हेड कॉन्स्टेबल फिरोज खान के पास खाकी की आड़ में अकूत संपत्ति का साम्राज्य, कौन है रोशनी वर्मा जिसका भी नाम आ रहा है सामने ?

आशुतोष शुक्ला

15 Oct 2026 (अपडेटेड: Oct 15 2026 8:10 PM)

इंदौर पुलिस ट्रेनिंग सेंटर के प्रधान आरक्षक फिरोज खान के ठिकानों पर लोकायुक्त की रेड में 29 करोड़ से अधिक की संपत्ति का खुलासा. रोशनी वर्मा के साथ जुड़े बेनामी सौदों की जांच जारी. पढ़ें पूरी खबर.

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शुरुआती जांच में यह मामला आय से कई गुना अधिक संपत्ति का सामने आया है, जिसके तार इंदौर, देवास और उज्जैन तक जुड़े हुए हैं.
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इंदौर/देवास: पुलिस विभाग में तैनात ड्राइवर की अवैध संपत्ति को लेकर कई बड़े खुलासे हो रहे हैं.... इंदौर पुलिस ट्रेनिंग सेंटर में पदस्थ प्रधान आरक्षक चालक (Head Constable Driver) फिरोज खान के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में लोकायुक्त की जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है. शुरुआती जांच में यह मामला आय से कई गुना अधिक संपत्ति का सामने आया है, जिसके तार इंदौर, देवास और उज्जैन तक जुड़े हुए हैं. लोकायुक्त इंदौर और उज्जैन की संयुक्त टीमों ने मंगलवार सुबह ठीक 6 बजे एक साथ बड़ी कार्रवाई करते हुए देवास स्थित घर समेत कुल 15 ठिकानों पर दबिश दी. यह लंबी कार्रवाई सुबह से शुरू होकर देर शाम तक चली.

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भ्रष्टाचार के चौंकाने वाले आंकड़े 

लोकायुक्त की अब तक की जांच में जो आंकड़े सामने आए हैं, उन्होंने भ्रष्टाचार के कई रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं-  

  1. वैध आय: आरोपी की कुल वैध आय मात्र 1 करोड़ 93 लाख 84 हजार रुपए आंकी गई है.
  2. कुल खर्च: आरोपी द्वारा किया गया खर्च लगभग 12 करोड़ 95 लाख 72 हजार रुपए पाया गया है. यानी आय से करीब 11 करोड़ 1 लाख 87 हजार रुपए ज्यादा खर्च किए गए.
  3. अचल संपत्तियां: जांच में 33 अचल संपत्तियों का खुलासा हुआ है. कागजों में इन जमीनों और मकानों की खरीद पर 11 करोड़ 57 लाख रुपए खर्च होना बताए गए हैं, लेकिन इनका वर्तमान बाजार मूल्य करीब 29 करोड़ 73 लाख रुपए आंका गया है.

रोशनी वर्मा और बेनामी संपत्तियों का मायाजाल 

इस पूरे खेल में सिर्फ फिरोज खान ही नहीं, बल्कि उसके करीबियों और एक खास महिला रोशनी वर्मा का नाम भी तेजी से उभरकर सामने आया है. सांवेर तहसील के ग्राम गुरान से 21.75 बीघा कृषि भूमि का एक एग्रीमेंट सामने आया है, जिसमें आरोप है कि एक किसान परिवार के आपसी पारिवारिक विवाद का फायदा उठाकर फिरोज ने रोशनी वर्मा के नाम पर जमीन का पंजीकृत एग्रीमेंट करा लिया. पीड़ित किसान के पुत्र का दावा है कि अदालत का स्थगन और समझौता होने के बाद भी दबाव बनाकर कोरे कागजों पर हस्ताक्षर कराए गए.

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लोकायुक्त की फाइलों के मुताबिक, रोशनी वर्मा के नाम से संचालित फर्म 'रोशनी सेल्स एंड सर्विस' और रियल एस्टेट निवेश से जुड़ी 'रॉयल ग्रीन रियल एस्टेट' भी जांच के घेरे में हैं. जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या रोशनी वर्मा इन संपत्तियों की वास्तविक मालकिन हैं या फिर यह पर्दे के पीछे किसी और के काले धन को सफेद करने का जरिया थीं? 

फिलहाल लोकायुक्त इन फर्मों की कारोबारी गतिविधियों, बैंक खातों के करोड़ों के लेन-देन और दस्तावेजों की गहन पड़ताल कर रहा है. जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, इस खेल से जुड़े कई अन्य बड़े चेहरे भी बेनकाब हो सकते हैं.

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