Bhilwara Municipal Election Congress Symbol Dispute: राजस्थान के भीलवाड़ा नगर निगम/निकाय चुनाव में नामांकन प्रक्रिया के अंतिम दिन एक बड़ा राजनीतिक उलटफेर और भारी हंगामा देखने को मिला. भीलवाड़ा शहर के कुल 70 वार्डों में से कांग्रेस पार्टी समय सीमा खत्म होने तक केवल 53 वार्डों के प्रत्याशियों के ही अधिकृत सिंबल रिटर्निंग ऑफिसर (RO) के समक्ष पेश कर सकी. 17 वार्डों के सिंबल फॉर्म लेट पहुंचने का हवाला देकर निर्वाचन विभाग ने उन्हें स्वीकार करने से मना कर दिया. इस घटनाक्रम के बाद जहां बीजेपी खेमे में खुशी और राहत का माहौल है, वहीं कांग्रेस में आक्रोश फैल गया है.
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दोपहर 3 बजे की डेडलाइन और कलेक्ट्रेट पर हाई-वोल्टेज ड्रामा
नामांकन पत्र और पार्टी सिंबल (फॉर्म-ए व फॉर्म-बी) जमा करने की अंतिम सीमा 31 अगस्त दोपहर 3:00 बजे तक तय थी. रिटर्निंग ऑफिसर प्रतिभा देवठिया के कक्ष में 3 बजे के बाद पहुंचे सिंबल फॉर्मों को स्वीकार नहीं किया गया. इसके बाद शहर कांग्रेस अध्यक्ष शिवराम खटीक और अन्य वरिष्ठ नेताओं की पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों से तीखी बहस हो गई.
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि वे दोपहर 2:30 बजे ही कलेक्ट्रेट परिसर में दाखिल हो चुके थे और पास वाले कमरे में बैठकर कागजी कार्रवाई पूरी कर रहे थे. लेकिन दोपहर 3 बजते ही कथित तौर पर बीजेपी कार्यकर्ताओं के दबाव और नारेबाजी के बीच कमरे और मुख्य गेट बंद कर दिए गए, जिससे वे रिटर्निंग ऑफिसर तक सिंबल नहीं पहुंचा सके.
रात 10 बजे तक चला धरना, अब कोर्ट जाने का फैसला
इस फैसले के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं ने कलेक्ट्रेट परिसर में रिटर्निंग ऑफिसर के कक्ष के बाहर करीब 4 घंटे तक जोरदार प्रदर्शन और धरना दिया. रात 10 बजे तक चले इस गतिरोध के बाद भी जब प्रशासनिक अधिकारियों ने नियमों का हवाला देकर कोई ढील नहीं दी, तो कांग्रेस ने धरना समाप्त कर दिया. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि प्रशासन ने सत्ता पक्ष के इशारे पर पक्षपातपूर्ण कार्रवाई की है और अब पार्टी इस मामले को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाएगी.
अंदरूनी खींचतान और बीजेपी का रुख
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि जयपुर में टिकट आवंटन को लेकर वरिष्ठ नेताओं के बीच हुई खींचतान और देरी के कारण सिंबल आवंटन अंतिम समय तक अटका रहा. समय पर सिंबल न पहुंचने का खामियाजा 17 प्रत्याशियों को भुगतना पड़ा है. दूसरी ओर, बीजेपी ने आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए इसे कांग्रेस की प्रशासनिक नाकामी और आपसी गुटबाजी का परिणाम बताया है.
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