उत्तर प्रदेश भाजपा की नई प्रदेश संगठन टीम केवल पदाधिकारियों की सूची नहीं, बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव की राजनीतिक रणनीति का संकेत मानी जा रही है. नई नियुक्तियों में सबसे बड़ा संदेश OBC प्रतिनिधित्व को लेकर है. क्षेत्रीय अध्यक्षों, महामंत्रियों और उपाध्यक्षों के चयन में पिछड़े वर्ग को प्रमुखता दी गई है. साथ ही दलित, जाट, ठाकुर, ब्राह्मण, गुर्जर, सैनी और अन्य प्रभावशाली सामाजिक समूहों को भी संतुलित प्रतिनिधित्व देने की कोशिश दिखाई देती है. पार्टी के शीर्ष संगठनात्मक पदों पर OBC और दलित प्रतिनिधित्व को देखें तो यह संख्या 50 प्रतिशत से अधिक बैठती है.
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OBC पर सबसे बड़ा दांव
भाजपा ने 6 क्षेत्रीय अध्यक्षों में 4 ओबीसी नेताओं को जिम्मेदारी दी है. पश्चिम क्षेत्र में नवाब सिंह (गुर्जर), ब्रज में लोधी समाज से चेहरा, कानपुर क्षेत्र में रामकिशोर साहू, काशी में अशोक चौरसिया और गोरखपुर में विनोद राय जैसे नाम इस रणनीति को मजबूत करते हैं. यानी 6 क्षेत्रीय अध्यक्षों में करीब दो-तिहाई प्रतिनिधित्व OBC समुदाय को मिला है.
महामंत्री स्तर पर भी OBC की मजबूत मौजूदगी दिखाई देती है. 4 महामंत्रियों में गीता शाक्य, शंकर लोधी, दिलीप पटेल और राजेश चौधरी ओबीसी समुदाय से आते हैं. संगठन के सबसे प्रभावी पदों पर पिछड़े वर्ग की यह हिस्सेदारी नई रणनीति का सबसे बड़ा संकेत मानी जा रही है.
दलित प्रतिनिधित्व भी मजबूत
भाजपा ने केवल OBC पर ही फोकस नहीं किया, बल्कि दलित प्रतिनिधित्व भी बढ़ाया है. देवेश कोरी और पूर्व सांसद प्रियंका रावत को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है. महामंत्री पद पर उपेन्द्र रावत को जिम्मेदारी दी गई है, जबकि मंत्री पद पर राहुल वाल्मीकि और आकांक्षा सोनकर को शामिल किया गया है.
इसके अलावा पूजा पाल समेत कई नेताओं को संगठन में अहम जिम्मेदारियां देकर भाजपा ने दलित और अन्य सामाजिक वर्गों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है.
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सुरेश राणा को उपाध्यक्ष बनाकर ठाकुर समुदाय को प्रतिनिधित्व दिया गया है. मोहित बेनीवाल के जरिए जाट समुदाय, सत्यपाल सैनी के जरिए सैनी समाज, जबकि सुरेश मौर्य और राजेश यादव जैसे नेताओं के जरिए OBC वर्ग को भी संगठन में जगह दी गई है.
पश्चिम और पूर्वांचल दोनों पर फोकस
भाजपा ने इस सूची में क्षेत्रीय संतुलन पर भी विशेष ध्यान दिया है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश से सुरेश राणा, नवाब सिंह, मोहित बेनीवाल और सत्यपाल सैनी जैसे नेताओं को अहम जिम्मेदारियां मिली हैं. इससे जाट, गुर्जर, ठाकुर और सैनी जैसे प्रभावशाली सामाजिक समूहों को साधने की रणनीति स्पष्ट दिखाई देती है.
वहीं पूर्वांचल को भी मजबूत प्रतिनिधित्व मिला है. काशी क्षेत्र की कमान अशोक चौरसिया को सौंपी गई है. गोरखपुर से विनोद राय, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रभाव वाले क्षेत्र से जुड़े कामेश्वर सिंह और प्रयागराज क्षेत्र की पूजा पाल जैसे नाम पूर्वी उत्तर प्रदेश में भाजपा के संगठनात्मक विस्तार और सामाजिक संतुलन की रणनीति को मजबूत करते हैं.
