Twisha Case: 'टनल व्यू' टेकनीक से सुलझेगी ट्विशा के मौत की गुत्थी, CBI बनाएगी मौत के आखिरी पलों का डिजिटल अवतार

Twisha Sharma Case: सीबीआई अब 'टनल व्यू' तकनीक के जरिए ट्विशा की मौत के आखिरी घंटों का एक डिजिटल और वर्चुअल अवतार (3D सिम्युलेशन) तैयार कर रही है. सीसीटीवी, वाई-फाई और फोन रिकॉर्ड्स को सिंक करके बनाई जा रही इस मिनट-टू-मिनट टाइमलाइन से आरोपियों के झूठ और सबूतों से छेड़छाड़ की पोल खुल सकेगी.

ट्विशा शर्मा के आखिरी वक्त में साथ नहीं था पति
ट्विशा शर्मा के आखिरी वक्त में साथ नहीं था पति

रवीशपाल सिंह

follow google news

Bhopal Twisha Sharma Case Update: भोपाल में हुई ट्विशा शर्मा संदिग्ध मौत मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI ने जांच को आर-पार के मोड़ पर ला खड़ा किया है. 28 मई को ट्विशा की सास और पूर्व महिला जज गिरिबाला सिंह की गिरफ्तारी और पति समर्थ सिंह की पहले से चल रही कस्टडी के बाद अब सीबीआई उस सबसे बड़े सवाल का जवाब ढूंढ रही है जिससे अब तक पर्दा नहीं उठा है, आखिर 12 मई की उस काली रात को ससुराल के बंद कमरों में क्या हुआ था?

Read more!

इस अनसुलझी पहेली को क्रैक करने के लिए सीबीआई ने अब एक बेहद आधुनिक और एडवांस फॉरेंसिक हथियार का इस्तेमाल शुरू किया है, जिसे 'टनल व्यू' तकनीक कहा जाता है. इस तकनीक के जरिए ट्विशा के आखिरी पलों का एक पूरा डिजिटल अवतार यानी वर्चुअल रिकंस्ट्रक्शन तैयार किया जा रहा है.

क्या है टनल व्यू और कैसे काम करेगी ये तकनीक?

सीबीआई की टीम भोपाल के कटारा हिल्स स्थित ट्विशा के ससुराल में उसके जीवन के आखिरी कुछ घंटों को वर्चुअली री-क्रिएट करने की कोशिश कर रही है. आसान शब्दों में कहें तो ये जांच का एक ऐसा डिजिटल चक्रव्यूह है जिसमें समय की सुइयों को पीछे ले जाकर घटनाक्रम को हूबहू परदे पर उतारा जाता है.

जांचकर्ता एक ऐसी फोकस्ड मिनट-टू-मिनट टाइमलाइन तैयार कर रहे हैं, जिसमें ट्विशा की मौत से ठीक पहले की हर हलचल, बातचीत और डिजिटल एक्टिविटी को आपस में लिंक किया जा सके. इसके लिए कई अलग-अलग कड़ियों को एक साथ जोड़ा जा रहा है: इसके लिए घर के कमरों का एक 3D डिजिटल ढांचा तैयार किया गया है. घर के सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल फोन का डेटा, वाई-फाई के लॉग्स और कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) को खंगाला जा रहा है.

इन सभी जानकारियों को मिलाकर कंप्यूटर पर एक वर्चुअल माहौल तैयार हो रहा है, जिससे यह साफ-साफ दिख सकेगा कि ट्विशा आखिरी बार घर के किस हिस्से में गई थीं, उस दौरान घर में कौन आ-जा रहा था और घटना से ठीक पहले किसने क्या किया.

बयानों के झूठ को पकड़ेगा सिम्युलेटेड सच

इस टनल व्यू एनालिसिस का सबसे बड़ा फायदा ये होगा कि यह आरोपियों के बयानों में छिपे विरोधाभासों और झूठ को बेनकाब कर देगा. कैमरे के टाइमस्टैम्प, फोन की हर क्लिक और इंटरनेट यूसेज के डेटा को आपस में सिंक करके अंतिम घंटों का एक लाइव सिम्युलेशन तैयार किया जा रहा है.

इससे सीबीआई दो अहम मोर्चों पर काम कर पाएगी. पहला, बयानों में समय को लेकर जो भी हेर-फेर की गई होगी, वह इस टाइमलाइन के सामने आते ही पकड़ी जाएगी. दूसरा ये कि घटना के तुरंत बाद क्या किसी डिजिटल सबूत को डिलीट किया गया, फोन से डेटा मिटाया गया या किसी कहानी को गढ़ा गया. तकनीक इसकी परत-दर-परत पोल खोल देगी.

सीबीआई का मकसद इस पूरे वर्चुअल एनवायरनमेंट के जरिए उस रात का सच सामने लाना है, ताकि यह पूरी तरह साफ हो सके कि मौत वाली रात ट्विशा पर किस तरह का मानसिक दबाव था, वहां क्या साजिश रची गई और क्या वारदात के बाद घटनास्थल के साथ कोई छेड़छाड़ की गई थी. डिजिटल सबूतों की यह कंक्रीट दीवार अब आरोपियों के लिए बच निकलना नामुमकिन बना देगी.

ये भी पढ़ें: Twisha Sharma Case: पूर्व महिला जज गिरिबाला सिंह को CBI ने किया गिरफ्तार, 6 घंटे की पूछताछ में सास ने किए कई खुलासे

 

    follow google news