मध्य प्रदेश में इन दिनों एक IAS अधिकारी के ट्रांसफर का मामला सुर्खियों में बना हुआ है. IAS अधिकारी नेहा मारव्या सिंह ने नई पोस्टिंग मिलने के महज 50 दिन के अंदर ट्रांसफर किए जाने पर नाराजगी जताई है. साथ ही यह एक साल में उनका चौथा ट्रांसफर है. IAS अधिकारी ने एक मैसेज के जरिए अपना दुख शेयर करते हुए सिस्टम पर कई गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं. उन्होंने मैसेज में साफ-साफ लिखा है कि वह काफी लंबे समय से धैर्य और चुप्पी साधे रखी हुई थी, लेकिन अब स्थिति ऐसी हो गई है कि साथ काम करने वाले उन्हें ट्रांसफर कराने की धमकी देने लगे हैं. ऐसे में आइए जानते हैं आखिर कौन हैं IAS नेहा मारव्या सिंह, कैसा रहा उनका करियर और उन्होंने मैसेज में क्या-कुछ लिखा है.
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कौन हैं IAS नेहा मारव्या सिंह?
नेहा मारव्या सिंह 2011 बैच की मध्य प्रदेश कैडर की एक IAS अधिकारी है. बताया जा रहा है कि वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश की रहने वाली है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनके 15 साल के प्रशासनिक करियर में अब तक 11 बार ट्रांसफर हो चुका है. इस बार तो महज 50 दिन के भीतर ही तबादला हो गया है और उन्हें प्रबंध संचालक, मध्य प्रदेश अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम बनाया गया है. बताया जाता है कि नेहा मारव्या सिंह ने कंप्यूटर साइंस में B.Tech किया है और इसके बाद UPSC की तैयारी कर IAS बनीं.
विवादों से पुराना नाता
IAS नेहा के प्रशासनिक करियर के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विवादों की खबरें पहले भी सामने आई है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2017 में शिवपुरी जिला पंचायत CEO के
पद पर रहते हुए तत्कालीन कलेक्टर ओपी श्रीवास्तव से उनका विवाद काफी चर्चा में रहा था. राजस्व विभाग में पदस्थापना के दौरान तत्कालीन प्रमुख सचिव मनीष रस्तोगी के साथ मतभेद का मामला भी सुर्खियों में रहा. नेहा मारव्या ने आरोप लगाया था कि पदभार संभालने के लिए कार्यालय पहुंचने पर उन्हें अंदर प्रवेश नहीं दिया गया और बाहर जाने के लिए कहा गया.
डिंडौरी कलेक्टर के तौर पर कार्यकाल के दौरान भी उनकी कार्यशैली को लेकर विवाद सामने आए. अगस्त 2025 में भाजपा विधायक ओमप्रकाश धुर्वे ने जनसुनवाई के दौरान उनकी कार्यशैली को लेकर मुख्यमंत्री से शिकायत करने की बात कही थी. अब उनका ट्रांसफर चर्चा का विषय बना हुआ है.
ट्रांसफर के बाद मैसेज में क्या-कुछ लिखा?
5 सितंबर को ट्रांसफर लिस्ट में नाम आने के बाद उन्होंने एक मैसेज लिखकर अपनी नाराजगी जताई है. नेहा मारव्या सिंह ने लिखा कि, 5 सितंबर के ट्रांसफर लिस्ट में अपना नाम देख मैं काफी निराश हूं. महज 50 दिनों के अंदर मेरा ट्रांसफर कर दिया गया है और एक साल के अंदर चौथी बार ट्रांसफर लिस्ट में मेरा नाम है.
उन्होंने आगे लिखा कि, 'मैं यहां अपनी नाराजगी जाहिर करना चाहती हूं और उम्मीद करती हूं कि मुझे कोई समाधान मिलेगा. मैं अच्छी तरह समझती हूं कि एक IAS ऑफिसर के तौर पर राज्य सरकार जहां चाहे वहाँ मुझसे काम करवा सकती है, और मैंने हमेशा सम्मान के साथ आदेशों को माना है.'
'मेज पर हाथ पटककर ट्रांसफर करने की देते हैं धमकी'
नेहा मारव्या सिंह ने आगे लिखा कि, मैं इस बार बहुत निराश महसूस कर रही हूं. मेरा ट्रांसफर इसलिए किया गया क्योंकि जिन कर्मचारियों (सबऑर्डिनेट) का कंट्रोल मेरे पास नहीं बल्कि डिपार्टमेंट के पास है, उन्होंने मेरे खिलाफ बगावत कर दी. वे मेरी डेस्क पर हाथ पटककर मुझे ट्रांसफर करवाने की धमकी देते हैं. मैंने सही चैनल के जरिए अनुशासनहीनता, कर्मचारियों द्वारा फाइलें दबाकर रखने और डिपार्टमेंट में मेरे साथ हुए बुरे बर्ताव की रिपोर्ट की थी, यह उम्मीद करते हुए कि जरूरी कार्रवाई होगी. लेकिन इसके बजाय मेरा ही ट्रांसफर कर दिया गया?
'क्या एक IAS ऑफिसर इतना कमजोर होता है'
नेहा ने आगे नाराजगी जताते हुए लिखा कि, 'इससे क्या मैसेज जाएगा? क्या एक IAS अफसर इतना कमजोर होता है कि उसके कर्मचारी बगावत करके उसका ट्रांसफर करवा सकते हैं? मैंने ऐसा क्या किया कि एक महीने के अंदर ही कर्मचारियों ने बगावत कर दी? मेरी बात छोड़िए, मुझे नहीं लगता कि कोई IAS ऑफिसर ऐसा कुछ कर सकता है जिससे कर्मचारी उसके जॉइन करने के एक महीने के अंदर ही बगावत कर दें. एक ऑफिसर को तो काम समझने में ही एक महीना लग जाता है. लेकिन कर्मचारियों की बगावत के कारण हुए इस ट्रांसफर से मैं अपमानित महसूस कर रही हूं.
उन्होंने आगे लिखा कि, 'मैं कैसे काम करूं? मेरा कार्यकाल छोटा (2-3 महीने) होता है. जब तक मैं चार्ज समझती हूं, मुझे हटा दिया जाता है. मेरे कर्मचारियों को भी लगता है कि मैं आसान शिकार हूं. अगर मैं उनकी मर्ज़ी से काम न करूं तो वे मेरा ट्रांसफर करवा सकते हैं. मैंने कई सालों तक खामोशी और सब्र के साथ काम न मिलने और किनारे किए जाने का दर्द सहा, यह उम्मीद करते हुए कि हालात सुधरेंगे, लेकिन स्थिति और खराब हो गई है, अब कर्मचारी मुझे धमकी देने लगे हैं.'
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