महिलाओं को भी प्रमुख जिम्मेदारी
नई संगठन टीम में महिला प्रतिनिधित्व भी उल्लेखनीय है. गीता शाक्य को महामंत्री, प्रियंका रावत को उपाध्यक्ष, पूजा पाल को उपाध्यक्ष और आकांक्षा सोनकर को मंत्री बनाया गया है. इसके अलावा अन्य महिला नेताओं को भी विभिन्न जिम्मेदारियां देकर भाजपा ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि 2027 की चुनावी तैयारी में महिला नेतृत्व भी संगठन की अहम धुरी रहेगा.
राजनाथ सिंह परिवार की संगठन में मौजूदगी
नई सूची का एक अहम राजनीतिक संकेत यह भी है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के छोटे बेटे नीरज सिंह को संगठन में जगह मिली है. बड़े बेटे पंकज सिंह पहले संगठन में पदाधिकारी रह चुके हैं, लेकिन इस बार उन्हें संगठन में स्थान नहीं मिला. नीरज सिंह की नियुक्ति को लखनऊ क्षेत्र में उनकी सक्रियता और संगठनात्मक पकड़ से जोड़कर देखा जा रहा है.
सपा के PDA नैरेटिव का जवाब?
2024 लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा के भीतर यह आंकलन रहा कि OBC वोट बैंक के एक हिस्से में पार्टी की पकड़ कमजोर हुई. इसी पृष्ठभूमि में नई संगठनात्मक टीम को 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी और सामाजिक समीकरणों को फिर से मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है.
क्षेत्रीय अध्यक्ष, महामंत्री और उपाध्यक्ष जैसे प्रभावशाली पदों पर OBC नेताओं को प्रमुखता दी गई है, जबकि दलित समुदाय को भी पहले की तुलना में अधिक प्रतिनिधित्व मिला है. राजनीतिक तौर पर इसे समाजवादी पार्टी के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) नैरेटिव के जवाब में भाजपा की नई सोशल इंजीनियरिंग की कोशिश माना जा रहा है. संदेश साफ है कि पार्टी 2027 से पहले OBC और दलित वोट बैंक में अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहती है.
नई टीम के बड़े संकेत
- बीजेपी ने 6 क्षेत्रीय अध्यक्ष में 4 OBC, एक भूमिहार और एक ब्राह्मण को रखा है.
- 19 उपाध्यक्ष में 7 ओबीसी, 4 ठाकुर, तीन ब्राह्मण, दो वैश्य, दो दलित, एक भूमिहार को जगह दी है.
- 8 महामंत्री में 2 ब्राह्मण, 1 ठाकुर, 4 ओबीसी और 1 दलित को जगह मिली है.
- पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पूर्वांचल, दोनों क्षेत्रों में संतुलित संगठनात्मक हिस्सेदारी.
- 2024 के बाद OBC वोट बैंक में पकड़ मजबूत करने की रणनीति.
- 2027 विधानसभा चुनाव से पहले संगठन के जरिए सोशल इंजीनियरिंग पर सबसे बड़ा दांव.
नई प्रदेश टीम से भाजपा ने साफ संदेश दिया है कि 2027 की लड़ाई केवल संगठनात्मक बदलाव की नहीं, बल्कि सामाजिक समीकरणों को नए सिरे से साधने की भी है. OBC और दलित प्रतिनिधित्व को केंद्र में रखकर तैयार की गई यह टीम भाजपा की चुनावी रणनीति का पहला बड़ा संकेत मानी जा रही है.
यही वजह है कि राजनीतिक विश्लेषक इसे 2024 के बाद भाजपा की OBC-केंद्रित सोशल इंजीनियरिंग और 2027 विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) नैरेटिव के जवाब के रूप में देख रहे हैं.
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