भारतीय सिनेमा के दिग्गज एक्टर और लोगों को अपनी एक्टिंग का लोह मनवाने वाले नाना पाटेकर अब हमारे बीच नहीं रहे. 8 अक्टूबर की सुबह 5:20 बजे उन्होंने गोवा में अंतिम सांस ली. उनके निधन की खबर सामने आने के बाद बॉलीवुड जगत से लेकर उनके लाखों चाहने वाले को मानिए एक बड़ा झटका लगा है. नाना पाटेकर ने करीब 5 दशक तक फिल्मी जगत में काम ही नहीं किया, बल्कि अपने एक्टिंग के दम पर ही अलग पहचान बनाई. लेकिन आज लाखों लोगों के चहेते नाना पाटेकर के करियर में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला और मुश्किल वक्त का भी सामना करना पड़ा. आइए विस्तार से जानते हैं नाना पाटेकर के फिल्मी जगत में आने की वो कहानी.
ADVERTISEMENT
कम उम्र में ही नाना ने संभाली थी परिवार की जिम्मेदारी
नाना पाटेकर का जन्म 1 जनवरी 1951 को मराठी परिवार में हुआ था. उनके पिता का टेक्सटाइल पेटिंग का बिजनेस था, जिससे वे परिवार का भरण-पोषण किया करते थे. लेकिन इस बिजनेस में उन्हें धोखा मिला और परिवार को पैसों का भारी नुकसान हुआ था. आलम ऐसे हो गए कि गरीबी की वजह से परिवार को दो वक्त की रोटी भी सही से नहीं मिल पा रही थी. तब घर में खर्चे के भी पैसे नहीं होने के कारण नाना को कम उम्र में परिवार की जिम्मेदारी संभाली पड़ी थी.
फिल्म के पोस्टर पेंट किए, 35 रुपए में चलाया घर
आर्थिक स्थिति खराब होने के बाद नाना पाटेकर छोटी-मोटी नौकरी करने लगे, जिससे की परिवार का भरण-पोषण हो सकें. इसलिए उन्होंने जेब्रा क्रॉसिंग और फिल्म के पोस्टर्स पेंट किए थे. इसके अलावा वो पार्ट टाइम जॉब भी करते थे जिसके लिए उन्हें दिन के 35 रुपए मिलते थे. लेकिन नाना पाटेकर ने मुश्किलों के सामने घुटने नहीं टेके और लगातार मेहनत करते रहें.
1978 से एक्टिंग करियर हुआ था शुरू
तमाम मुश्किलों के बावजूद साल 1978 में नाना ने फिल्म 'गमन' से एक्टिंग में करियर शुरू किया था. फिर धीरे-धीरे सिंहासन, अंकुश और प्रतिघात जैसी फिल्मों में काम किया. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नाना को शुरुआत में काफी स्ट्रगल करना पड़ा था और लगभग 8 साल तक छोटे-बड़े किरदारों के लिए संघर्ष किया. लेकिन फिल्म 'अग्निसाक्षी' उनके करियर के लिए गेमचंजर बनी थी. इस मूवी के लिए उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला था. धीरे-धीरे उनका करियर पीक पर पहुंचा और उन्होंने क्रांतिवीर, अपहरण, अंगार परिंदा, तिरंगा आदि जैसे कई हिट मूवी दिए. नाना ने अपने डॉयलॉग डिलीवरी और एक्टिंग के जरिए लोगों के दिल पर गहरा छाप छोड़ा था. अपने करियर के दौरान उन्होंने कई तरह के रोल किए है.
'प्रहार' मूवी के लिए 3 साल की थी आर्मी ट्रेनिंग
नाना अपने एक्टिंग के लिए इस तरह समर्पित थे कि उन्होंने फिल्म प्रहार के लिए 3 साल तक आर्मी ट्रेनिंग प्रोग्राम में हिस्सा लिया था. इस मूवी में उन्हें कैप्टन की रैंक मिली था. नाना पाटेकर अपनी हर फिल्म और किरदार को लेकर काफी सजग रहते थे. साल 2007 में उन्होंने वेलकम मूवी में डॉन उदय शेट्टी का रोल प्ले किया था, जिसके बाद लोग उनकी एक्टिंग के और भी दीवाने हो गए. नाना हर रोल में छा जाते थे. नाना की अंतिम मूवी की बात करें तो वह ओ रोमियो थी. इसके बाद वो 'संक्लप' वेब सीरीज में भी दिखे थे.
गोवा-मुंबई में घर, 27 एकड़ फार्महाउस... पीछे इतनी संपत्ति छोड़ गए नाना पाटेकर
ADVERTISEMENT


