पंजाब में सियासी बिसात बिछने लगी है. सत्तासीन आम आदमी पार्टी की सरकार अपने चुनावी वादे पूरा करने के दावों के साथ हर सवालों का जवाब देने की पुरजोर कोशिश कर रही है. वहीं विपक्षी पार्टियां भगवंत मान सिंह सरकार की कमियां गिनाने के बाद पंजाब में बदलाव की बयार के दावे ठोंक रहे हैं. पर पंजाब की जनता क्या चाहती है ? आज अगर चुनाव हो जाए तो किसका पलड़ा भारी रहेगा. कौन कितनी बढ़त के साथ है ? ऐसे तमाम सवालों के जवाब स्कोर के ताजा सर्वे में सामने आया है.
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इंडिया टुडे ग्रुप के 'तक' चैनल्स के मैनेजिंग एडिटर मिलिंद खांडेकर ने (Score) एजेंसी के संस्थापक और जाने-माने पॉलिटिकल कंसलटेंट नरेश अरोड़ा से इन मुद्दों पर बात की. न्यूज तक के खास कार्यक्रम साप्ताहिक सभा में स्कोर के ताजा ओपिनियन पोल में आए आंकड़ों पर विस्तार से चर्चा हुई.
AAP को महिलाओं का मिल रहा मजबूत समर्थन
चर्चा के दौरान नरेश अरोड़ा ने बताया कि स्कोर एजेंसी द्वारा अक्टूबर तक कराए गए ओपिनियन पोल के मुताबिक, पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) को करीब 38% वोट मिलने का अनुमान है, जबकि कांग्रेस पार्टी लगभग 24% वोट शेयर के साथ दूसरे नंबर पर है.
उन्होंने बताया कि इस बढ़त के पीछे सबसे बड़ा कारण महिलाओं का मजबूत समर्थन है. कैश ट्रांसफर स्कीम (जैसे ₹1500 महीने की योजना), फ्री बिजली और तीर्थ यात्रा योजना जैसी जनकल्याणकारी नीतियों के चलते लगभग 51% महिलाएं आम आदमी पार्टी के पक्ष में खड़ी नजर आ रही हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव में अभी काफी समय बाकी है और राजनीतिक समीकरण बदल भी सकते हैं.
पुरुष वोटर्स में विपक्ष तलाश रहा अवसर
इसके विपरीत, पुरुषों के बीच 'आप' का समर्थन करीब 27% है, जिसे विपक्षी पार्टियां अपने लिए एक बड़े अवसर के रूप में देख सकती हैं. इसके अलावा, एक बड़ा वर्ग 'अनडिसाइडेड' (अनिर्णय की स्थिति में) है, जो चुनाव के अंतिम दिनों में रुख तय करता है. 25 फीसदी तक मतदाता आखिर के दो दिन में अपना मत तय करते हैं. यानी दूसरी पार्टियों के लिए स्पेस अभी भी खुला है.
कांग्रेस की स्थिति और गुटबाजी की चुनौती
कांग्रेस पार्टी के वोट शेयर में गिरावट देखी जा रही है, जो लोकसभा चुनावों के आंकड़ों से भी नीचे नजर आ रहा है. हालांकि, पार्टी ने हाल ही में बदलाव करते हुए सचिन पायलट को प्रभारी और प्रगट सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है. जानकारों का मानना है कि सचिन पायलट के आने से पार्टी में नई ऊर्जा जरूर आई है और कद्दावर चेहरों के दम पर कांग्रेस के पास हर निर्वाचन क्षेत्र में एक चेहरा मौजूद है. हालांकि, पार्टी के भीतर गुटबाजी और आपसी खींचतान पर काबू पाना कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी.
AAP के साथ इस बार हो गया रिवर्स
अनुसूचित जाति के वोट बैंक का सबसे बड़ा चेहरा पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी हैं. इस वोट बैंक में भी सेंध लगती दिख रही है. इस सेंध के दो कारण दिख रहे हैं. एक कारण जो दिखा वो है मावां धीयां सत्कार योजना है. इसमें इन्होंने डिफरेंस क्रिएट कर दिया. सामान्य को 1000 और अनुसूचित जाति के परिवार को 1500 रुपए दिए जा रहे हैं. यहां फर्क महज 500 रुपए का नहीं है. फर्क पंजाब में जट हेजीमनी में भी हो गया. इसमें एससी अपने आप को जहां देखता था वहां से अब वो खुद को ऊपर देखने लगा है.
