Nana Patekar: कौन हैं पत्नी नीलकांति जो नाना पाटेकर से 35 साल तक दूर रहकर भी सुहागन रहीं?

रूपक प्रियदर्शी

08 Oct 2026 (अपडेटेड: Oct 8 2026 8:32 PM)

Nana Patekar wife: नाना पाटेकर और नीलकांति के बीच क्या हुआ कि दोनों एक दूसरे से 35 साल दूर रहे. मनीषा कोइराला और आयशा झुल्का के साथ अफेयर की क्या है कहानी ?

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कौन हैं नाना पाटेकर की पत्नी नीलकांति पाटेकर.
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परदे पर कड़क आवाज में 'अच्छा है...बहुत अच्छा है' कहने वाले नाना की असल जिंदगी विरोधाभासों और बेहद उतार-चढ़ाव से भरी रही. एक तरफ सेना के लिए सरहद पर बंदूक उठाने वाला देशभक्त, किसानों के आंसू पोंछने वाला मसीहा, तो दूसरी तरफ पर्सनल लाइफ में बेहद अकेलापन, गंभीर आरोपों और इश्क की नाकामियों से जूझता एक ऐसा इंसान जिसकी सरलता और सादा जीवन के किस्से खूब मशहूर हैं. आज नाना पाटेकर नहीं रहे. उनकी जिंदगी के कई सारे पन्ने वो पन्ने खुल रहे हैं  जो अब तक अनछुए रहे.

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नाना पाटेकर की कहानी एक ऐसे एक्टर सेलिब्रिटी की है जिसने सिनेमा को स्टारडम से नहीं, बल्कि अपनी मिट्टी की खुशबू से सींचा. नाना परदे पर जितने आक्रामक दिखे, असल जिंदगी में उतना ही भावुक और अकेला. विवादों के साए रहे, आरोप भी लगे, लेकिन जब-जब देश और समाज को जरूरत पड़ी, ये फक्कड़ कलाकार सबसे आगे खड़ा नजर आया.

नीलकांति से ऐसे हुई पहली मुलाकात

नाना पाटेकर और नीलकांति की मुलाकात मराठी थिएटर के दिनों में हुई थी, जहां दोनों के बीच दोस्ती हुई और फिर प्यार परवान चढ़ा. नीलकांति का जन्म पुणे में हुआ था. नीलकांति पाटेकर पढ़ाई-लिखाई में बेहद होनहार थीं. उनके पिता सेंट्रल एक्साइज विभाग में थे, जिनकी वजह से उनकी स्कूली शिक्षा अलग-अलग शहरों में हुई. उन्होंने फिजिक्स की पढ़ाई की थी. पिता के कहने पर उन्होंने देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली IIT प्रवेश परीक्षा दी और उसे पास भी कर लिया. लेकिन इंजीनियरिंग के करियर में जाने के बजाय उन्होंने अपने दिल की सुनी और थिएटर को चुना. 

'आत्मविश्वास' के लिए मिला सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार

कला के प्रति उनके इसी समर्पण का नतीजा था कि उन्होंने साल 1973 में 'महाराष्ट्र राज्य नाट्य प्रतियोगिता' में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का गोल्ड मेडल जीता था. साल 1989 में आई प्रसिद्ध मराठी फिल्म 'आत्मविश्वास' जिसका निर्देशन सचिन पिलगांवकर ने किया था) में बेहतरीन मुख्य भूमिका निभाने के लिए उन्हें महाराष्ट्र राज्य सरकार द्वारा सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री  के पुरस्कार से नवाजा गया था. हालांकि उन्होंने नाना के लिए अपना एक्टिंग करियर भी दांव पर लगा दिया. एक्टिंग की, लेकिन उतनी बड़ी एक्टर नहीं बनी जितने नाना बने.

