का समर्थन करते हैं जो साल के 365 दिन उनकी समस्याओं के समाधान के लिए काम करता है.
वहीं, एबीवीपी समर्थकों का कहना था कि पिछले कार्यकालों में इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास, मेट्रो-बस सुविधाओं और छात्रों के हित में कई अहम काम किए गए हैं, इसलिए जन-जी इस बार भी एबीवीपी के प्रत्याशियों के साथ खड़ा दिख रहा है.
मनी पावर के इस्तेमाल के लगे आरोप
दूसरी तरफ, कई छात्रों ने मौजूदा व्यवस्था और बार-बार दोहराए जाने वाले मेनिफेस्टो पर तीखे सवाल खड़े किए. छात्रों का कहना था कि हर बार चुनाव में संगठन एक ही जैसा मेनिफेस्टो लाते हैं और बस शब्दों का फेरबदल कर देते हैं. वाई-फाई, हॉस्टल और क्लासरूम में एसी जैसी बुनियादी मांगें सालों से वैसी की वैसी ही पड़ी हुई हैं.
इसके अलावा कुछ छात्रों ने चुनाव में मनी और मसल पावर के अत्यधिक इस्तेमाल पर गंभीर चिंता व्यक्त की. उनका आरोप था कि पैसों के दम पर चुनाव जीतने की कोशिश की जाती है, जबकि छात्रों को एक योग्य और पढ़ा-लिखा नेतृत्व चुनना चाहिए जो असल में उनके हक की आवाज उठा सके.
18 सितंबर को फैसले का दिन
चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में सभी प्रमुख संगठनों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. 18 सितंबर को डीयू के हजारों छात्र-छात्राएं अपने मताधिकार का प्रयोग कर डसू के नए नेतृत्व का फैसला करेंगे.
अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या जन-जी छात्र इस बार बदलाव के पक्ष में वोट करते हैं या फिर काम के आधार पर पुरानी व्यवस्था पर ही अपना भरोसा कायम रखते हैं. चुनाव के नतीजों से ही साफ हो पाएगा कि सीजेपी प्रोटेस्ट और मनी पावर के आरोपों का वोटिंग पर कितना असर पड़ा.
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