राजस्थान पेपर लीक मामले में अब बड़े-बड़े खुलासे हो रहे है, जिससे की मामला अब पूरी तरह साफ हो रहा है. इसी कड़ी में एक नया खुलासा हुआ है कि राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड में पेपर लीक नहीं हुआ था, बल्कि OMR शीट पर ही सीधा खेल हो गया था और 38 अभ्यर्थियों को फर्जी तरीके से नौकरी दिलाई गई थी. इस खुलासे ने जांच एजेंसी SOG को भी हैरान कर दिया है. फिलहाल इस मामले में जांच जारी है और SOG हर एंगल से जांच कर रही है. आइए विस्तार से जानते हैं पूरी बात.
ADVERTISEMENT
3 भर्तियों में हुआ था फर्जीवाड़ा
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की साल 2018 की तीन बड़ी भर्तियों में OMR शीट के जरिए बड़ा फर्जीवाड़ा किया गया था, जिसमें महिला अधिकारिता सुपरवाइजर भर्ती, प्रयोगशाला सहायक भर्ती, कृषि पर्यवेक्षक भर्ती शामिल है. इन भर्तियों के लिए परीक्षा साल 2019 में हुई थी. अब जांच में सामने आया है कि OMR शीट में हेरफेर कर 38 अभ्यर्थियों को पास कराया गया और फिर उन्हें सरकारी नौकरी दिलाई गई.
10-10 लाख से हुई थी डील, अब सभी अंडरग्राउंड
SOG की जांच के मुताबिक हर अभ्यर्थी से कथित तौर पर 10-10 लाख रुपए वसूले गए. यानी कि यह पूरा खेल करीब करोड़ों रुपए का बताया जा रहा है. वहीं अब जैसे ही कार्रवाई की भनक लगी तो सभी 38 अभ्यर्थी अंडरग्राउंड हो गए. SOG ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए बोर्ड के तत्कालीन तकनीकी प्रमुख संजय माथुर, प्रोग्रामर प्रवीण गंगवाल समेत 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है.
कैसे और किसने किया खेला?
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि OMR शीट में जिन सवालों को उम्मीदवारों ने खाली छोड़ा था, उनमें बाद में गोले भरकर अंकों में बढ़ोतरी की जाती थी. और ये काम एक आउटसोर्स फर्म राभव लिमिटेड के जरिए होता था.
आपको बता दें कि दिल्ली की कंपनी राभव लिमिटेड का संचालक रामप्रवेश यादव सीधे बोर्ड अधिकारियों के संपर्क में था. वही चयनित कराए जाने वाले अभ्यर्थियों के रोल नंबर उपलब्ध कराता था. वहीं जिस कंपनी को OMR जांच का ठेका दिया गया उसका संचालक पहले से विवादों में रहा है. इतना ही नहीं, उसकी एक कंपनी पहले ही ब्लैकलिस्ट हो चुकी थी. फिर भी साल 2019 में उसे टेंडर दे दिया गया. अब इन सारी बातों की वजह से तमाम तरह के सवाल उठ रहे है.
डेटा गायब करने की कोशिश?
SOG ने जब बोर्ड से संबंधित परीक्षाओं की OMR शीट मांगी, तो चौंकाने वाली बात सामने आई. अब तक केवल 5 अभ्यर्थियों का रिकॉर्ड उपलब्ध कराया गया है. आशंका जताई जा रही है कि बड़े पैमाने पर साक्ष्यों और डेटा के साथ छेड़छाड़ की गई है या उसे गायब कर दिया गया है.
SOG कर रही पूछताछ की तैयारी
अब SOG बोर्ड के तत्कालीन चेयरमैन डॉ. बी.एल. जाटावत से भी पूछताछ की तैयारी कर रही है. डीआईजी परिस देशमुख ने संकेत दिए हैं कि मामले में जल्द ही और भी बड़ी गिरफ्तारियां हो सकती हैं. इस मामले को लेकर राजस्थान सर्विस सेलेक्शन बोर्ड के अध्यक्ष आलोक राज से भी बातचीत की गई थी, लेकिन वो भी खुलकर सबकुछ बताने को तैयार नहीं दिखे. हालांकि आलोक राज ने माना है कि गलती तो हुई है लेकिन जिम्मेदारी किसकी है, इस पर खुलकर नहीं बोल रहे हैं.
यह खबर भी पढ़ें: राजस्थान पेपर लीक: एक परीक्षा और 500 करोड़ का खेल! क्या पैसे के दम पर बिक रही हैं सरकारी नौकरियां?
ADVERTISEMENT