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जब शादी हुई तब पति नाना के पास पैसे नहीं थे

जब 1978 में दोनों ने शादी की, तब नाना पाटेकर के पास पैसे नहीं होते थे. बैंक अधिकारी नीलकांति की सैलरी से घर-परिवार भी चलता था और नाना के एक्टिंग संघर्ष को भी सपोर्ट मिलता रहा. नीलकांति को पति के हुनर पर भरोसा था और वो एक दिन सच हुआ भी. शादी के बाद दोनों के घर दो बेटों का जन्म हुआ, लेकिन उनके बड़े बेटे 'दुर्वासा' का महज ढाई साल की उम्र में बीमारी के कारण निधन हो गया, जिसने इस हंसते-खेलते परिवार को गहरा सदमा दिया.

नाना और नीलकांति ने लव मैरिज की थी. प्यार-मोहब्बत में दोनों ऐसे डूबे कि compatabilty चेक करना भूल गए. शादी के बाद दोनों के स्वभाव और सोचने के तरीकों में गंभीर और कभी न सुलझने वाले मतभेद पैदा हो गए, जिसके चलते रिश्ता टूट गया. दोनों ने आपसी सहमति से एक-दूसरे से दूरी बना ली और करीब 35 सालों तक बिना कानूनी तलाक लिए अलग-अलग जीवन जीते रहे.

इसलिए नहीं लिया एक दूसरे से तलाक

उन्होंने कभी तलाक इसलिए नहीं लिया क्योंकि दोनों के दिलों में एक-दूसरे के प्रति बेहद गहरा सम्मान बना रहा. एक इंटरव्यू में नाना ने खुद स्वीकार किया था कि भले ही उनके बीच स्वभाव का बड़ा अंतर था और वे एक छत के नीचे नहीं रह सकते थे, लेकिन वे हमेशा कानूनी रूप से शादीशुदा रहे और सुख-दुख के हर मोड़ पर एक-दूसरे की ढाल बनकर खड़े रहे. इंटरनेट पर मौजूद तस्वीरें बताते हैं कि साथ नहीं रहने के बाद भी नाना और नीलकांति एक दूसरे से जुड़े रहे.

शादी के बाद कई सालों तक पारिवारिक जिम्मेदारियों, बड़े बेटे के निधन के सदमे और नाना से आपसी मतभेदों के कारण अलग रहने की वजह से नीलकांति लाइमलाइट से पूरी तरह ओझल हो गई थीं. लेकिन लंबे समय के गैप के बाद, उन्होंने लक्ष्मण उतेकर के निर्देशन में बनी ऐतिहासिक महागाथा फिल्म 'छावा' से बड़े परदे पर वापसी की. इस फिल्म में उन्होंने छत्रपति संभाजी महाराज यानी विक्की कौशल की धाय मां, यानी 'धाराऊ' (Dharau) का दमदार किरदार निभाया. , नाना पाटेकर के निधन की खबर मिलते ही उनकी पत्नी नीलकांति पाटेकर और बेटे मल्हार पाटेकर तुरंत गोवा पहुंच गए ताकि अंतिम संस्कार और अंतिम विदाई दे सकें. 

जब नाना की लाइफ में मनीषा कोईराला ने मारी एंट्री

नीलकांति से अलग होने के बाद नाना की जिंदगी में साल 1996 में फिल्म 'अग्नि साक्षी' के दौरान मनीषा कोइराला आईं. मनीषा उस वक्त अपने दौर की सबसे हसीन और बड़ी स्टार थीं. दोनों के बीच करीब 20 साल का फासला था, लेकिन दोनों एक-दूसरे के प्यार में इस कदर गिरफ्तार हुए कि लिव-इन में रहने लगे. नाना मनीषा को लेकर बेहद पजेसिव थे.

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वे मनीषा के छोटे कपड़ों या को-स्टार्स से ज्यादा बात करने पर भी नाराज हो जाते थे. मनीषा इस रिश्ते को शादी का मुकाम देना चाहती थीं, लेकिन नाना अपनी पहली पत्नी नीलकांति को कानूनी तौर पर छोड़ने को तैयार नहीं थे.

