रात में राजीनामा, सुबह सड़क पर हंगामा: शहर काजी की सहमति के बाद भी उज्जैन की शाही मस्जिद पर क्यों भड़का बवाल?

रवीशपाल सिंह

• 01:07 PM • 28 Sep 2026

रात में शहर काजी और प्रशासन के बीच सहमति के बावजूद सोमवार सुबह शाही मस्जिद के पास अचानक भड़की भीड़ ने पथराव कर दिया, जिसके बाद स्थिति पर काबू पाने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े.

उज्जैन मस्जिद
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मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में सिंहस्थ 2028 की महातैयारियों के बीच सोमवार की सुबह अचानक माहौल गर्मा गया. कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक सड़क को 15 मीटर चौड़ा करने की योजना के तहत गोपाल मंदिर इलाके में स्थित शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने का काम चल रहा था. इसी दौरान विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गया, जो देखते ही देखते पथराव और आंसू गैस के गोले तक पहुंच गया.

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सहमति के बाद अचानक कैसे बिगड़े हालात?

मामले को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि रविवार रात जब प्रशासन और मुस्लिम समाज के धर्मगुरुओं के बीच समझौता हो गया था, तो सोमवार सुबह हंगामा क्यों हुआ?

रविवार रात उज्जैन के कलेक्टर रौशन कुमार और शहर काजी खलिकुर्ररेहमान के बीच लंबी बातचीत हुई थी. इसमें तय पाया गया था कि प्रशासन की भारी-भरकम मशीनों से तोड़ने के बजाय मस्जिद से जुड़े लोग खुद ही सड़क चौड़ीकरण की जद में आ रहे हिस्से को शांतिपूर्वक हटाएंगे. इस बात की पुष्टि कलेक्टर के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर शेयर किए गए शहर काजी के वीडियो बयान से भी हुई.

रात में बनी सहमति के बाद सोमवार तड़के प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से भारी पुलिस बल तैनात किया और तय योजना के मुताबिक समाज के लोगों ने प्रभावित हिस्से को हटाना शुरू भी कर दिया था. लेकिन इसी बीच स्थानीय स्तर पर कुछ मैसेज वायरल हुए, जिसके बाद मस्जिद परिसर और आसपास के इलाके में भीड़ जुटने लगी.

विरोध, धक्का-मुक्की और पथराव

भीड़ में महिलाओं समेत समाज का एक दूसरा गुट शामिल हो गया, जो इस कार्रवाई के खिलाफ था. पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा के लिए लगाए गए बैरिकेड्स तोड़कर प्रतिबंधित क्षेत्र में घुसने का प्रयास किया.

जब पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, तो स्थिति बेकाबू हो गई. प्रदर्शनकारियों की ओर से पथराव शुरू हो गया, जिसके जवाब में पुलिस ने भीड़ को खदेड़ने के लिए हल्का बल प्रयोग किया और आंसू गैस के गोले छोड़े. इस झड़प में कुछ पुलिसकर्मियों के चोटिल होने की खबर है.

पूरी मस्जिद नहीं, केवल अलाइनमेंट में आ रहा हिस्सा हटेगा

प्रशासन और पुलिस ने साफ किया है कि पूरी शाही मस्जिद को नहीं गिराया जा रहा है. केवल वही हिस्सा हटाया जाना है, जो 15 मीटर चौड़ी सड़क के तय अलाइनमेंट में बाधा बन रहा है. इसमें नमाज अदा करने वाले स्थान का एक छोटा हिस्सा, मजहर चौक शाही और करीब 120 फीट ऊंची मीनार का कुछ भाग शामिल है.

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बीते 9 सितंबर को इस कार्रवाई के खिलाफ दायर सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया था. कोर्ट में सुनवाई के दौरान प्रशासन ने स्पष्ट किया था कि सिंहस्थ 2028 में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं की सुगम आवाजाही के लिए यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है. इसी सड़क पर पहले भी 10 मंदिरों और एक मस्जिद के प्रभावित हिस्सों को सहमति से हटाया जा चुका है.

उज्जैन के एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया कि शहर के सभी समुदाय विकास कार्यों में सहयोग कर रहे हैं और वर्तमान में मस्जिद समिति द्वारा स्वयं ही अलाइनमेंट में आ रहे हिस्से को हटाने का काम जारी है.

विरोध करने वालों का क्या कहना है?

दूसरी ओर, विरोध में उतरे लोगों का तर्क है कि वे पहले ही मस्जिद से सटी अपनी दुकानें और अन्य निर्माण सड़क के लिए दे चुके हैं. उनका मानना है कि अब मस्जिद के मुख्य ढांचे को छूने के बजाय प्रशासन को सड़क का अलाइनमेंट थोड़ा बदल देना चाहिए.

हालांकि, प्रशासन का कहना है कि सिंहस्थ की विशाल भीड़ और यातायात व्यवस्था को देखते हुए सड़क की चौड़ाई से कोई समझौता नहीं किया जा सकता. फिलहाल क्षेत्र में स्थिति नियंत्रण में है और पुलिस बल तैनात है.

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