टेस्ट ट्यूब टूटी, फिर हुई रिसर्चर की मौत! साइबेरिया में 200 लोग निगरानी में, प्लेग की आशंका

ऋषि राज

05 Oct 2026 (अपडेटेड: Oct 5 2026 7:03 PM)

साइबेरिया में एंटी-प्लेग इंस्टीट्यूट की 28 वर्षीय रिसर्चर दर्या शिपिलोवा की गंभीर निमोनिया से मौत. लैब में टेस्ट ट्यूब टूटने के बाद 200 लोग निगरानी में, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर.

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रूस में प्लेग फैलने के दावों की क्या है कहानी ?
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न्यूज़ हाइलाइट्स

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28 साल की दर्या शिपिलोवा को अस्पताल में भर्ती कराया गया.

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करीब 200 लोगों को अस्पताल में क्वारंटीन किया गया है.

रूस के साइबेरिया इलाके में एक 28 वर्षीय रिसर्चर की गंभीर निमोनिया से मौत के बाद स्वास्थ्य अधिकारियों की चिंता बढ़ गई है. मृतक महिला एक एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट में काम करती थीं. उनकी मौत के बाद उनके संपर्क में आए करीब 200 लोगों को मेडिकल निगरानी में रखा गया है. कुछ इलाकों में एहतियाती तौर पर क्वारंटीन जैसे कदम भी उठाए गए हैं. हालांकि, इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या महिला की मौत प्लेग की वजह से हुई? फिलहाल रूसी स्वास्थ्य अधिकारियों ने प्लेग संक्रमण की पुष्टि नहीं की है.

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क्या हुआ था रिसर्चर के साथ?

रिपोर्टों के मुताबिक, इरकुत्स्क एंटी-प्लेग इंस्टीट्यूट में काम करने वाली 28 साल की दर्या शिपिलोवा को 29 सितंबर को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उन्हें गंभीर निमोनिया था और हालत बिगड़ने के बाद वेंटिलेटर पर रखा गया. लेकिन इलाज के बावजूद दो दिन बाद उनकी मौत हो गई. बताया जा रहा है कि मौत से पहले वह पड़ोसी क्षेत्र बुर्यातिया में एक फील्ड एक्सपीडिशन पर गई थीं. इसी दौरान उनकी तबीयत बिगड़ी. रिपोर्टों में दावा है कि उन्होंने मेडिकल स्टाफ को बताया था कि रिसर्च के दौरान उनसे गलती से एक ऐसी टेस्ट ट्यूब टूट गई थी, जिसमें जीवित बैक्टीरिया मौजूद थे. यही जानकारी अब इस पूरे मामले को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा में है.

क्या टूटी टेस्ट ट्यूब से हुआ संक्रमण?

फिलहाल यह साबित नहीं हुआ है कि रिसर्चर को संक्रमण उसी टेस्ट ट्यूब की वजह से हुआ था. रूस की पब्लिक हेल्थ निगरानी एजेंसी रोस्पोट्रेबनादजोर ने उनकी बीमारी को अज्ञात कारणों से हुआ निमोनिया बताया है. एजेंसी के अनुसार, महिला के शरीर में उनके पेशेवर काम से जुड़े किसी माइक्रोऑर्गेनिज्म का पता नहीं चला. यानी अभी तक जांच में ऐसा कोई वैज्ञानिक सबूत सामने नहीं आया है जो यह साबित करे कि उनकी मौत किसी लैब संक्रमण या प्लेग बैक्टीरिया की वजह से हुई.

फिर 200 लोगों की निगरानी क्यों?