कमरे में बंद थे नाना और आयशा झुल्का ? 

इसी बीच नाना की जिंदगी में फिल्म 'युगपुरुष' की को-स्टार आयशा झुल्का की एंट्री हुई. एक दिन जब मनीषा ने कथित तौर पर नाना और आयशा को एक बंद कमरे में एक साथ देख लिया, तो उनके सब्र का बांध टूट गया. सेट पर भारी हंगामा हुआ और मनीषा हमेशा के लिए नाना की जिंदगी से दूर चली गईं. बाद में आयशा झुल्का के साथ भी नाना का रिश्ता ज्यादा समय नहीं टिक सका.

नाना और मनीषा के बीच क्या था, ये सिर्फ वही दोनों जानते थे. आज नाना नहीं रहे तो मनीषा कोइराला श्रद्धांजलि देने सामने आईं, लेकिन सिर्फ खामोशी' और 'अग्नि साक्षी फिल्मों की को-एक्टर की हैसियत से. सोशल मीडिया पर मनीषा कोइराला ने लिखा-एक महान अभिनेता, एक असाधारण व्यक्तित्व और अपनी कला के सच्चे दिग्गज के चले जाने से मेरा दिल अत्यंत दुखी है. सिनेमा की दुनिया में नाना पाटेकर का अमिट योगदान और अपनी कला के प्रति उनका अटूट समर्पण हमेशा याद रखा जाएगा. 

जब नाना पर तनुश्री दत्ता ने लगाए आरोप

नाना की साफ-सुथरी और फक्कड़ छवि पर सबसे बड़ा आघात साल 2018 में लगा. अभिनेत्री तनुश्री दत्ता ने उन पर साल 2008 में फिल्म 'हॉर्न ओके प्लीज' के सेट पर यौन उत्पीड़न और छेड़खानी के गंभीर आरोप लगाए. इस खुलासे ने भारत में #MeToo आंदोलन की नींव रखी. नाना को भारी बदनामी झेलनी पड़ी, उन्हें फिल्मों से बाहर कर दिया गया. हालांकि, सबूतों के अभाव में साल 2025 में अंधेरी कोर्ट ने आरोप खारिज कर दिया. 

नाना पाटेकर की आर्थिक और सामाजिक जिंदगी का विरोधाभास सबसे ज्यादा चौंकाने वाला है. साल 2015 में उन्होंने मकरंद अनासपुरे के साथ मिलकर 'नाम फाउंडेशन' की शुरुआत की. इस फाउंडेशन के जरिए उन्होंने महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त क्षेत्रों और आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों को करोड़ों रुपये की सीधी आर्थिक मदद पहुंचाई और खुद अपने हाथों से चेक बांटे. नाना अपने पीछे करीब 50 से 80 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति छोड़ गए हैं. पुणे के खड़कवासला में उनका 27 एकड़ का एक आलीशान फार्महाउस है, जहां वे खुद ट्रैक्टर चलाते थे, धान उगाते थे और खेती करते थे.

इतनी अकूत संपत्ति और नेशनल अवार्ड्स की कतार होने के बावजूद, नाना मुंबई के अंधेरी में एक बेहद साधारण 1 BHK फ्लैट (750 वर्ग फुट) में अपनी बुजुर्ग मां निर्मला पाटेकर जिनका निधन 2019 में हुआ के साथ रहते थे. उनके घर में आज भी कोई तामझाम नहीं था, वे जमीन पर चटाई बिछाकर सोते थे. गाड़ियों के नाम पर उनके पास जीप और ऑडी Q7 जैसी गाड़ियां जरूर थीं, लेकिन उनका मिजाज हमेशा एक फक्कड़ फकीर जैसा ही रहा.

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