IAS Nidhi Nivedita News : मध्य प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था और ब्यूरोक्रेसी में इन दिनों 2012 बैच की आईएएस अधिकारी निधि निवेदिता के फैसलों को लेकर चर्चाएं तेज हैं. महिला एवं बाल विकास विभाग की आयुक्त पद से राजस्व विभाग में स्थानांतरित किए जाने के बाद शासन ने उनके कार्यकाल में जारी किए गए कई महत्वपूर्ण आदेशों को निरस्त कर दिया है. निधि निवेदिता का 5 सितंबर को ट्रांसफर किया गया था, जिसके बाद विभाग में उनके द्वारा किए गए बड़े प्रशासनिक बदलावों को सरकार ने पलट दिया है.
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किन-किन फैसलों को शासन ने किया निरस्त?
निधि निवेदिता के कार्यकाल के दौरान लिए गए कम से कम तीन प्रमुख फैसलों को निरस्त किया गया है. सबसे पहले, 3 सितंबर को उन्होंने विभाग के 14 अधिकारियों की जिम्मेदारियां बदली थीं, जिसमें संयुक्त संचालक अक्षय श्रीवास्तव से पोषण आहार शाखा का प्रभार लेकर उन्हें आधार और एमआईएस शाखा सौंपी गई थी. शासन ने इस कार्य विभाजन को रद्द कर दिया है. दूसरा, जवाहर बाल भवन में राजेश प्रताप सिंह को संचालक नियुक्त करने का आदेश खारिज कर दिया गया है, क्योंकि यह नियुक्ति शासन स्तर से होती है. तीसरा, 66 कर्मचारियों की पदोन्नति के बाद की गई पदस्थापना के आदेश को भी वापस ले लिया गया है.
14 अगस्त की बैठक से शुरू हुआ था विवाद
इस पूरे प्रशासनिक घटनाक्रम के तार 14 अगस्त को हुई एक विभागीय बैठक से जुड़ते हैं. बैठक के दौरान IAS निधि निवेदिता और संयुक्त संचालक अक्षय श्रीवास्तव के बीच तीखी बहस हुई थी. इसके बाद विभाग के अधिकारी और कर्मचारी आक्रोशित होकर दफ्तर के बाहर आ गए थे और आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था. मामला बढ़ने पर महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया को हस्तक्षेप करना पड़ा था, जिसके बाद कर्मचारियों ने प्रदर्शन समाप्त किया. इस विवाद के कुछ ही दिन बाद निधि निवेदिता का तबादला राजस्व विभाग में कर दिया गया और उन्हें भू-अभिलेख एवं बंदोबस्त ग्वालियर का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया.
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राजगढ़ थप्पड़ कांड से भी सुर्खियों में रही थीं निधि निवेदिता
झारखंड की रहने वाली 2012 बैच की आईएएस अधिकारी निधि निवेदिता का विवादों से पुराना नाता रहा है. साल 2020 में राजगढ़ कलेक्टर रहते हुए सीएए के समर्थन में निकाली जा रही बीजेपी की रैली के दौरान एक थप्पड़ कांड हुआ था. आरोप लगा था कि उन्होंने एक बीजेपी नेता और एएसआई को थप्पड़ मारा था, जिसकी जांच के लिए समिति भी बनाई गई थी. सत्ता परिवर्तन के बाद उन्हें कलेक्टर पद से हटा दिया गया था. अब एक बार फिर उनके फैसलों को पलटे जाने के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति और नौकरशाही के गलियारे में कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं.
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