बंगाल में खुला TVK ऑफिस, फिर चेन्नई से आया एक संदेश... और अचानक बदली विजय की रणनीति, जानें दिल्ली मिशन पर क्यों लगा ब्रेक?

न्यूज तक डेस्क

• 08:35 AM • 01 Oct 2026

Tamil Nadu Politics: तमिल सुपरस्टार से मुख्यमंत्री बने विजय की TVK को लेकर राष्ट्रीय राजनीति में चर्चाएं तेज हैं. 2029 में दिल्ली की भूमिका को लेकर पार्टी के भीतर और बाहर तरह-तरह के दावे हो रहे हैं. इसी बीच पश्चिम बंगाल में पार्टी के नाम से दफ्तर खुलने के बाद TVK ने अपनी स्थिति साफ कर दी है और फिलहाल तमिलनाडु पर फोकस बताया है.

विजय को 2029 में दिल्ली पहुंचाने का सपना देख रहे फैंस
विजय को 2029 में दिल्ली पहुंचाने का सपना देख रहे फैंस
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Tamil Nadu Politics: तमिल के सिनेमा की स्क्रीन से राजनीति में उतरकर विजय ने ऐसा धमाका किया कि तमिलनाडु की राजनीति ही पलट गई. विजय के जोशीले समर्थक, फैंस इस ताक में हैं कि जो करिश्मा थलपति ने तमिलनाडु में किया वैसा ही पूरे देश में कर दिखाएं और 2029 में देश के पीएम बन जाएं. टीवीके (TVK) के उत्साही नेताओं ने तो खुलेआम '2029 में देश का पीएम कौन, तमिलनाडु तय करेगा' के नारे बुलंद कर दिए. इसी चक्कर में कांग्रेस और टीवीके के बीच गरमागर्मी भी हुई. ये चर्चा खत्म तो नहीं हुई लेकिन थोड़ी दब गई लेकिन इस दिल्ली-प्लान की चर्चाओं के बीच अचानक कुछ ऐसा हुआ कि खुद पार्टी को सामने आकर साफ-साफ बताना पड़ा कि आगे क्या करने वाले हैं. इस एक एलान ने टीवीके के अति उत्साही कैडर को मैसेज दे दिया कि आगे क्या करना है, क्या बातें करनी हैं, क्या बातें नहीं करनी है.

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दूसरे राज्यों में अनधिकृत दफ्तर और पार्टी का स्पष्टीकरण

कहानी में ट्विस्ट तब आया जब तमिलनाडु से हजारों किलोमीटर दूर पश्चिम बंगाल के पूर्बा बर्धमान और केरल से कुछ तस्वीरें सामने आईं. विजय के अति-उत्साही फैंस ने न सिर्फ पार्टी के बैनर-पोस्टर लहराए, बल्कि अनौपचारिक रूप से 'तमिलगा वेत्री कज़गम' (TVK) के दफ्तरों का उद्घाटन कर दिया. जैसे ही यह खबर चेन्नई पहुंची, टीवीके के इंटरनल सिस्टम में हड़कंप मच गया. पार्टी को ऑफिशियली प्रेस रिलीज जारी करनी पड़ी कि टीवीके (TVK) के केंद्रीय मुख्यालय ने बढ़ते सियासी कयासों के बीच बेहद स्पष्ट लहजे में अपनी स्थिति साफ की.

तमिलनाडु से बाहर विस्तार न करने का आधिकारिक एलान

पार्टी ने बयान जारी करते हुए कहा, "तमिलनाडु और पुडुचेरी से बाहर पश्चिम बंगाल या केरल जैसे राज्यों में टीवीके के नाम पर जो भी दफ्तर खोले गए हैं या संगठन बनाए गए हैं, उन्हें मुख्य मुख्यालय या पार्टी अध्यक्ष विजय से कोई मंजूरी नहीं मिली है. टीवीके वर्तमान में पूरी तरह से केवल तमिलनाडु के सुशासन और सांगठनिक मजबूती पर केंद्रित है. हम देश भर के प्रशंसकों द्वारा पार्टी नेतृत्व के प्रति दिखाए जा रहे इस अपार प्यार और उत्साह की दिल से सराहना करते हैं, लेकिन पार्टी का तमिलनाडु से बाहर किसी भी प्रकार के राजनीतिक या सांगठनिक विस्तार का कोई इरादा यापार्टी का तमिलनाडु से बाहर एक्सपेंशन का कोई प्लान नहीं.

