Nepal Flood: 10 मिनट के Tea ब्रेक ने बचाई 17 लोगों की जान, मौत को मात देकर लौटीं अंजना सान्याल ने बताई पूरी कहानी

न्यूज तक डेस्क

31 Aug 2026 (अपडेटेड: Aug 31 2026 10:27 AM)

नेपाल में आई बाढ़ से बाल-बाल बचीं 69 वर्षीय पूर्व शिक्षिका अंजना सान्याल घर लौटीं. उन्होंने नेपाल की खौफनाक वक्त और फ्लैश फ्लड की पूरी कहानी सुनाई. बोलीं- मौत को सामने देख सब रो पड़े थे.

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मौत को छूकर वापस घर वापस लौटीं 69 साल की अंजना सान्याल ने सुनाई पूरी दास्तां.
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नेपाल त्रासदी की भयावहता पूरी दुनिया ने देखा है. जिसने अलग-अलग वीडियो में प्रलयंकारी तस्वीर देखी उसके मुंह से एक शब्द निकला- 'हे ईश्वर'. दृश्य ऐसा था मानों प्रकृति कुपित हो गई हो और बदला ले रही हो. अभी भी सैकड़ों लापता लोगों की खोज जारी है. भारत से कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं में से एक 69  साल की अंजना सान्याल भी सकुशल घर लौट आई हैं. अंजना मौत को छूकर वापस आ चुकी हैं. अंजना ने बताया कि कैसे उस 10 मिनट के टी ब्रेक ने सबकी जान बचा ली नहीं तो सभी 17 यात्री और बस के ड्राइवर और उनकी टीम काल के गाल में समां जाते. हालांकि अभी भी अंजना का कैलाश मानसरोवर यात्रा का जज्बा कम नहीं हुआ है. स्थितियां सामान्य होने के बाद वे फिर उस यात्रा पर जाना चाहेंगी. 

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क्या है 10 मिनट के टी ब्रेक की कहानी 

कोलकाता के उत्तरपाड़ा के बनर्जीपाड़ा स्ट्रीट की रहने वाली 69 साल की अंजना सान्याल रिटायर्ड टीचर हैं. कोलकाता की एक ट्रैवल एजेंसी के साथ अंजना समेत 17 लोगों का दल कैलाश मानसरोवर यात्रा पर नेपाल निकला. 26 अगस्त को काठमांडू से बस चीन के इमिग्रेशन कार्यालय की तरफ बढ़ रही थी. रास्ते में एक स्थान पर बस 10 मिनट के लिए रुकी. वहां लोगों ने चाय पी और फ्रेश हुए. फिर बस यहां से चल पड़ी. अभी बस थोड़ी ही दूर आगे बढ़ी थी तभी ड्राइवर को फ्लैश फ्लड की खबर मिली. जहां बस थी वहां ट्रैफिक नहीं था. ड्राइवर ने बड़ी चतुराई से बस घुमा ली और काठमांडू की तरफ वापस चल पड़ा. 

आसमान में जहां धूप थी वहां सब अचानक धुंधला होने लगा 

अंजना ने बताया कि जब वे लोग काठमांडू से निकले तो धूप खिली थी. आसमान साफ था. अचानक आसमान धुंधला होने लगा. चीन के इमिग्रेशन कार्यालय की तरफ से आसमान एक धुंधलकी चादर से ढकने लगा. ये कुछ और नहीं बल्कि फ्लैड फ्लड था जिसकी लहरें और उससे निकले वाली बूंदे आसमान को ढक रही थीं. विकराल दृश्य था. मौत सामने थी और 17 भारतीय यात्री मौत को छूकर काठमांडू की तरफ बढ़ रहे थे. 

मौत सामने देख रो पड़े लोग  

नदी का विकराल रूप देख लोग रो पड़े. मौत सामने देख हर किसी को लगा जैसे आखिरी वक्त आ गया. अंजना के भी आंसू निकल पड़े. हालांकि बस ड्राइवर और स्टॉफ ने हिम्मत नहीं हारी और उन्होंने सभी को बचा लिया. इधर अंजना समेत सभी लोग इस हादसे के लिए चीन को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. चीन ने समय रहते खबर कर दी होती तो नेपाल के पास कुल डेढ़ घंटे का वक्त था. हजारों जानें बच सकती थीं. 

10 मिनट ने कैसे बचाई जान ? 

अंजना ने बताया कि यदि 10 मिनट का ब्रेक नहीं लेते तो वहां पहुंच जाते जहां बाकी गाड़ियां पहुंच चुकी थी और जमा का माहौल था. वहां जाने के बाद फंस जाते और बस मुड़ नहीं पाती. अंजना ने उस टी ब्रेक को जीवनदायिनी बताया है. अंजना ने आगे कहा-  इस बार कैलाश मानसरोवर जाना उनके लिए आखिरी मौका था, लेकिन बाढ़ में सब कुछ बह जाने के कारण यात्रा पूरी नहीं हो सकी. अगले साल उनकी उम्र 70 साल हो जाएगी, इसलिए उन्हें आशंका है कि फिर परमिट मिलना मुश्किल होगा. अंजना कहती हैं- जरूरत पड़ी तो हेलीकॉप्टर से कैलाश का एरियल दर्शन करेंगी. मानसरोवर का पानी लेकर अपने सिर पर चढ़ाने की इच्छा भी अभी बाकी है.

लंबे समय से घूमने की शौकीन अंजना सान्याल देश-विदेश की कई जगहों की यात्रा कर चुकी हैं, लेकिन नेपाल की यह यात्रा उनके लिए सबसे भयावह अनुभव बन गई. वह कहती हैं- कैलाश के इतने करीब पहुंचकर भी दर्शन नहीं हो पाया तो लगा कि आखिर मैंने ऐसा कौन सा पाप किया, लेकिन जब मौत के मुंह से बचकर वापस लौटीं, तो लगा कि शायद किसी पुण्य का फल है कि उन्हें नई जिंदगी मिली. 

इनपुट: पार्थ

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