मध्य प्रदेश के सरकारी खजाने में 600 करोड़ का घोटाला! ऐसे हुआ पूरा खेल, जानें किस-किसके खातों में पहुंचा पैसा?

आकांक्षा ठाकुर

• 01:07 PM • 25 Aug 2026

MP Treasury System Fraud: मध्य प्रदेश में करीब 600 करोड़ रुपये के सरकारी फंड में गड़बड़ी का खुलासा हुआ है. अफसरों और कर्मचारियों ने IFMIS सिस्टम में सेंध लगाकर पत्नी व रिश्तेदारों के खातों में पैसे ट्रांसफर किए. इस मामले में 400 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने वित्त मंत्री के इस्तीफे की मांग की है.

MP के सरकारी खजाने से 600 करोड़ रुपये गायब,
MP के सरकारी खजाने से 600 करोड़ रुपये गायब,
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MP Treasury Scam 600 Crore: मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार और सरकारी सिस्टम की सुरक्षा में भारी चूक का एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है. राज्य सरकार के खजाने से करीब 600 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और वित्तीय गड़बड़ी की बात उजागर हुई है. बताया जा रहा है कि सरकारी विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों ने सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाकर सरकारी पैसे को अपनी पत्नियों, रिश्तेदारों और निजी खातों में ट्रांसफर कर लिया. क्या है पूरा मामला कौसे इस महाघोटाले को दिया गया अंजाम? जानते हैं इस खबर में...

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कैसे हुआ 600 करोड़ रुपये का यह महाघोटाला?

ट्रेजरी एंड अकाउंट्स डिपार्टमेंट की 'स्टेट फाइनेंशियल सेल' द्वारा की गई जांच में इस 600 करोड़ रुपये की बड़ी वित्तीय गड़बड़ी का पर्दाफाश हुआ है. यह घोटाला पिछले 5 सालों के दौरान सरकारी भुगतान प्रणाली इंटीग्रेटेड फाइनेंशियल मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (IFMIS) के जरिए अंजाम दिया गया. इसी सिस्टम से मध्य प्रदेश सरकार के करीब 4.5 लाख करोड़ रुपये के सालाना बजट का भुगतान होता है.

भ्रष्टाचारियों ने धोखाधड़ी के लिए ये तरीके अपनाए:

पासवर्ड और ओटीपी का दुरुपयोग: डीडीओ (DDO) लॉगिन पासवर्ड साझा किए गए और कर्मचारियों ने सिस्टम में दर्ज मोबाइल नंबरों को बदलकर अपने नंबर अपडेट कर लिए.
डबल रूट और फर्जी बिल: एक ही काम का दो बार भुगतान उठाया गया और फर्जी बिलों के आधार पर पेमेंट क्लियर कराई गई.
रिश्तेदारों के खाते जोड़ना: सरकारी खातों से फंड सीधे पत्नी, रिश्तेदारों और करीबियों के बैंक खातों में भेजे गए, जिनका इस्तेमाल ऑनलाइन सट्टेबाजी में भी किए जाने का दावा है.

कई विभागों में फैली सेंधमारी, 400 से अधिक पर FIR

जांच में सामने आया है कि मध्य प्रदेश के कई विभागों के कर्मचारी और अधिकारी इस फर्जीवाड़े में शामिल हैं. कुल 600 करोड़ में से 305 करोड़ रुपये के 199 बेहद संदिग्ध ट्रांजैक्शन पाए गए हैं. इसके अलावा 293 करोड़ रुपये सीधे निजी खातों में भेजे गए. अब तक केवल 220 करोड़ रुपये की रिकवरी हो पाई है, जबकि 380 करोड़ रुपये की रिकवरी अभी बाकी है.

सबसे ज्यादा प्रभावित विभाग:

  • स्कूल शिक्षा विभाग: 45 मामले
  • राजस्व विभाग: 43 मामले
  • पुलिस विभाग: 12 मामले
  • वन विभाग: 9 मामले
  • स्वास्थ्य विभाग: 8 मामले
  • पशुपालन एवं डेयरी विभाग: 6 मामले
  • कृषि, जल संसाधन और पीएचई (PHE): 4-4 मामले

इसके अलावा अन्य 15 सरकारी विभागों में भी ऐसी वित्तीय धांधली देखने को मिली है. मामले में 400 से ज्यादा अधिकारी और कर्मचारी जांच के घेरे में हैं और जिनपर FIR दर्ज की जा चुकी है.

जीतू पटवारी का हमला- 'वित्त मंत्री तुरंत दें इस्तीफा'

इस घोटाले के सामने आते ही राज्य में राजनीतिक घमासान मच गया है. मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया (X) पर सरकार को घेरते हुए इसे गरीब, किसान और बच्चों के हक पर डाका बताया.

जीतू पटवारी ने कहा, "सरकारी धन गरीब के राशन, किसान की मदद और बच्चों की किताबों के लिए था, जिसमें 600 करोड़ की सेंध लग गई. पीएम मोदी इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करें और दोषियों को बेनकाब करें. वित्त विभाग की नाक के नीचे इतना बड़ा डाका पड़ा है, इसलिए मध्य प्रदेश के वित्त मंत्री को तुरंत अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए."

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