विशाल फैन नेटवर्क और बूथ कार्यकर्ता का अंतर

ये प्यार अचानक विजय के जीतने से नहीं पनपा. बरसों की मेहनत और विजन से हासिल किया हुआ प्यार है. एक्टर विजय के फैन क्लब से ही तमिलनाडु में विजय को स्टैबलिश कर दिया. विजय मक्कल इयक्कम' (VMI) के पास 85,000 से ज्यादा रजिस्टर्ड फैन क्लब हैं, जो अब टीवीके (TVK) के डिजिटल और ऑन-ग्राउंड सदस्यता अभियान के जरिए 1.80 करोड़ से ज्यादा के कैडर में बदल चुके हैं. केरल में आज भी उनके 1000 से ज्यादा मजबूत क्लब चलते हैं. लेकिन विजय और उनके रणनीतिकार जानते हैं कि केरल या बंगाल के ये फैंस उनकी फिल्मों के दीवाने हैं, वे जमीनी स्तर के राजनीतिक बूथ कार्यकर्ता नहीं हैं. किसी भी अन्य राज्य में बिना मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर के पैर पसारना आत्मघाती हो सकता है.

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अन्य राज्यों में फैन क्लबों की जमीनी स्थिति

तमिलनाडु से बाहर केरल इकलौता ऐसा राज्य है जहां विजय के पास रजिस्टर्ड फैन क्लबों की एक विशाल चेन है. केरल में उनके 1,000 से अधिक सक्रिय और संगठित फैन क्लब काम करते हैं. वहां उनकी फैन फॉलोइंग केरल के स्थानीय सुपरस्टार्स मोहनलाल और ममूटी को टक्कर देती है. कर्नाटक और आंध्र प्रदेश, तेलंगाना जैसे पड़ोसी राज्यों में लगभग 500 से 700 छोटे-बड़े अनौपचारिक क्लब चलते हैं, जो मुख्य रूप से उनकी फिल्मों की रिलीज पर सोशल वर्क, बड़े कट-आउट लगाने और चैरिटी का काम करते हैं. उत्तर और पूर्वी भारत में कोई टीवीके या विजय का फैन क्लब नहीं है. जो हैं वो सब ऐसे ही देखादेखी में सोशल मीडिया के लिए चल रहे हैं. जो हुआ वो सब ऐसे अति उत्साही फैंस का किया है जिसे पार्टी ने डिओन कर दिया.

तमिलनाडु और सुशासन पर केंद्रित व्यावहारिक रणनीति

अब सवाल उठता है कि जब लोकप्रियता सातवें आसमान पर है, तो विजय खुद को तमिलनाडु से बाहर क्यों समेट रहे हैं? इसे विजय की एक बेहद व्यावहारिक और समझदारी भरी रणनीति मान रहे हैं. साल 2026 के विधानसभा चुनावों में विजय की पार्टी 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी ताकत तो बनी, लेकिन वे 118 के जादुई बहुमत के आंकड़े से थोड़े पीछे रह गए. कांग्रेस और अन्य सहयोगियों की बैसाखी परमाइनॉरिटी गवर्नमेंट चला रहे हैं. ऐसे में सीएम विजय का पहला और एकमात्र लक्ष्य अपनी सरकार और सुशासन को साबित करना है. किसी और राज्य में ध्यान भटकाकर विपक्ष को तमिलनाडु में वापसी का एक भी मौका नहीं देना चाहते.

