Bhapang kya hai: अलवर के रहने वाले भपंग वादक गफरुद्दीन मेवाती जोगी को पद्मश्री अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा. गफरुद्दीन पिछले कई सालों से इस अनोखी कला को देश और दुनिया में फैला रहे हैं. वे अब तक 60 से ज्यादा देशों में अपनी परफॉर्मेंस दे चुके हैं. पद्मश्री की खबर मिलते ही उनके परिवार और अलवर की टाइगर कॉलोनी में खुशी का माहौल है. राजस्थान के लोग इस वाध्य यंत्र से भली-भांति वाकिफ होंगे, लेकिन अब कई लोग यह जानने में उत्सुक हैं कि आखिर भपंग क्या है और इसे कैसे बजाने है? चलिए जानते हैं इस खबर में.
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क्या है भपंग वाद्य यंत्र?
आपको बता दें कि भपंग एक बहुत पुराना और पारंपरिक वाद्य यंत्र है. कहा जाता है कि इसकी प्रेरणा भगवान शिव के डमरू से ली गई है. यह एक तार वाला ऐसा यंत्र है जिसे 'टॉकिंग ड्रम' भी कहते हैं, क्योंकि इसकी आवाज सुनने में ऐसी लगती है जैसे यह बात कर रहा हो. मेवात के जोगी समुदाय के लोग इसे पीढ़ियों से बजाते आ रहे हैं. गफरुद्दीन के बेटे शाहरुख भी इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं. गफरुद्दीन बताते हैं कि ये उनकी परिवार की आठवीं पीढ़ी है.
कैसे तैयार होता है यह देसी वाद्य यंत्र
भपंग को बनाना भी एक कला है. यह किसी फैक्ट्री में नहीं, बल्कि कुदरती चीजों से बनता है. इसे बनाने के लिए सूखे कद्दू के खोखले खोल (जिसे तुंबी कहते हैं) का इस्तेमाल होता है. पुराने समय में साधु-संत इसमें पानी पीते थे और इसे कमंडल की तरह रखते थे. इसे बनाने के लिए कद्दू के दोनों सिरों को काट दिया जाता है. इसके नीचे के हिस्से को बकरी की खाल से मढ़ा जाता है और बीच में छेद करके एक तार निकाला जाता है. इसे बजाने के लिए एक छोटा बांस का हैंडल भी लगा होता है.
उंगलियों के इशारे पर बोलता है भपंग
इसे बजाने का तरीका भी काफी अलग है. कलाकार इसे अपनी बगल में दबाकर रखता है. एक हाथ से तार को खींचकर और ढीला करके इसकी आवाज (पिच) को बदला जाता है, जबकि दूसरे हाथ से इसे बजाया जाता है. तार को कसने और ढीला करने से ऐसी आवाज निकलती है जो सीधे दिल को छू लेती है. राजस्थान में इसे अलग-अलग नामों जैसे चौंड का या बगल बच्चू के नाम से भी पुकारा जाता है.
सात समंदर पार और बॉलीवुड तक पहुंची गूंज
गफरुद्दीन मेवाती ने महज 3 साल की उम्र से अपने पिता बुध सिंह जोगी से इसे सीखना शुरू किया था. वे अब तक 2800 से ज्यादा लोक गीत और दोहे गा चुके हैं. उन्होंने इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ के सामने भी अपनी कला का जादू बिखेरा है. सिर्फ इतना ही नहीं, उनके गाए लोक गीतों की धुन को बॉलीवुड की फिल्मों में भी कॉपी किया गया है. वे भपंग के जरिए महाभारत की कथाएं और पांडवों के प्रसंग भी सुनाते हैं, जिसे लोग बहुत पसंद करते हैं.
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