कभी यमुना से नारियल निकालकर बेचे, अब जंतर-मंतर पर गूंजी आवाज तो मिलने पहुंचे राहुल गाधी, जानिए कौन हैं मोहम्मद इरफान

न्यूज तक डेस्क

• 08:27 PM • 27 Jul 2026

आउटर दिल्ली की झुग्गी में रहने वाले मोहम्मद इरफान जंतर-मंतर के स्टार बन गए हैं. बिना स्कूल गए यूट्यूब से सीखकर संविधान की प्रस्तावना सुनाने वाले इरफान के घर पहुंचे राहुल गांधी और उनसे मुलाकात की.

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मोहम्मद इरफान के घर पहुंचे नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी.
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जंतर-मंतर पर युवा अंदोलन के बीच संविधान की प्रस्तावना पढ़ भारतीय लोकतंत्र के मायने बताने वाले इरफान की मुलाकात आखिरकार राहुल गांधी से हो ही गई. जंतर-मंतर पर आंदोलनकारियों के बीच झकझोर देने वाले अपने बयान से पूरे देश का ध्यान खींचने वाले इरफान ने News Tak से कहा था- ''राहुल गांधी से मिलने का मौका मिला, तो एक वादा मांगूंगा. उनसे कहूंगा कि, आप मुझसे वादा कीजिए कि यदि आप सत्ता में आए तो इस देश के मजदूरों और श्रमिकों को उनका वाजिब हक देंगे.'' 

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इधर सोमवार को दोपहर बार राहुल गांधी इरफान के घर पहुंचे गए. वहां उन्होंने इरफान से बात की. राहुल गांधी से मुलाकात के बाद इरफान काफी खुश नजर आए. उन्होंने राहुल गांधी के सामने देश से जुड़ी समस्याओं को बेबाकी से रखा. राहुल गांधी ने भी इरफान की बातों को बड़े ही ध्यान से सुना. 

भारत जोड़ो यात्रा में दिल्ली से कश्मीर गए इरफान 

इरफान ने बताया कि जब देश में नफरत और सांप्रदायिकता का माहौल बनता जा रहा था तब राहुल गांधी के 'मोहब्बत की दुकान' के जरिए सकारात्मक संदेश ने उन्हें काफी प्रभावित किया. इरफान ने बताया कि वे भारत जोड़ो यात्रा में भी शामिल हुए और दिल्ली से कश्मीर तक पैदल चले. यात्रा की यादें शेयर करते हुए इरफान बताते हैं कि राहुल गांधी मजदूरों से मिलने के लिए रात 2 बजे भी पहुंच जाते थे और यहीं बातें साबित करती हैं कि वे गरीबों और मजबूरों के हमदर्द हैं. 

कौन हैं मोहम्मद इरफान जिनकी हो रही है इतनी चर्चा 

एक तरफ साहित्य के महाकवि गोपालदास नीरज की कालजयी रचनाओं का प्रवाह, तो दूसरी तरफ भारत के लोकतंत्र की आत्मा यानी संविधान की प्रस्तावना का वो संगीतमय पाठ! शब्दों के जादूगर मोहम्मद इरफ़ान की बातें सुनकर ऐसा लगता है कि इन्हें बस आप सुनते ही रहिए. जंतर मंतर पर हजारों की भीड़ बीते दिनों आई. इस भीड़ में चमकता सितारा दिखा मोहम्मद इरफ़ान जिन्हें सुनकर बड़े बड़े नेता उनकी सुंदर भाषा शैली के मुरीद हैं. 

ऑउटर दिल्ली की एक झुग्गी में इरफान का एक छोटा सा कमरा है. ऊपर सीमेंट की पक्की छत नहीं, बल्कि नीली तिरपाल तनी हुई है. इसी टूटे-फूटी झुग्गी में मोहम्मद इरफ़ान अपने परिवार के साथ रहते हैं. परिवार की माली हालत ऐसी है कि दो वक्त की रोटी का इंतजाम करने के लिए इरफ़ान ठेला लगाते हैं, लेकिन, इस गर्द-ओ-गुबार और गरीबी के बीच, इस लड़के के भीतर एक अलग ही रोशनी पल रही है. इरफान कभी स्कूल नहीं जा पाए. जीवन कठिन था. एक वक्त ऐसा भी था जब इरफान बेघर हो गए, लेकिन उन्होंने सिर उठाकर जीने की कसम खा ली. 

