मध्य प्रदेश की सड़कों पर टोल वसूली को लेकर एक नया और बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. विधानसभा में सरकार द्वारा दिए गए एक जवाब ने प्रदेश की राजनीति में हड़कंप मचा दिया है. खुलासा हुआ है कि मध्य प्रदेश की 43 प्रमुख सड़कों पर सरकार ने आधिकारिक अधिसूचना (Notification) जारी होने से कई महीने पहले ही टोल की वसूली शुरू कर दी थी. कांग्रेस ने इसे नियमों का उल्लंघन और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना बताया है.
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विधायक प्रताप ग्रेवाल के सवाल पर हुआ पर्दाफाश
धार जिले की सरदारपुर सीट से कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल ने विधानसभा में लोक निर्माण विभाग (PWD) से सवाल पूछा था कि प्रदेश की सड़कों पर टोल वसूली की अधिसूचना कब जारी हुई और वास्तविक वसूली कब शुरू हुई. विभाग की ओर से मिले जवाब में सामने आया कि अधिसूचना जारी होने से 6 महीने से लेकर एक साल पहले तक टोल वसूला जा रहा था.
इन प्रमुख सड़कों पर हुआ 'बड़ा खेल'
रिपोर्ट के मुताबिक, अधिसूचना से पहले टोल वसूलने के कुछ चौंकाने वाले उदाहरण ये रहे.
- भोपाल बाईपास: अधिसूचना 8 दिसंबर 2022 को जारी हुई, लेकिन वसूली करीब एक साल पहले ही शुरू कर दी गई.
- सागर-दमोह मार्ग: अधिसूचना दिसंबर 2021 में आई, जबकि वसूली फरवरी 2021 से चालू थी.
- महू-घाटा बिलौद मार्ग: अधिसूचना दिसंबर 2021 में आई, लेकिन वसूली फरवरी 2021 से ही की जा रही थी.
- भिंड-गोपालपुरा मार्ग: यहाँ भी अधिसूचना से करीब 10 महीने पहले से टोल लिया जा रहा था.
कांग्रेस का आरोप: "633 करोड़ रुपए का अवैध लाभ"
विधायक प्रताप ग्रेवाल का आरोप है कि नियमों के विरुद्ध जाकर अधिसूचना से पहले टोल वसूलने से MPRDC को करीब 633 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ है. उन्होंने कहा कि इंडियन टोल एक्ट के तहत सरकार सड़क से बेजा लाभ नहीं कमा सकती और अधिसूचना से पहले वसूली करना सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन है.
पीडब्ल्यूडी मंत्री की सफाई: "खजाने में गया पैसा, भ्रष्टाचार नहीं"
इस पूरे मामले पर पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने सदन में सफाई देते हुए कहा कि इसमें कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ है. उन्होंने तर्क दिया कि वसूला गया सारा पैसा सीधे सरकारी खजाने में जमा हुआ है. मंत्री के अनुसार, कई बार अधिसूचना 'बैक डेट' (Back Date) में जारी की जाती है, जो कि एक प्रक्रिया है. उन्होंने कहा कि यदि पैसा निजी कंपनी की जेब में जाता तब इसे गलत माना जाता.
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