अभिनय की दुनिया में अपनी गहरी छाप छोड़ने वाले नाना पाटेकर अब इस दुनिया में नहीं रहे. इनकी आवाज और अभिनय का जादू लोगों के सिर हमेशा चढ़कर बोलता था. मिमिक्री कलाकार जब तक नाना पाटेकर की आवाज और अंदाज की कॉपी करके न दिखा दें तब तक उन्हें कोई स्वीकार नहीं करता था. ये बातें आज भी ऐसे ही मौजूद हैं. महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के मुरुड-जंजीरा जन्में नाना अपनी सूरत को लेकर खुद को काफी कमतर आंकते थे. उन्हें लगता था कि उनके भाई उनके ज्यादा खूबसूरत हैं. यही नहीं नाना के मन में अपने पिता को लेकर भी एक बड़ा भ्रम था.
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नाना मानते थे कि पिता उनके भाइयों को ज्यादा प्यार करते हैं. इसके पीछे की वजह वे अपनी सूरत को मानते थे. उन्हें लगता था कि भाई उनसे ज्यादा खूबसूरत हैं इसलिए पिता का स्नेह उनपर ज्यादा बरसता है. ये बातें उन्होंने कई इंटरव्यूज में बताई हैं. नाना ने बताया कि उनके जीवन का एक बड़ा टर्निंग प्वाइंट था जिसमें उन्हें न केवल खुद के भीतर छिपी अभिनय की प्रतिभा को जानने का मौका मिला बल्कि पिता के प्रति ये भ्रम भी टूट गया. इसी घटना के बाद नाना के भीतर अभिनय की दुनिया में कदम रखने का आत्मविश्वास आया.
गांव के एक नाटक ने बदली कहानी
खुद को सांवला और बदसूरत मानकर हीनभावना में रहने वाले नाना गांव में होने वाले नाटकों में अक्सर हिस्सा लिया करते थे. एक बार एक नाटक में उन्होंने हिस्सा लिया था. तब उनके पिता उनका नाटक देखने के लिए तब बंबई (अब मुंबई) से घर आए. दर्शक दीर्घा में पिता को बैठा देख नाना इमोशनल हो गए. उनकी आंखों में आंसू छलक गए और उनका ये भ्रम भी टूट गया कि पिता उनके गोरे-चिट्टे भाइयों को ज्यादा और उन्हें कम प्यार करते हैं.
उस दिन नाना को ये अहसास हुआ कि वे अपने पिता का दिल अपनी एक्टिंग से जीत सकते हैं. पिता का दिल जीतने उन्होंने अपनी एक्टिंग में जान फूंकी और आज दुनिया उनके अदाकारी और आवाज की दीवानी हो चुकी है.
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