Ghaziabad Interfaith Marriage Case: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अंतरधार्मिक विवाह से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए बालिग की व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर मुहर लगाई है. अदालत ने स्पष्ट किया कि संविधान प्रत्येक वयस्क नागरिक को बिना किसी दबाव के अपनी मर्जी से जीवनसाथी चुनने का अधिकार देता है. दरअसल, गाजियाबाद के इंदिरापुरम की रहने वाली 26 वर्षीय ग्रेजुएट सोनिका चौहान ने अकबर खान के साथ अपनी मर्जी से शादी की थी. हालांकि, सोनिका के पिता लक्ष्मण सिंह चौहान ने मई 2025 में इंदिरापुरम थाने में बेटी के अपहरण की शिकायत दर्ज कराई. इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अकबर को गिरफ्तार कर लिया था, जिसके बाद उनकी दुकान में तोड़फोड़ की घटना भी सामने आई थी.
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विशेष विवाह अधिनियम के तहत हुआ था विवाह
सोनिका और अकबर इंदिरापुरम के न्यायखंड में रहकर अपना कार्य संभालते थे. अकबर वहां जनसुविधा केंद्र चलाते थे, जबकि सोनिका एक सैलून का संचालन करती थीं. दोनों ने अगस्त 2022 में दिल्ली के तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय में विशेष विवाह अधिनियम के तहत कानूनी रूप से विवाह किया था. इस विवाद के कारण अकबर को मई 2025 में जेल जाना पड़ा, जिसके बाद वे 8 जून को जमानत पर रिहा हुए.
कोर्ट के समक्ष सोनिका ने रखा अपना पक्ष
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति संदीप जैन की अदालत में पुलिस द्वारा सोनिका को पेश किया गया. सोनिका ने न्यायाधीश के सामने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्होंने बिना किसी दबाव के अपनी इच्छा से विवाह किया है. दूसरी ओर, सोनिका के पिता ने आरोप लगाया कि उनकी बेटी पर दबाव बनाया गया है और उसे ब्लैकमेल किया जा रहा है. हालांकि, अदालत ने बातचीत के आधार पर पाया कि सोनिका बालिग हैं और अपना फैसला खुद लेने में पूरी तरह सक्षम हैं.
संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला और सुरक्षा के निर्देश
अदालत ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए अनुच्छेद 21 का संदर्भ दिया. कोर्ट ने कहा कि हर वयस्क को अपनी इच्छा से जीने और जीवनसाथी का चयन करने का मौलिक अधिकार है. इसके साथ ही, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और स्थानीय पुलिस को आदेश दिया कि वे दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करें और आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित आवागमन में मदद करें. अदालत ने परिजनों को निर्देश दिया कि वे उनके शांतिपूर्ण जीवन में बाधा न डालें.
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मानसिक और आर्थिक नुकसान पर सोनिका का बयान
फैसले के बाद सोनिका ने राहत जताते हुए कहा कि अदालत ने उनके पक्ष को समझा. उन्होंने साझा किया कि इस पूरी प्रक्रिया में उन्हें गंभीर मानसिक तनाव और आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा. सोनिका ने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है और नुकसान की भरपाई के लिए कानूनी राह अपनाने की बात कही है.
अकबर खान ने जताया न्याय पर भरोसा
पति अकबर खान ने अदालत के निर्णय पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि लंबे संघर्ष के बाद उन्हें न्याय प्राप्त हुआ है. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ तत्वों ने इस घटनाक्रम को अनावश्यक रूप से बढ़ावा दिया. हाईकोर्ट के आदेश के उपरांत दोनों ने पुनः साथ रहना शुरू कर दिया है.
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