मध्य प्रदेश के सागर जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसे सुनकर हर कोई हैरान है. एक किसान की 34 एकड़ जमीन पर महीनों की मेहनत से तैयार की गई गेहूं और चने की फसल रातों-रात गायब हो गई. पीड़ित किसान जब सुबह अपने खेत पहुंचा, तो वहां फसल का एक तिनका तक नहीं बचा था. यह चोरी है, डकैती है या कुछ और, इसे लेकर अब पूरे इलाके में चर्चाओं का बाजार गर्म है.
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महीनों की मेहनत, एक रात में सफाचट
सागर जिले के किटुआ गांव के रहने वाले किसान पुष्पेंद्र लोधी का दावा है कि उन्होंने अपनी 34 एकड़ कृषि भूमि पर गेहूं और चने की फसल उगाई थी. फसल पककर तैयार थी और कटाई के बाद उसके बंडल खेतों में रखे हुए थे. लेकिन जब वह 18 तारीख की सुबह खेत पहुंचे, तो वहां का नजारा देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई. पूरी की पूरी फसल गायब थी और खेत एकदम खाली पड़ा था
'इतनी सफाई से चोरी कि निशान तक नहीं बचे'
पुष्पेंद्र लोधी का आरोप है कि चोरों ने इतनी सफाई से हाथ साफ किया है कि जमीन देखकर यह अंदाजा लगाना भी मुश्किल है कि वहां कभी फसल बोई गई थी. किसान का कहना है कि यह काम किसी इंसान के बस का नहीं है, बल्कि बड़ी मशीनों का इस्तेमाल करके रातों-रात इतनी बड़ी मात्रा में फसल उड़ाई गई है. किसान के मुताबिक करीब 400 क्विंटल फसल गायब हुई है, जिसमें बीज, फर्टिलाइजर और सिंचाई पर लाखों रुपये खर्च किए गए थे.
पुलिस और प्रशासन पर मिलीभगत का आरोप
पीड़ित किसान ने इस पूरे मामले में स्थानीय पुलिस और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. पुष्पेंद्र लोधी का कहना है कि उन्होंने डेढ़ महीने पहले राहतगढ़ थाने में शिकायत की थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. उनका आरोप है कि टीआई, एसडीएम और तहसीलदार की साठगांठ से इस वारदात को अंजाम दिया गया है. पुलिस द्वारा सुनवाई न होने पर अब किसान अपनी गुहार लेकर कलेक्टर की जन सुनवाई में पहुंचा है.
कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश
मामला गरमाने के बाद सागर कलेक्टर ने इस पर संज्ञान लिया है. कलेक्टर का कहना है कि मामले की गहन जांच कराई जा रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. 34 एकड़ की फसल का रातों-रात गायब हो जाना न केवल एक बड़ा अपराध है, बल्कि यह सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है. अब देखना होगा कि प्रशासन की जांच में इस 'मिस्टीरियस' चोरी का क्या सच सामने आता है.
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