कांग्रेस का 'विभीषण' कौन? मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होते ही कैलाश विजयवर्गीय के दावे से मचा सियासी तूफान

Meenakshi Natarajan Nomination Rejected: मध्य प्रदेश के राज्यसभा चुनाव में मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद सियासत और गर्म हो गई है. बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय के एक दावे ने कांग्रेस के भीतर नए सवाल खड़े कर दिए हैं. अब चर्चा इस बात की है कि आखिर पार्टी की गोपनीय जानकारी बाहर किसने पहुंचाई?

Kailash Vijayvargiya news
कैलाश विजयवर्गीय

आकांक्षा ठाकुर

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मध्य प्रदेश के राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को उस वक्त बड़ा झटका लगा, जब पार्टी प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया गया. इस फैसले के बाद राजनीतिक घमासान और तेज हो गया. इसी बीच बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय के एक बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया है. उनका दावा है कि मीनाक्षी नटराजन से जुड़ी जानकारी बीजेपी तक कांग्रेस के ही एक नेता ने पहुंचाई थी. अब पूरे राजनीतिक घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कांग्रेस का 'विभीषण' कौन है?

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नामांकन रद्द होने के बाद बढ़ा सियासी विवाद

राज्यसभा चुनाव के लिए दाखिल मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पर बीजेपी ने आपत्ति दर्ज कराई थी. पार्टी का कहना था कि नामांकन पत्र के साथ दिए गए शपथ पत्र में उनके खिलाफ चल रहे एक मामले की जानकारी नहीं दी गई. इस आपत्ति पर सुनवाई के बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने निर्धारित समय तक जवाब मांगा और बाद में नामांकन निरस्त कर दिया. इस फैसले के बाद बीजेपी खेमे में खुशी का माहौल दिखा, जबकि कांग्रेस ने इसे बड़ा झटका बताया.

कैलाश विजयवर्गीय के बयान से उठा नया सवाल

नामांकन रद्द होने के बाद मीडिया से बातचीत में कैलाश विजयवर्गीय ने दावा किया कि मीनाक्षी नटराजन से जुड़ी जानकारी बीजेपी को कांग्रेस के ही एक नेता ने दी थी. उनके मुताबिक तेलंगाना से संबंधित दस्तावेज पार्टी तक पहुंचे, जिसके आधार पर आपत्ति दर्ज कराई गई. विजयवर्गीय ने कहा कि बीजेपी के पास पहले यह जानकारी नहीं थी और यह सूचना कांग्रेस के भीतर से ही मिली. उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में कांग्रेस के अंदरूनी मतभेदों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं.

विधानसभा परिसर में दिनभर चला राजनीतिक घमासान

पूरे घटनाक्रम के दौरान विधानसभा परिसर में दोनों दलों के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी रही. कांग्रेस की ओर से दिग्विजय सिंह, मीनाक्षी नटराजन, उमंग सिंघार और विक्रांत भूरिया मौजूद रहे, जबकि बीजेपी की तरफ से कैलाश विजयवर्गीय, महेश केवट, वीडी शर्मा, राकेश सिंह और रामेश्वर शर्मा ने मोर्चा संभाला. फैसला आते ही दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिले.

कांग्रेस का पक्ष भी आया सामने

कांग्रेस का कहना है कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ किसी तरह की एफआईआर दर्ज नहीं है. पार्टी का तर्क है कि उन्हें केवल अदालत की ओर से नोटिस मिला था, इसलिए उस जानकारी को नामांकन पत्र में शामिल नहीं किया गया. कांग्रेस इस फैसले को चुनौती देने की तैयारी में है और चुनाव आयोग से पूरे मामले में दोबारा विचार करने की मांग करने की बात कह रही है.

मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति में हलचल बढ़ गई है. कांग्रेस अपने अगले कदम पर विचार कर रही है, वहीं कैलाश विजयवर्गीय के दावे ने पार्टी के भीतर 'विभीषण' की तलाश वाली चर्चा को और तेज कर दिया है. आने वाले दिनों में चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों की अगली रणनीति पर सबकी नजर रहेगी.

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