Shesh Bharat: राजनीति में एंट्री करने वाले हैं Jr. NTR? बेंगलुरु में फैंस ने लगाए ‘नेक्स्ट सीएम एनटीआर’ के नारे तो जवाब हुआ वायरल

चंद्रबाबू नायडू की राजनीतिक विरासत और जूनियर एनटीआर के फिल्मी करिश्मे के बीच आंध्र प्रदेश की राजनीति में एक नई चर्चा छिड़ गई है. बेंगलुरु में 'सीएम-सीएम' के नारों ने टीडीपी के भविष्य और नंदामुरी परिवार की वापसी को लेकर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.

Chandrababu Naidu and Junior NTR
Chandrababu Naidu and Junior NTR

रूपक प्रियदर्शी

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Junior NTR Politics: चंद्रबाबू नायडू का अपना कोई राजनीतिक या फिल्मी बैकग्राउंड नहीं था, लेकिन भुवनेश्वरी से शादी के बाद उनका रिश्ता राजनीति और सिनेमा के एक बड़े परिवार से जुड़ गया. इसी रिश्ते की वजह से वह साउथ फिल्मों के सुपरस्टार जूनियर एनटीआर के फूफा लगते हैं. दरअसल, जूनियर एनटीआर के दादा एनटी रामाराव ने ही तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) की नींव रखी थी. हालांकि, एनटीआर ने राजनीति के बजाय फिल्मों को चुना. दिलचस्प बात यह है कि एनटी रामाराव ने अपनी राजनीतिक विरासत खुशी-खुशी अपने दामाद और बेटी भुवनेश्वरी के पति चंद्रबाबू नायडू को नहीं सौंपी थी, लेकिन फिर भी पार्टी की कमान नायडू के हाथों में आ गई. इसके बाद एनटी रामाराव का पूरा परिवार धीरे-धीरे पार्टी और राजनीति से दूर होता चला गया.

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बेंगलुरु में गूंजे 'नेक्स्ट सीएम एनटीआर' के नारे

टीडीपी ऐसे दौर में है जहां चंद्रबाबू नायडू के रिटायर होने की अटकलें चल रही हैं. चर्चाएं तेज हैं कि आज नहीं तो कल उनके बेटे नारा लोकेश के हाथों में टीडीपी होगी. ऐसी चर्चाओं के बीच जूनियर एनटीआर के सीएम बनने के नारे तेज होने लगे हैं. आंध्र में आज भी ऐसे लोग हैं जो चाहते हैं कि एनटी रामाराव के परिवार की राजनीतिक वापसी होनी चाहिए. हाल ही में बेंगलुरु में एक कार्यक्रम के दौरान जब होस्ट ने उनसे पूछा कि वह खुद को 25 साल बाद कहां देखते हैं, तो उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि वह तब 67 साल के हो जाएंगे. इस टाले हुए जवाब के बीच ही भीड़ से नारे लगने लगे- 'नेक्स्ट सीएम एनटीआर'.

राजनीति में दिलचस्पी नहीं पर फैंस की भारी दीवानगी

जूनियर एनटीआर बेंगलुरु के एक अस्पताल के उद्घाटन के लिए पहुंचे थे, जहां उनकी एक झलक पाने के लिए हजारों प्रशंसक जमा हो गए और सुरक्षा व्यवस्था चरमरा गई. फैंस की यह नारेबाजी महज शोर नहीं, बल्कि उन्हें राजनीति में लाने की एक बड़ी मांग है. हालांकि, जूनियर एनटीआर हमेशा कहते रहे हैं कि उनकी राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं है. जब भी उनसे यह सवाल होता है, वह इसे 'सही समय नहीं' बताकर टाल देते हैं. साल 2025 में उन्होंने साफ कहा था कि वह एक एक्टर के रूप में बहुत खुश हैं और मजाकिया अंदाज में कहा कि लोग उन्हें वोट देने के बजाय उनकी फिल्मों के टिकट खरीदें.

