वोटर आईडी बनवाना हुआ आसान: चुनाव आयोग ने फॉर्म 6 से हटाया अतिरिक्त घोषणा पत्र, युवाओं को मिलेगी बड़ी राहत

संजय शर्मा

• 11:16 AM • 30 Sep 2026

चुनाव आयोग ने गैर-SIR राज्यों में फॉर्म 6 से अतिरिक्त घोषणा पत्र हटाकर पुराना स्वरूप बहाल कर दिया है. इससे अब नए मतदाताओं और 18 साल के युवाओं को बिना किसी पुराने पारिवारिक चुनावी रिकॉर्ड के आसानी से वोटर कार्ड बनवाने की सुविधा मिलेगी.

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अगर आप नया वोटर कार्ड बनवाने जा रहे हैं या हाल ही में 18 साल के हुए हैं तो आपके लिए एक राहत भरी खबर है. भारत निर्वाचन आयोग ने नए मतदाताओं के रजिट्रेशन में आ रही एक बड़ी कागजी अड़चन को दूर कर दिया है. जिन राज्यों में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का काम पूरा हो चुका है, वहां अब फॉर्म 6 का पुराना और मूल स्वरूप बहाल कर दिया गया है. यानी अब नया नाम जुड़वाने के लिए आवेदकों को किसी भी तरह का अतिरिक्त घोषणा पत्र (Annexure-D) नहीं देना होगा.

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क्या था पूरा विवाद और ECI का रुख?

चुनावी मतदाता सूची को पारदर्शी बनाने और अवैध घुसपैठ पर लगाम कसने के उद्देश्य से चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया के तहत फॉर्म 6 के साथ एक अतिरिक्त घोषणा पत्र जोड़ दिया था. हालांकि, आयोग ने फॉर्म 6 के कानूनी ढांचे में कोई बदलाव नहीं किया था, लेकिन ऑनलाइन पोर्टल (ECINET) पर इस अतिरिक्त घोषणा पत्र को भरे बिना आवेदन सबमिट करना मुमकिन नहीं हो पा रहा था.

इस व्यवस्था पर आयोग के भीतर ही मतभेद सामने आए. चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने इस पर आपत्ति दर्ज कराई. उनका तर्क था कि 'मतदाता पंजीकरण नियम, 1960' के तहत फॉर्म 6 में किसी भी तरह के बदलाव का अधिकार सिर्फ केंद्र सरकार के पास है और इसके लिए संसद की मंजूरी जरूरी होती है. आयोग अपने स्तर पर ऑनलाइन पोर्टल के जरिए इसे अनिवार्य नहीं बना सकता. इस आंतरिक चर्चा के बाद निर्वाचन आयोग ने सहमति जताते हुए गैर-SIR राज्यों में ऑनलाइन फॉर्म 6 से इसे हटा दिया है. अब यह शर्त सिर्फ उन्हीं राज्यों में लागू रहेगी जहां अभी SIR की प्रक्रिया जारी है.

फॉर्म 6: पहले की जटिलताएं बनाम अब की आसानी

पारिवारिक रिकॉर्ड की अनिवार्यता समाप्त

पहले (SIR के दौरान): आवेदकों को यह घोषणा करनी पड़ती थी कि साल 2000 के शुरुआती SIR के दौरान उनके, उनके माता-पिता या दादा-दादी का नाम मतदाता सूची में था या नहीं.

अब (मूल स्वरूप में): नए आवेदकों को अपने परिजनों के पुराने चुनावी रिकॉर्ड या वंशावली से जुड़ी कोई जानकारी नहीं देनी होगी, क्योंकि SIR के दौरान यह डेटा पहले ही डिजिटली दर्ज हो चुका है.

बूथ और वोटर नंबर खोजने से मुक्ति

  • पहले (SIR के दौरान): फॉर्म भरते समय पुराना विधानसभा क्षेत्र, पोलिंग बूथ नंबर और क्रम संख्या देना अनिवार्य था.
  • अब (मूल स्वरूप में): पूर्व विधानसभा क्षेत्र, बूथ नंबर या पुराना सीरियल नंबर देने की कोई बाध्यता नहीं है.

सरल ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया

  • पहले (SIR के दौरान): ECINET पोर्टल पर अतिरिक्त घोषणा पत्र भरे बिना आवेदन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ती थी.
  • अब (मूल स्वरूप में): आवेदक बस अपनी सामान्य व्यक्तिगत जानकारी भरें और उम्र व निवास का प्रमाण पत्र अपलोड करके फॉर्म सीधे सबमिट कर सकते हैं.

युवाओं और नए वोटरों को सीधा फायदा

इस बदलाव से सबसे ज्यादा सहूलियत 2000 के दशक के बाद जन्मे युवाओं को होगी. पहली बार वोट बनवाने जा रहे 18 साल के युवाओं को पुरानी पारिवारिक मैपिंग के कारण दस्तावेज़ जुटाने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही थी. इसके अलावा, जिन लोगों के नाम पहले मतदाता सूची से कट चुके थे, उन्हें भी दोबारा जुड़वाने में कानूनी पेचीदगियों का सामना करना पड़ रहा था. अब मूल फॉर्म 6 के लागू होने से नए मतदाता बिना किसी पुरानी पारिवारिक मैपिंग और कागजी झंझट के आसानी से अपना पंजीकरण करा सकेंगे.

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