कभी स्कूल नहीं गए पर 'नीरज' की पंक्तियों से खींचा ध्यान 

मोहम्मद इरफान कभी स्कूल तो नहीं गए. वे ठीक से लिख भी नहीं सकते, लेकिन कहते हैं न, जहां इच्छा वहां राह. इरफान ने अपनी पढ़ाई का जरिया बनाया अपने स्मार्टफोन को. वे दिन में कई-कई घंटे गूगल से सवाल पूछकर और चीजें सुन-सुनकर खुद को शिक्षित करते रहे. इसी डिजिटल दुनिया के सहारे उन्होंने अपनी सुरीली जुबान में उर्दू के अजीम शायर अहमद फराज, हिंदी के महाकवि गोपालदास नीरज की कविताएं और भारत के मजदूरों के कानूनी अधिकारों को कंठस्थ कर लिया.  

ऐसे जुड़े सीजेपी आंदोलन से 

सीजेपी आंदोलन कोई पहला आंदोलन नहीं था जिससे मोहम्मद इरफान जुड़े. इरफान का कहना है कि वो तो 15 साल से आंदोलनों से जुड़े रहे हैं. इरफान रामलीला मैदान में होने वाले आंदोलनों में जाने लगे लेकिन तब कारण आंदोलन नहीं था...तब बढ़िया खाना खाने के लिए इरफान वहां जाने लगे. लेकिन वहां जाकर अलग अलग विचारों का पता लगा. फिर 2011 में अन्ना आंदोलन के साक्षी बने. इसके बाद सरकार के खिलाफ जब सीएए आंदोलन हुआ तो इरफान ने वहां भी अपने विचार खुलकर रखे.

जब दिल्ली में छात्रों और युवाओं का सीजेपी आंदोलन शुरू हुआ, तो इरफ़ान भी उसका हिस्सा बने. जहां अमूमन लोग गुस्से में नारे लगा रहे थे, वहीं इरफ़ान ने भारत के पवित्र संविधान की प्रस्तावना (Preamble) को किसी रूहानी गीत की तरह धाराप्रवाह सुनाना शुरू कर दिया. जब उन्होंने हाथ में संविधान लेकर, अपनी कड़क और संजीदा आवाज में "हम भारत के लोग..." का पाठ किया, तो वहां मौजूद कैमरों और हर शख्स की निगाहें उन पर टिक गईं. उस टूटे हुए घर से आए लड़के की साफ़ सोच देखकर बड़े-बड़े पत्रकार और बुद्धिजीवी दंग रह गए. आंदोलन के उस वीडियो के वायरल होते ही देश के कोने-कोने में इरफ़ान की चर्चा होने लगी. लोग उन्हें "दिल्ली के प्रोटेस्ट से निकला असली हीरा" कहने लगे. 

कभी रोटी मयस्सर नहीं थी, तब यमुना से बीनते थे नारियल 

इरफान बताते हैं- "यमुना नदी में लोग पूजा-पाठ के बाद जो नारियल बहा देते थे, उन्हें बीनकर लाते थे. वहीं नारियल खाकर अपना पेट भरते और बसों में अठन्नी (50 पैसे) में बेचकर 4-5 रुपये जुटा लेते थे, जिससे खाने-पीने का कुछ सामान आ जाता था. जब झुग्गी टूटी तो हम बेघर हो गए और रोटी के लिए भी तरस गए. रोजी-रोटी के संकट के बीच एनजीओ के माध्यम से दिल्ली एयरपोर्ट पर मजदूरी का काम मिला और परिवार का पेट पालने के लिए ठेला भी लगाया.''

यहां देखिए जंतर मंतर पर इरफान ने ऐसा क्या कहा कि हो गए Viral

इरफान ने नीरज की पंक्तियों के साथ बहुत कुछ कह दिया...देखिए वीडियो