'PM डिबेट' और कांग्रेस का सियासी दबाव

इस पूरी कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू राष्ट्रीय राजनीति से जुड़ा है. तमिलनाडु में सरकार चलाने के लिए विजय की टीवीके और कांग्रेस साथ हैं. जैसे ही टीवीके के मंत्रियों ने विजय को पीएम का चेहरा प्रोजेक्ट करना शुरू किया, कांग्रेस के भीतर खलबली मच गई. कांग्रेस के का स्टैंड साफ है कि 'INDIA गठबंधन' या विपक्ष की तरफ से पीएम का चेहरा सिर्फ राहुल गांधी हैं. चर्चा ये भी कि कांग्रेस ने अंदरखाने टीवीके को दो-टूक चेतावनी दे दी कि अगर राष्ट्रीय स्तर पर राहुल गांधी के नाम पर सहमति नहीं बनी, तो गठबंधन खतरे में पड़ सकता है. इसी सियासी दवाब के चलते टीवीके को 'पीएम डिबेट' पर ब्रेक लगाना पड़ा और राष्ट्रीय विस्तार से पीछे हटने की घोषणा करनी पड़ी.

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'INDIA गठबंधन' से दूरी और SSJVA अलायंस

तमिलनाडु में टीवीके और कांग्रेस एक अलायंस बनाकर सरकार चला रहे हैं. विजय और राहुल की दोस्ती गहरी है लेकिन आज तक टीवीके के इंडिया गठबंधन में शामिल होने की बात आगे नहीं बढ़ी. तर्क ये कि चूंकि टीवीके के पास अभी संसद में कोई सांसद नहीं है, इसलिए वो इंडिया गठबंधन से से दूर हैं. विजय ने तमिलनाडु में अपना खुद का एक मजबूत मोर्चा बनाया है, जिसे 'सेक्युलर सोशल जस्टिस विक्ट्री अलायंस' (SSJVA) नाम दिया गया है. पार्टी की लाइन क्लियर है वे वैचारिक रूप से धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक न्याय के साथ हैं, लेकिन अपनी शर्तों पर.

DMK का पीछे हटना और राष्ट्रीय मंच का अवसर

राजनीति में शह और मात का खेल लगातार जारी है. विजय के लिए सबसे बड़ी राहत और जीत की खबर ये है कि डीएमके ने खुद को 'INDIA ब्लॉक' की बैठकों से अलग कर लिया. तमिलनाडु में सत्ता गंवाने और कांग्रेस-विजय के साथ होने से नाराज डीएमके बैकफुट पर आई. डीएमके के इस एग्जिट से राष्ट्रीय मंच पर तमिलनाडु का प्रतिनिधित्व करने के लिए अब इकलौता और सबसे बड़ा चेहरा थलपति विजय ही बचे हैं. कांग्रेस के ऊपर से भी अब डीएमके का नैतिक दवाब खत्म हो चुका है. आज नहीं तो कल विजय इंडिया ब्लॉक में आ सकते हैं. अभी क्या ही जल्दी है.

विजय का भावी राजनीतिक लक्ष्य और 2031 का विजन

थलपति विजय की यह पूरी कहानी एक सोची-समझी 'चेक एंड बैलेंस' की राजनीति है. वे अपने विधायकों के जरिए 'पीएम डिबेट' को जिंदा रखकर कांग्रेस के सामने अपनी बार्गेनिंग पावर (Bargaining Power) मजबूत रखना चाहते हैं, तो दूसरी तरफ विस्तार से मना करके खुद को केवल तमिलनाडु के सुशासन पर फोकस दिखा रहे हैं. विजय का लक्ष्य साफ है पहले 2026 की इस अल्पमत सरकार को सफलतापूर्वक चलाना, फिर आगामी विधानसभा उपचुनावों में अपनी ताकत दिखाना, और साल 2031 में अपने दम पर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाना. दिल्ली दूर जरूर है, लेकिन थलपति विजय की नजरें अपनी हर चाल पर पूरी तरह टिकी हुई हैं.

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