Chhatron Ki Goonj Event Indore: मध्य प्रदेश की औद्योगिक राजधानी इंदौर में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का आगामी 19 सितंबर को 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम प्रस्तावित है. हालांकि, कार्यक्रम के आयोजन स्थल और अनुमति को लेकर इंदौर जिला प्रशासन और कांग्रेस आमने-सामने आ गए हैं. नेहरू स्टेडियम की अनुमति न मिलने के बाद शुरू हुआ यह विवाद अब राजनीतिक अखाड़े में तब्दील हो चुका है, जहां बीजेपी और कांग्रेस के बीच भी तीखी जुबानी जंग देखने को मिल रही है.
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कांग्रेस ने प्रशासन के सामने रखे कई विकल्प
पूरे मामले की शुरुआत 29 अगस्त को हुई थी, जब शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने ऐतिहासिक नेहरू स्टेडियम में 8 से 12 सितंबर के बीच कार्यक्रम कराने के लिए नगर निगम कमिश्नर को पत्र सौंपा था. कोर्ट की पुरानी गाइडलाइंस और आदेशों का हवाला दिए जाने पर जब अनुमति में पेंच फंसा, तो कांग्रेस ने राहुल गांधी के दौरे की तारीख बदलकर 19 सितंबर कर दी. इसके बाद रीजनल पार्क के सामने स्थित आईडीए के खाली मैदान को नया ठिकाना चुना गया. इसके अलावा कांग्रेस ने बैकअप के तौर पर जीएसीसी (GACC) के पीछे का खाली मैदान और यूनिवर्सिटी कैंपस ग्राउंड के विकल्प भी प्रशासन के समक्ष रखे हैं.
कांग्रेस का आरोप- सत्ता के दबाव में है प्रशासन
प्रशासनिक स्तर पर विवाद उस समय गहरा गया जब इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने मौखिक रूप से कार्यक्रम की जानकारी जरूर दी थी, लेकिन आयोजन स्थल के लिए नियमानुसार अब तक कोई लिखित आवेदन नहीं मिला है. कलेक्टर के इस दावे पर पलटवार करते हुए कांग्रेस नेताओं ने कहा कि वे पिछले सात दिनों से लगातार लिखित व मौखिक पत्राचार कर रहे हैं. कांग्रेस का आरोप है कि देश के नेता प्रतिपक्ष के कार्यक्रम में अड़ंगे लगाए जा रहे हैं और जिला प्रशासन सत्ताधारी दल के दबाव में काम कर रहा है.
कैलाश विजयवर्गीय के बयान पर कांग्रेस का पलटवार
राहुल गांधी के इस प्रस्तावित दौरे को लेकर बीजेपी और कांग्रेस नेताओं के बीच बयानों के तीर चल रहे हैं. मध्य प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और उनके बेटे आकाश विजयवर्गीय ने दावा किया था कि राहुल गांधी के इंदौर आने से बीजेपी को ही राजनीतिक फायदा होगा. इस पर कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता रागिनी नायक ने तीखा हमला बोला. फिलहाल 19 सितंबर के इस हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम को लेकर संशय बरकरार है और सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन कब अनुमति जारी करता है.
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