मध्य प्रदेश के उज्जैन में कुछ जालसाजों ने करोड़ों रुपये डकारने के लिए मरे हुए लोगों को कागजों पर जिंदा कर दिया. इस घोटाले का जब पर्दाफाश हुआ तो लोग सन्न रह गए. दरअसल इसका पर्दाफाश आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने किया है और इस मामले में 40 लोगों को आरोपी बनाया गया है.
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कैसे शुरू हुआ मौत का ये 'काला कारोबार'?
इस गैंग की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसी ही है. जालसाजों की नजर ऐसे लोगों पर रहती थी जो या तो पहले से गंभीर रूप से बीमार थे या जिनकी मृत्यु हो चुकी थी. ईओडब्ल्यू एसपी समर वर्मा के अनुसार आरोपियों ने ICICI प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के साथ लगभग 8 करोड़ रुपये की ठगी को अंजाम दिया. खेल ये था कि मृत लोगों के नाम पर बीमा पॉलिसी ली गई और फिर कुछ समय बाद फर्जी डेथ सर्टिफिके लगाकर क्लेम फाइल कर दिया गया.
कैसे हुआ खुलासा
यह घोटाला तब उजागर हुआ जब बीमा कंपनी के पास एक के बाद एक कई ऐसे क्लेम आए, जिनमें पॉलिसी लेने के कुछ ही समय बाद धारक की मौत हो गई थी. कंपनी को दाल में कुछ काला लगा और जब आंतरिक जांच की गई तो 27 संदिग्ध मामले सामने आए. इनमें से 8 मामलों में तो हद ही हो गई पॉलिसी उन लोगों के नाम पर थी जो पहले ही मर चुके थे. इसके बाद कंपनी ने ईओडब्ल्यू से इसकी शिकायत की.
सरपंच से लेकर एजेंट तक सब मिले हुए
जांच में खुलासा हुआ कि यह कोई छोटा-मोटा काम नहीं बल्कि एक सोची समझी साजिश थी. इसमें बीमा एजेंट, पॉलिसी होल्डर के नॉमिनी और यहां तक कि पंचायत स्तर के जिम्मेदार अधिकारी भी शामिल थे. सरपंच, सचिव और सहायक सचिव ने मिलीभगत कर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार किए.
इस खेल में 10 बीमा एजेंट शामिल थे जिन्होंने नियमों को ताक पर रखकर पॉलिसियां जारी करवाईं. EOW ने अब तक 21 नॉमिनी और अन्य कर्मचारियों समेत कुल 40 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है.
आगे क्या?
ईओडब्ल्यू की टीम अब दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच कर रही है. अधिकारियों का मानना है कि जैसे-जैसे पूछताछ आगे बढ़ेगी, इस घोटाले के तार और भी गहरे जुड़ सकते हैं. यह मामला साफ दिखाता है कि कैसे सरकारी सिस्टम की कमियों का फायदा उठाकर अपराधी करोड़ों के वारे-न्यारे कर रहे हैं। फिलहाल, उज्जैन के इस 'बीमा कांड' ने पूरे प्रदेश के प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा दिया है.
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