इसका असर ये है कि आम आदमी पार्टी को सबसे ज्यादा गेन दोआबा में हो रहा है. यहां सबसे ज्यादा जनसंख्या है एससी वर्ग का है. पिछले चुनाव में आम आदमी पार्टी को सबसे ज्यादा गेन मालवा में हुआ था. इसके बाद माझा में और आखिर में दोआबा में. इस बार ये रिवर्स होता दिख रहा है. इस बार सबसे ज्यादा गेन दोआबा फिर माझा और तीसरे नंबर पर मालवा में होता दिख रहा है.
इसबार मालवा में होगी सेंधमारी
कहते हैं जिसने मालवा में बाजी मारी उसी का पंजाब. क्योंकि इस रीजन में पंजाब की सबसे ज्यादा सीटें हैं. नरेश आरोड़ा के मुताबिक इस बार मालवा में सेंधमारी होती दिख रही है. चूंकि 69 में 68 सीटें आप की थीं. बाद में उपचुनाव हुआ और कुल सीटें आम आदमी के खाते में चली गईं. अब AAP को पाने के लिए तो कुछ नहीं है. जो है उसमें कुछ चला न जाए इस बात की चिंता है. वहीं जो सत्ता में होता है उसी से शिकायत भी होती है. यानी आम आदमी पार्टी के साथ एंटी इनकंबेंसी फैक्टर भी है.
अकाली दल और बीजेपी गठबंधन पर नजरें
पंजाब में शिरोमणि अकाली दल (SAD) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच संभावित गठबंधन को लेकर भी चर्चाएं थी. आखिरकार इस गठबंधन पर मुहर लग गई. 'वारिस पंजाब' जैसी नई पंथिक ताकतों के उभरने से अकाली दल के पारंपरिक पंथिक वोट बैंक में सेंध लगती दिख रही है. जानकारों का मानना है कि अब चूंकि अकाली दल और बीजेपी मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं, तो यह दोनों के लिए 'विन-विन' स्थिति साबित हो सकता है और पंजाब के शहरी व ग्रामीण समीकरणों में बड़ा बदलाव आ सकता है.
नशे का मुद्दा और असली समाधान
पंजाब में ड्रग्स (नशा) हमेशा से एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा रहा है. हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि सिर्फ चुनावों में नशे की बात करने भर से वोट शेयर में कोई बड़ा बदलाव नहीं आने वाला है, क्योंकि पिछले दो दशकों में लगभग सभी प्रमुख दल सत्ता में रह चुके हैं. जनता अब नारों के बजाय इसके ठोस और जमीनी समाधान की उम्मीद कर रही है. चुनाव में अभी कई महीने बाकी हैं और जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आएगी, राजनीतिक दलों की नई रणनीतियां और गठजोड़ चुनावी दृश्यों को और दिलचस्प बनाएंगे.
यहां देखें ओपिनियन पोल के नतीजे
कुल सीटें: 117, बहुमत: 59
| पार्टी | अनुमानित सीटें |
| AAP | 69–82 |
| कांग्रेस | 17–34 |
| BJP | 4–12 |
| शिरोमणि अकाली दल | 2–6 |
| वारिस पंजाब दे | 2–6 |
| अन्य | 01 |
| टाई | 06 |
किसको कितने फीसदी वोट ?
| पार्टी | साल 2022 में वोट शेयर | अब वोट शेयर (अनुमान) |
| AAP | 42.01% | 38.00% |
| कांग्रेस | 22.98% | 24.00% |
| BJP | 6.60% | 14.00% |
| अकाली दल | 18.38% | 12.50% |
| वारिस पंजाब दे | 0.00% | 8.50% |
| BSP | 1.77% | 1.00% |
| अन्य | 8.26% | 2.00% |
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