इंदौर: दूषित पानी से हुई मौत पर इंडिया टुडे के पत्रकार ने कैलाश विजयवर्गीय से पूछा सवाला तो मिला ये जवाब

Kailash Vijayvargiya News: इंदौर में सीवेज मिला दूषित पानी पीने से 15 से ज्यादा मौतों ने सिस्टम की संवेदनहीनता उजागर कर दी है. त्रासदी पर सवाल पूछने पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का विवादित व्यवहार आक्रोश बढ़ाता है. मुआवजे, माफी और कार्रवाई के बीच जनता पूछ रही है, क्या साफ पानी मांगना भी अपराध है?

Kailash Vijayvargiya controversy
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गौरव जगताप

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Kailash Vijayvargiya controversy: इंदौर में सीवेज मिला दूषित पानी पीने से अब तक 15 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. सालों के इंतजार के बाद पैदा हुए मासूमों और बुढ़ापे के सहारों को इस 'जहरीले' सिस्टम ने निगल लिया. जब इस त्रासदी पर सरकार के कद्दावर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से सवाल किया गया तो उनके विवादित शब्दों और चुप्पी ने जनता के घावों पर नमक छिड़कने का काम किया है.

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एक पत्रकार ने सीवेज के पानी से हो रही मौतों और लोगों की परेशानी पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से जवाब मांगा तो वो भड़क गए. उन्होंने मर्यादित भाषा की सीमा लांघ दी. "फोकट प्रश्न" और "घंटा" जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने पर उन्हें दिल्ली दरबार के आदेश पर माफी भी मांगना पड़ गई.

इंडिया टुडे के रिपोर्टर ने पूछा सवाल तो मिला ये जवाब

दरअसल, मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से इंडिया टुडे के रिपोर्टर पीयूष मिश्रा ने दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर सवाल किया. रिपोर्टर ने कहा कि हमारी टीम उन इलाकों में गई है जहां कई घरों में सीवेज का गंदा पानी घुस रहा है. उन्होंने मंत्री से पूछा कि ऐसे हालात में उन लोगों को क्या जवाब दिया जाएगा, जिनके घरों में सीवेज का पानी जा रहा है. इस सवाल पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने हैरान करने वाला जवाब देते हुए कहा कि "आपको कल बताएंगे." इसके बाद रिपोर्टर ने मंत्री से प्रतिक्रिया लेने की काफी कोशिश की लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया और चुप्पी साधे रहे.

मुआवजे से नहीं भरेंगे मां की सूनी गोद के जख्म

प्रशासन ने मृतकों के परिजनों के लिए 5-5 लाख रुपये के मुआवजे का ऐलान किया है. लेकिन सवाल यह है कि क्या यह रकम उस मां का सहारा लौटा पाएगी जिसने 10 साल की मन्नतों के बाद अपने बच्चे को पाया था? अस्पताल में अब भी कई लोग जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं. प्रशासन की लापरवाही तब तक जारी रही जब तक कि दर्जनों घरों के चिराग नहीं बुझ गए. जनता का सवाल सीधा है कि जब हम टैक्स देते हैं और वोट देते हैं तो पीने के साफ पानी जैसी बुनियादी सुविधा के बदले हमें अपनों की लाशें क्यों मिल रही हैं?

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उमा भारती का अपनी ही सरकार को आईना

पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने इस घटना पर गहरा दुख जताते हुए अपनी ही सरकार की व्यवस्था को कटघरे में खड़ा किया है. उन्होंने इसे पूरे प्रदेश के लिए कलंकित करने वाली घटना बताया. उन्होंने स्पष्ट कहा कि इंसानी जिंदगी की कीमत 5 लाख रुपये नहीं हो सकती. उमा भारती ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई और पीड़ितों से माफी मांगने की मांग की है.

 

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सिस्टम पर एक्शन: सीएम ने कड़े निर्देश किए जारी

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उच्च स्तरीय बैठक बुलाई. बैठक के बाद इंदौर नगर निगम के आयुक्त और अपर आयुक्त को 'कारण बताओ' नोटिस जारी किया गया है. साथ ही अपर आयुक्त को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया गया है और जल वितरण विभाग के प्रभारियों पर भी गाज गिरी है. सरकार अब नगर निगम में खाली पड़े पदों को भरने की बात कर रही है लेकिन जनता पूछ रही है कि यह सक्रियता मौतों से पहले क्यों नहीं दिखाई गई?

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