फूफा और भतीजे के बीच पारिवारिक रिश्तों की डोर

चंद्रबाबू नायडू, जूनियर एनटीआर के दादा और टीडीपी संस्थापक एनटी रामाराव के दामाद हैं. नायडू ने जूनियर एनटीआर की बुआ नारा भुवनेश्वरी से शादी की, इस नाते वह उनके फूफा लगते हैं. वहीं, जूनियर एनटीआर की पत्नी लक्ष्मी प्रणति, चंद्रबाबू नायडू की बहन की बेटी हैं. इस रिश्ते से नायडू के बेटे नारा लोकेश, जूनियर एनटीआर के फुफेरे भाई हैं. हालांकि, 1995 में जब नायडू ने पार्टी की कमान संभाली थी, तब से नंदामुरी परिवार और उनके बीच तनाव की खबरें आती रही हैं. 2009 में एनटीआर ने पार्टी के लिए प्रचार किया था, लेकिन बाद में उन्होंने राजनीति से दूरी बना ली.

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नायडू का दखल और रिश्तों में जमी बर्फ का पिघलना

चंद्रबाबू नायडू और जूनियर एनटीआर के बीच का रिश्ता हमेशा संभलकर चलने वाला रहा है. लेकिन हाल के दिनों में कुछ बदलाव दिखे हैं. अगस्त 2025 में जब एक टीडीपी विधायक ने जूनियर एनटीआर पर टिप्पणी की, तो नायडू ने तुरंत उन्हें फटकार लगाई. 2024 के चुनावों में जीत के बाद जब एनटीआर ने ट्वीट कर नायडू को 'मावय्या' (फूफा) कहकर बधाई दी, तो नायडू ने भी गर्मजोशी से जवाब दिया. इससे संकेत मिले कि दोनों के बीच के रिश्तों में जमी बर्फ अब धीरे-धीरे पिघल रही है.

उत्तराधिकारी की रेस और 'यंग टाइगर' का ग्लोबल ब्रैंड

नायडू ने कभी जूनियर एनटीआर के राजनीति में आने का सीधा विरोध नहीं किया, लेकिन उन्होंने हमेशा अपने बेटे नारा लोकेश को ही उत्तराधिकारी के रूप में पेश किया है. बावजूद इसके, प्रशंसकों को लगता है कि टीडीपी को बचाने के लिए जो 'करिश्मा' चाहिए, वह केवल जूनियर एनटीआर के पास है. 'RRR' की ग्लोबल सफलता और 'नाटू-नाटू' के ऑस्कर जीतने के बाद वह एक इंटरनेशनल ब्रैंड बन चुके हैं. 'देवरा' और 'वॉर 2' ने उन्हें हिंदी बेल्ट में भी बड़ा स्टार बना दिया है, जिससे उनकी 'लार्जर दैन लाइफ' इमेज और मजबूत हुई है.

सिल्वर स्क्रीन का सुल्तान या आंध्र का नया राजनेता?

जैसे उनके दादा एनटीआर फिल्मों में भगवान के किरदार निभाकर जनता के मसीहा बने थे, वैसे ही फैंस जूनियर एनटीआर को एक पावरफुल नेता के रूप में देखना चाहते हैं. लेकिन यह सब तभी मुमकिन है जब वह खुद इसके लिए तैयार हों. फिलहाल जूनियर एनटीआर का स्टैंड बिल्कुल साफ है कि वह अपनी पारिवारिक विरासत का सम्मान करते हैं, लेकिन उनकी प्राथमिकता फिल्मी करियर ही है. उनके लिए अभी सिंहासन से ज्यादा सिल्वर स्क्रीन मायने रखती है. अब देखना यह होगा कि क्या वह सिर्फ बॉक्स ऑफिस के सुल्तान रहेंगे या आंध्र के सियासी सिंहासन पर भी राज करेंगे.

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