रिसर्चर की मौत के बाद स्वास्थ्य अधिकारियों ने उनके संपर्क में आए लोगों की पहचान शुरू की. अनौपचारिक रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 200 लोगों को शेलखोव अस्पताल में मेडिकल निगरानी या क्वारंटीन जैसे इंतजामों में रखा गया है. क्षेत्र के तीन अस्पतालों में भी एहतियाती कदम उठाए जाने की जानकारी सामने आई है. इरकुत्स्क के गवर्नर इगोर कोबजेव ने कहा कि जिन लोगों की पहचान संपर्क के तौर पर हुई है, उन सभी की मेडिकल निगरानी की जा रही है. उनके मुताबिक, अभी किसी संपर्क में बीमारी के लक्षण नहीं मिले हैं और किए गए लैब टेस्ट भी निगेटिव आए हैं.

क्या रूस में प्लेग फैल गया है?

फिलहाल ऐसा कोई आधिकारिक सबूत नहीं है. पड़ोसी बुर्यातिया के प्रमुख अलेक्सी त्सिदेनोव ने कहा कि महिला की मौत संभवतः प्लेग से हुई हो सकती है. लेकिन उन्होंने साथ ही साफ किया कि बुर्यातिया में प्लेग का कोई प्रकोप नहीं है. दूसरी तरफ, रोस्पोट्रेबनादजोर ने अभी तक प्लेग की पुष्टि नहीं की है. एजेंसी के पूर्व प्रमुख गेनाडी ओनिशचेंको ने भी कहा कि उपलब्ध जानकारी के आधार पर इस बीमारी के प्लेग होने की संभावना कम है. यानी अभी स्थिति ऐसी है कि प्लेग की आशंका को पूरी तरह नजरअंदाज भी नहीं किया जा रहा, लेकिन इसकी पुष्टि भी नहीं हुई है.

एंटी-प्लेग संस्थान होने से क्यों बढ़ी चिंता?

इस मामले को लेकर चिंता इसलिए ज्यादा है क्योंकि शिपिलोवा जिस संस्थान में काम करती थीं, वहां प्लेग समेत खतरनाक संक्रामक बीमारियों पर रिसर्च और निगरानी की जाती है. इसी वजह से टेस्ट ट्यूब टूटने की रिपोर्ट ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. क्या टेस्ट ट्यूब में मौजूद बैक्टीरिया से रिसर्चर संक्रमित हुई थीं? क्या बीमारी का उनकी लैब की गतिविधियों से कोई संबंध था? या फिर गंभीर निमोनिया का कारण कुछ और था? इन सवालों के जवाब फिलहाल जांच के बाद ही सामने आएंगे.

साइबेरिया पहुंचीं रूस की शीर्ष स्वास्थ्य अधिकारी मामले की गंभीरता को देखते हुए रूस की मुख्य स्टेट सैनिटरी डॉक्टर अन्ना पोपोवा खुद साइबेरिया पहुंचीं. अधिकारियों ने क्षेत्र में सैनिटरी और एंटी-एपिडेमिक बैठक कर हालात की समीक्षा की. स्वास्थ्य अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया या अनौपचारिक स्रोतों से फैल रही अफवाहों पर भरोसा न करें और सिर्फ आधिकारिक जानकारी पर ध्यान दें.

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न्यूमोनिक प्लेग कितना खतरनाक है?

विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO के मुताबिक, न्यूमोनिक प्लेग वह रूप है जो फेफड़ों को प्रभावित करता है. यह संक्रमित व्यक्ति से निकलने वाली सांस की बूंदों के जरिए दूसरे व्यक्ति तक पहुंच सकता है. हालांकि, समय पर बीमारी की पहचान हो जाए तो एंटीबायोटिक्स से इसका इलाज किया जा सकता है. यही वजह है कि संदिग्ध मामलों में जल्द जांच और संपर्क में आए लोगों की निगरानी बेहद महत्वपूर्ण होती है.

फिलहाल सबसे अहम बात यही है कि रूस में प्लेग के किसी प्रकोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. रिसर्चर की मौत की वजह गंभीर निमोनिया बताई गई है और जांच अभी जारी है. जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ होगा कि उनकी बीमारी का संबंध किसी खतरनाक बैक्टीरिया से था या नहीं और टेस्ट ट्यूब टूटने की घटना का उनकी मौत से वास्तव में कोई कनेक्शन था या नहीं.

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