मध्य प्रदेश की हाई-प्रोफाइल दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए 30 जुलाई को मतदान संपन्न हो चुका है. अब सभी की निगाहें 3 अगस्त को आने वाले नतीजों पर टिकी हैं. भाजपा के आशुतोष तिवारी, कांग्रेस के घनश्याम सिंह और आजाद समाज पार्टी (ASP) के दामोदर यादव के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है. ईवीएम में प्रत्याशियों की किस्मत कैद हो चुकी है, लेकिन इस बीच 'रुद्रा रिसर्च' (Rudra Research) के एग्जिट पोल के आंकड़े सामने आए हैं, जिसमें जातिगत आधार पर वोटर्स के रुझान का बड़ा विश्लेषण किया गया है.
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किस जाति का वोट किस पाले में गया?
रुद्रा रिसर्च के एग्जिट पोल की फाइंडिंग्स के अनुसार दतिया में जातिगत वोटिंग का पैटर्न कुछ इस तरह नजर आ रहा है:
- ठाकुर, कुशवाहा और एससी मतदाता: ठाकुर समाज का रुझान एकतरफा कांग्रेस के पक्ष में जाता दिख रहा है. इसके अलावा कुशवाहा और अन्य अनुसूचित जाति (SC) के मतदाताओं का झुकाव भी अधिकतर कांग्रेस की ओर नजर आ रहा है.
- ब्राह्मण और यादव समाज: ब्राह्मण और यादव समाज के बहुसंख्यक मतदाता भारतीय जनता पार्टी (BJP) का समर्थन करते दिखे हैं.
- अहिरवार समाज: दतिया के सबसे बड़े वोट बैंक में शामिल अहिरवार समाज के लगभग 65 से 70 फीसदी मतदाताओं का झुकाव आजाद समाज पार्टी के प्रत्याशी दामोदर यादव की तरफ दिखाई दे रहा है.
- ओबीसी और बनिया वर्ग: अन्य ओबीसी और बनिया समाज के वोट भाजपा और कांग्रेस दोनों प्रमुख दलों में बंटते हुए नजर आ रहे हैं.
दतिया का जातिगत गणित (जाति अनुसार वोट प्रतिशत)
दतिया विधानसभा में प्रमुख समाजों की आबादी और उनका वोट शेयर इस प्रकार है:
- ब्राह्मण: 14.8%
- अहिरवार एवं जाटव: 14.7%
- कुशवाहा एवं काछी: 12.2%
- यादव: 7.4%
- लोधी: 6.9%
कम वोटिंग और महिला वोटर्स का गिरता ट्रेंड
साल 2023 के विधानसभा चुनाव की तुलना में इस उपचुनाव में वोटिंग प्रतिशत में गिरावट दर्ज की गई है.
2023 चुनाव में वोट टर्नआउट: 80.20%
2026 उपचुनाव में वोट टर्नआउट: 71.44%
इसके अलावा, सबसे बड़ी चिंता महिला वोटर्स की कम भागीदारी को लेकर है. 2023 के चुनाव में महिला मतदाता पुरुषों से लगभग 1.94% आगे थीं, लेकिन इस उपचुनाव में महिलाओं का वोटिंग टर्नआउट लगभग 5.61% कम दर्ज किया गया है.
दामोदर यादव बने 'एक्स-फैक्टर'
एग्जिट पोल के मुताबिक, आजाद समाज पार्टी के प्रत्याशी दामोदर यादव इस चुनाव में एक बड़ा डेंट (नुकसान) लगाते दिख रहे हैं. ग्रामीण इलाकों में उन्हें अच्छा जनसमर्थन मिला है, जिससे भाजपा और कांग्रेस दोनों के पारंपरिक वोट बैंक (जैसे पाल, बघेल और कुशवाहा समाज) में सेंधमारी हुई है.
रुद्रा रिसर्च के अनुमान के मुताबिक, जातीय समीकरणों और त्रिकोणीय मुकाबले के चलते कांग्रेस प्रत्याशी को करीब 5% की बढ़त मिलती दिख रही है, हालांकि भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर (Neck-to-Neck Fight) बनी हुई है.
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