Ankit Baliyan Murder Case: यूपी के शामली में हरियाणवी सिंगर अंकित बालियान की ताबड़तोड़ गोली मारकर हत्या किए जाने और यूपी पुलिस द्वारा दो एनकाउंटर में दो शूटरों को ढेर किए जाने के बाद जुर्म की दुनिया का नेक्सस एक बार फिर चर्चा में आ गया है. इस मुद्दे पर 17-18 साल जेल काट चुके पूर्व गैंगस्टर बिंदर गुर्जर ने खुलकर अपनी राय रखी है और इस खौफनाक दलदल का सच उजागर किया है.
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'गैंगस्टरों से जुड़े हैं ज्यादातर सिंगर'
बिंदर गुर्जर ने दावा किया कि आज के समय में अधिकांश सिंगर और कलाकार किसी न किसी गैंगस्टर से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं. उन्होंने कहा कि अगर प्रशासन इन सिंगरों के फोन रिकॉर्ड्स और कॉल डिटेल खंगाले तो आधे से ज्यादा का कनेक्शन गैंगस्टरों से निकलेगा. उन्होंने गन कल्चर को बढ़ावा देने वाले गानों पर तुरंत बैन लगाने और खाप पंचायतों से ऐसे गानों व सिंगरों का बहिष्कार करने की मांग की.
ऐसे बनते हैं कम उम्र के शूटर
पूर्व गैंगस्टर ने बताया कि 18-20 साल के नवयुवकों को गन कल्चर, सोशल मीडिया रील्स और फिल्मों के जरिए जुर्म की ओर आकर्षित किया जाता है. जब छोटे-मोटे मामलों में युवा जेल जाते हैं, तो वहां गैंगस्टरों के गुर्गे उन्हें थोड़ी बहुत सुविधाएं देकर अपनी ओर मिला लेते हैं. महज 25 हजार रुपये की देसी पिस्तौल थमाकर और झूठी तारीफ कर किसी के भी कंधे पर हाथ रखकर उनसे हत्या जैसे संगीन अपराध करवा दिए जाते हैं.
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'अपनी जिंदगी की तुलना कुत्ते से करता हूं, जुर्म का रास्ता छोड़ो'
बिंदर गुर्जर ने युवाओं को चेतावनी देते हुए कहा कि जो लोग गैंगस्टरी को शौकिया और शान समझते हैं, वे बहुत बड़ी भूल कर रहे हैं. उन्होंने बेहद भावुक अंदाज में कहा, "मैं अपनी जिंदगी की तुलना कुत्ते से करता हूं. न हम दुख में अपने घर शरीक हो सकते हैं, न सुख में. 6 बजे जेल खुलती है और 7 बजे बंद हो जाती है, यह कोई जिंदगी नहीं है." उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपने मां-बाप के पास रहें, मेहनत-मजदूरी करें और इस खौफनाक रास्ते को तुरंत छोड़ दें.
मां-बाप और खाप पंचायतों को रखनी होगी नजर
बिंदर गुर्जर ने अभिभावकों से भी अपील की कि यदि उनके बच्चे की जेब में 100 रुपये भी आते हैं तो उसका पूरा हिसाब लिया जाए कि यह पैसा कहां से आया. साथ ही उन्होंने खाप पंचायतों से गांव-गांव में ऐसी मुहिम चलाने की बात कही ताकि भटके हुए युवाओं को शुरुआत में ही सही रास्ते पर लाया जा सके.
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