मध्य प्रदेश के जबलपुर में 30 अप्रैल का दिन कई परिवारों के लिए दर्दनाक साबित हो गया. दर्द इतना कि जिसने वो दृश्य देखा वो रो पड़ा. बरगी डैम के किनारे काले बादल और तेज हवाओं के बीच चीख-चित्कार गूंज रही थी. बरगी डैम से जब-जब लाशें निकलती तो छाती-पीट-पीटकर रो रहे परिवारों का दर्द देख हर किसी की आंखें नम हो रही थीं. फिर वो दृश्य सामने आया जिसने सबको झकझोर कर रख दिया. बचाव दल जब उनका शव लेकर आया तो हर किसी का कलेजा मुंह को आ गया.
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ये शव मरीना मैसी का था. उनकी लाइफ जैकेट में मासूम बेटा त्रिशान भी था. मां मौत से लड़ती रही. तेज हवाओं के बीच लहरों से लड़ती रही और कलेजे के टुकड़े को अलग नहीं होने दिया. अंतिम सांस तक मरीना लड़ी और अपने बेटे त्रिशान को बचाने की कोशिश की. मां-बेटे का शव एक साथ एक रेस्क्यू किया गया. मरीना की डेड बॉडी अपने बेटे को पकड़ी रही...शायद इस उम्मीद में कि बेटा बच जाए पर होनी को कुछ और ही मंजूर था. दिल्ली से आए इस परिवार में अब पिता प्रदीप मैसी और बेटी सिया किसी तरह अपनी जान बचाने में कामयाब रहे.
क्या है पूरा मामला?
जबलपुर के बरगी डैम में गुरुवार शाम करीब 5 बजे पर्यटन विभाग का एक क्रूज अचानक तेज हवा के झोंके में फंस गया और देखते ही देखते पलट गया. क्रूज ने किसी को संभलने का मौका तक नहीं दिया. इसपर कुल 45 पर्यटक सवार थे. अभी तक कुल 9 शव निकाले जा चुके हैं. 28 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है. बताया जा रहा है कि बच्चों समेत 45-47 पर्यटक थे, लेकिन टिकट केवल 29 का ही कटा था.
कहां हुआ हादसा
हादसा किनारे से महज 300 मीटर की दूरी पर हुआ. ये दूरी इतनी ज्यादा नहीं थी कि रेस्क्यू दल भेजकर फौरन बचाया न जा सके. क्रूज के पायलट को भी 10 साल का अनुभव था. फिर देखते ही देखते क्रूज कैसे पलट गया. महज 40 किमी प्रति घंटे की तेज हवा में क्रूज तेजी से पलटा ये जांच का विषय है. क्या क्रू काफी पुराना था और इसके फिटनेस पर ध्यान नहीं दिया गया. क्या क्रूज ओवरलोडेड था या उसके सुरक्षा मानकों को नजरअंदाज किया गया. इस हादसे के बाद कई सवाल खड़े होते हैं.
सुरक्षा इंतजामों में बड़ी चूक
अब क्रूज के डूबने पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं. बच निकलने वाले पर्यटक बता रहे हैं कि सभी को देने के लिए लाइफ जैकेट तक नहीं थी. खराब मौसम में क्रूज को पानी में ले जाने की परमिशन किसने दी इसपर भी सवाल उठ रहे हैं. खराब मौसम के कारण शुरूआत में रेस्क्यू में काफी परेशानी हुई. अंधेरा और तेज हवाओं के कारण रेस्क्यू भी प्रभावित हुआ. आज यानी शुक्रवार से रेस्क्यू जारी है. बताया जा रहा है कि अभी भी कई लोग लापता हैं. बचाव दल उन्हें ढूंढ रही है.
एक परिवार के 15 लोग थे सवार
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एक जबलपुर के खमरिया में स्थित आर्डिनेंस फैक्ट्री में कार्यरत कार्यरत कर्मचारी कामराज आर्य अपने परिवार और रिश्तेदारों के साथ क्रूज पर घूमने पहुंचे थे. इनके साथ कुल 15 लोग सवार हुए थे. हालांकि इनके बुजुर्ग माता-पिता ने क्रूज पर जाने से मना कर दिया और किनारे पर बैठकर सबका इंतजार कर रहे थे. बुजुर्ग मां-पिता को बस उनका एक पोता मिला है. उसे बचा लिया गया है. वहीं कामराज, उनकी पत्नी और बेटा अभी भी लापता हैं. बुजुर्ग आंखें उन्हें इस उम्मीद से ढूंढ रही हैं कि शायद वो सुरक्षित मिल जाएं.
मृतकों को 2 लाख और घायलों को 50 हजार का ऐलान
PMO ने इस हादसे पर सोशल मीडिया X पर लिखा- ''मध्य प्रदेश के जबलपुर में नाव पलटने से हुई जान-माल की हानि अत्यंत दुखद है. इस दुखद दुर्घटना में अपने प्रियजनों को खोने वालों के प्रति मैं अपनी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं. घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं. स्थानीय प्रशासन प्रभावित लोगों की सहायता कर रहा है. PMNRF की ओर से जान गंवाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के निकटतम परिजन को 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी. घायलों को 50,000 रुपये दिए जाएंगे.''
क्रूज के डूबते हुए का लाइव वीडियो सामने आया
डूबने के बाद भी चलती रही हवाएं...ऐसा था नजारा...वीडियो आया सामने
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