Didwana Nagar Parishad Chunav Result: नगर निकाय चुनाव के परिणाम आने के बाद अब डीडवाना नगर परिषद के सभापति और नगर पालिकाओं के अध्यक्ष पद को लेकर घमासान शुरू हो गया है. डीडवाना में जिस तरह के समीकरण बन रहे हैं, उसकी उम्मीद किसी को नहीं थी. शुरुआत में त्रिकोणीय मुकाबला माना जा रहा था, लेकिन अब पूरी जंग यूनुस खान की कूटनीति और कांग्रेस के संख्याबल के इर्द-गिर्द सिमट गई है.
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डीडवाना में आंकड़ों का खेल, यूनुस खान हुए मजबूत
चुनाव नतीजों के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी के केवल 9 उम्मीदवार जीत कर आए हैं. वहीं, पूर्व मंत्री यूनुस खान के समर्थक माने जाने वाले 12 पार्षद चुनाव जीते थे. हालांकि, यूनुस खान ने अपनी राजनीतिक सूझबूझ दिखाते हुए दो अन्य पार्षदों और एक आरएलपी के जीते हुए उम्मीदवार को अपने खेमे में शामिल कर लिया. इस तरह उनका संख्याबल 15 तक पहुंच गया. दूसरी ओर, चुनाव से पहले 21 से ज्यादा सीटें जीतने का दावा करने वाली कांग्रेस पार्टी मात्र 16 पार्षदों पर ही सिमट गई है.
भंवरलाल बनाम बाबू खान: सभापति के लिए सीधी टक्कर
इधर, कांग्रेस ने भी हार नहीं मानी है. कांग्रेस ने बाबू खान को अपना सभापति पद का उम्मीदवार घोषित किया है. कांग्रेस की रणनीति है कि यदि यूनुस खान बाबू खान का विरोध करते हैं, तो अल्पसंख्यक समुदाय में उनकी छवि को नुकसान पहुंच सकता है. यदि बाबू खान जीतते हैं, तो इसका सीधा श्रेय पूर्व विधायक चेतन डूडी को जाएगा.
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क्रॉस वोटिंग का डर: किस ओर जाएगा डीडवाना का ऊंट?
अब सबकी निगाहें 25 सितंबर को होने वाले मतदान पर टिकी हैं. सवाल यह है कि क्या कांग्रेस बीजेपी या यूनुस खान के खेमे में सेंधमारी कर क्रॉस वोटिंग कराने में सफल होगी? फिलहाल, कांग्रेस अपने 16 पार्षदों के आंकड़े से आगे बढ़ती नहीं दिख रही है.
सारा दारोमदार अब बीजेपी के सिंबल पर जीते उन 9 पार्षदों पर है. यदि इन 9 पार्षदों ने भंवरलाल को वोट दिया, तो बोर्ड बीजेपी का कहलाएगा लेकिन असली जीत यूनुस खान की मानी जाएगी. वहीं, यदि कांग्रेस इन 9 में से 5 पार्षदों को अपने पाले में लाने में कामयाब रही, तो बाबू खान डीडवाना के सभापति बन जाएंगे.
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यूनुस खान का राजनीतिक भविष्य और बीजेपी में वापसी की अटकलें
डीडवाना की राजनीति में इस बार का सभापति चुनाव एक नई शुरुआत साबित हो सकता है. अगर यूनुस खान अपनी कूटनीति से भंवरलाल को सभापति बनवाने में सफल रहते हैं, तो उनकी भारतीय जनता पार्टी में वापसी लगभग तय मानी जा रही है. इससे आगामी पंचायत चुनावों में भी उनका प्रभाव बढ़ेगा. अब 25 सितंबर को ही पता चलेगा कि यूनुस खान बीजेपी के सहयोग से अपना दबदबा कायम रखते हैं, या कांग्रेस के चेतन डूडी अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करते हैं.
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