कौन हैं राजस्थान कैडर के IPS किशन सहाय मीणा, जिन्होंने प्रेमानंद महाराज और धीरेंद्र शास्त्री पर लगा दिए बड़े आरोप? 

IPS Kishan Sahay Meena Controversial Statement: राजस्थान कैडर के IPS किशन सहाय मीणा ने प्रेमानंद महाराज और धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर अंधविश्वास फैलाने के आरोप लगाए हैं, जिससे देशभर में विवाद खड़ा हो गया है. जानिए कौन हैं किशन सहाय मीणा, उनका करियर, बयान का पूरा मामला और क्यों हो रहा है इतना विरोध.

IPS Kishan Sahay Meena Viral Statement
IPS किशन सहाय मीणा ने प्रेमानंद महाराज और धीरेंद्र शास्त्री पर दिया बड़ा बयान

नितेश तिवारी

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राजस्थान कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी किशन सहाय मीणा एक बार फिर अपने विवादित बयानों को लेकर चर्चा में हैं. इस बार उन्होंने देश के प्रसिद्ध संतों प्रेमानंद महाराज और बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के खिलाफ टिप्पणी की है. आईपीएस अधिकारी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए इन संतों पर समाज में अंधविश्वास फैलाने का आरोप लगाया है, जिससे पूरे देश में नई बहस छिड़ गई है. आइए जानते हैं पूरा मामला और कौन हैं ये आईपीएस अधिकारी.

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'संत फैला रहे हैं अंधविश्वास'- IPS मीणा

आईजी (ह्यूमन राइट्स) के पद पर तैनात किशन सहाय मीणा ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि हालांकि प्रेमानंद महाराज का व्यवहार अच्छा हो सकता है, लेकिन वे समाज में अंधविश्वास फैलाते हैं. इसी तरह, धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बारे में उन्होंने कहा कि वे जाति व्यवस्था के खिलाफ बोलते हैं, यह तो अच्छी बात है, लेकिन वे भी अंधविश्वास और नाटक करने का काम करते हैं. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि दुनिया विज्ञान से चलती है और भगवान जैसी कोई शक्ति नहीं है.

कौन हैं IPS किशन सहाय मीणा?

किशन सहाय मीणा 2004 बैच के राजस्थान कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं. वे मूल रूप से राजस्थान के दौसा जिले के रहने वाले हैं. यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने धार्मिक मान्यताओं पर सवाल उठाए हों, वे पहले भी कई बार सार्वजनिक रूप से इस तरह के बयान दे चुके हैं. वे फेसबुक पर काफी सक्रिय रहते हैं और अक्सर सामाजिक व धार्मिक मुद्दों पर बेबाकी से (या विवादित रूप से) अपनी राय रखते हैं.

देशभर में विरोध और तीखी प्रतिक्रिया

आईपीएस मीणा के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ एक आंदोलन सा खड़ा हो गया है. सनातन धर्म के अनुयायी और संतों के भक्त इसे धर्मगुरुओं का अपमान बता रहे हैं. उल्लेखनीय है कि प्रेमानंद महाराज को देखने के लिए वृंदावन में रोजाना हजारों श्रद्धालु उमड़ते हैं, वहीं धीरेंद्र शास्त्री की कथाओं में लाखों की भीड़ जुटती है. लोगों का कहना है कि एक जिम्मेदार सरकारी पद पर बैठे व्यक्ति का इस तरह धार्मिक भावनाओं को आहत करना अनुचित है.

'उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता'

विवाद बढ़ने के बावजूद, रिपोर्टों के अनुसार आईपीएस किशन सहाय मीणा अपने रुख पर कायम हैं और उन्हें इस आलोचना से कोई फर्क नहीं पड़ता. अब देखना यह होगा कि क्या राजस्थान सरकार या पुलिस विभाग उनके इस आचरण पर कोई संज्ञान लेता है या वे अपने बयानों पर माफी मांगते हैं.

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