सोमवार को आखिरकार लंबे समय से अटकी पड़ी बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की टीम का ऐलान हो गया. मध्यप्रदेश से 6 नेताओं को टीन नितिन नबीन में जगह मिली इनमें से एक है बीजेपी किसान मोर्चा के अध्यक्ष बनाए गए बंसीलाल गुर्जर. राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जाएं तो, तो बंसीलाल गुर्जर की नियुक्ति महज एक संगठनात्मक नियुक्ति नहीं दिखती. लेकिन क्या वजह है कि एमपी के मंदसौर जैसे एक छोटे से शहर से निकल कर बंसीलाल गुर्जर अब बीजेपी की किसान राजनीति का प्रमुख चेहरा बन गए हैं. इस रिपोर्ट में विस्तार से जानिए पूरी बात.
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किसान राजनीति का 'टेस्टेड फेस'
बंसीलाल गुर्जर की सबसे बड़ी ताकत उनका किसान नेता वाला पुराना प्रोफाइल है. वो भारतीय किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं और मंदसौर कृषि उपज मंडी से भी लंबे समय तक जुड़े रहे हैं. 2017 के मंदसौर किसान आंदोलन के बाद से उनकी पहचान मालवा-निमाड़ के किसान चेहरे के रूप में बनी. यानी बीजेपी ने किसी नए चेहरे को किसान मोर्चे की कमान नहीं दी, बल्कि ऐसे नेता को चुना जिसकी राजनीतिक पहचान ही किसान और ग्रामीण संगठन से जुड़ी हुई है.
मंदसौर का प्रतीकात्मक महत्व
यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मंदसौर वही इलाका है जहां 2017 में किसान आंदोलन ने बीजेपी सरकार को सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती दी थी. ऐसे इलाके से आने वाले नेता को राष्ट्रीय किसान मोर्चे की कमान देना एक संदेश हो सकता है कि जिस जमीन पर कभी किसान असंतोष बीजेपी के लिए चुनौती बना था, उसी जमीन के नेता को अब देशभर के किसानों तक पार्टी का संदेश पहुंचाने की जिम्मेदारी. यह बीजेपी के लिए राजनीतिक रूप से काफी मजबूत नेरेटिव बन सकता है.
मंदसौर से राजस्थान तक मजबूत सामाजिक पकड़
बंसीलाल गुर्जर की नई जिम्मेदारी को समझने के लिए मंदसौर-नीमच का भूगोल भी अहम है. मध्य प्रदेश का यह इलाका राजस्थान की सीमा से सटा है और मालवा से लेकर राजस्थान तक गुर्जर समाज की बड़ी आबादी है. बंसीलाल गुर्जर की इसी बेल्ट में लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक पकड़ रही है. यही वजह है कि उनकी भूमिका सिर्फ मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं रही. वो मध्य प्रदेश के अलावा राजस्थान, महाराष्ट्र, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और गुजरात जैसे राज्यों में भी चुनाव और संगठन से जुड़े कामों में सक्रिय रहे हैं. अब राष्ट्रीय किसान मोर्चे की कमान देकर पार्टी ने दो स्तरों पर प्रतिनिधित्व मजबूत किया है, पहला किसान नेतृत्व और दूसरा गुर्जर/ओबीसी का सामाजिक आधार.
बड़ा सवाल, UP को क्यों छोड़ा?
उत्तर प्रदेश 2027 विधानसभा चुनाव के मुहाने पर है, और नितिन नबीन खुद हाल में यूपी के सांसदों से वन-टू-वन बातचीत कर चुके हैं, जिसमें जातीय समीकरण और ग्राउंड फीडबैक पर जोर बताया गया है. इसके बावजूद किसान मोर्चे की राष्ट्रीय कमान यूपी के नेता को न देकर MP के बंसीलाल गुर्जर को देना बताता है कि बीजेपी ने इस नियुक्ति को सिर्फ 2027 यूपी चुनाव के चश्मे से नहीं देखा. संभवतः पार्टी की सोच ज्यादा व्यापक है जैसे 2029 लोकसभा चुनाव के लिए किसानों तक पहुंच.
'राज्यसभा सांसद' होना भी प्लस पॉइंट
यह भी महत्वपूर्ण है कि बंसीलाल अब सिर्फ संगठन के किसान नेता नहीं हैं. वे 2024 से राज्यसभा सदस्य हैं और संसद में किसानों और ग्रामीण मुद्दों पर उनकी सक्रियता भी रही है. संसद में उपस्थिति 92% रही है और वे 116 बहसों में हिस्सा ले चुके हैं. इससे पार्टी को एक ऐसा किसान मोर्चा अध्यक्ष मिलता है जिसके पास संगठन के साथ-साथ किसान राजनीति और संसदीय कार्यप्रणाली का अनुभव तीनों हैं.
बंसीलाल गुर्जर: किसान राजनीति से बीजेपी के राष्ट्रीय किसान मोर्चे तक का सफर
करीब 66 साल के बंसीलाल गुर्जर की पहचान सिर्फ बीजेपी नेता के तौर पर नहीं, बल्कि जमीनी किसान नेता के रूप में रही है. मंदसौर शहर से सटे ग्राम लालघाटी के रहने वाले गुर्जर पुश्तैनी किसान परिवार से आते हैं. अब बीजेपी ने उन्हें किसान मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर उनकी राजनीतिक भूमिका को मध्य प्रदेश से उठाकर राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचा दिया है. बंसीलाल गुर्जर मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं. इससे पहले वे बीजेपी किसान मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और हुडको के डायरेक्टर की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं. मालवा-निमाड़ और खासकर उज्जैन संभाग में उनकी पहचान लंबे समय से एक प्रभावशाली किसान नेता की रही है.
टिकट नहीं मिला, लेकिन संगठन में कद बढ़ता गया
बंसीलाल गुर्जर 2014 से लगातार लोकसभा चुनाव में बीजेपी के टिकट के दावेदार रहे, लेकिन उन्हें लोकसभा का टिकट नहीं मिला. इसके बावजूद संगठन में उनका कद लगातार बढ़ता रहा. मध्य प्रदेश बीजेपी संगठन में वे शिवराज सिंह चौहान के कई कार्यकालों के दौरान प्रदेश महामंत्री समेत कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं. यानी चुनावी टिकट भले नहीं मिला, लेकिन संगठन ने लगातार उनके अनुभव और जमीनी पकड़ का इस्तेमाल किया.
15 साल तक मंदसौर मंडी की राजनीति में दबदबा
बंसीलाल गुर्जर की सबसे बड़ी ताकत उनकी मंडी और किसान राजनीति से जुड़ी पकड़ मानी जाती है. वे करीब 15 वर्षों तक मंदसौर कृषि उपज मंडी के अध्यक्ष रहे. उनकी पत्नी रमाबाई गुर्जर भी मंडी अध्यक्ष रह चुकी हैं और वर्तमान में मंदसौर नगर पालिका अध्यक्ष हैं.
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