अयोध्या के राम मंदिर में कथित चंदा चोरी का मामला अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है. इस मुद्दे पर कांग्रेस ने चौतरफा मोर्चा खोल दिया है. राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राम मंदिर निर्माण और ट्रस्ट को लेकर बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाए हैं. अशोक गहलोत का दावा है कि यह सिर्फ चंदा चोरी का नहीं, बल्कि पत्थरों की चोरी का भी एक बड़ा घोटाला है.
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चंपत राय पर लगाया सीधा आरोप
पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि राम मंदिर निर्माण के लिए राजस्थान के भरतपुर स्थित बंशी पहाड़पुर से भारी मात्रा में पत्थर ले जाए गए थे. उन्होंने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि निर्माण की शुरुआत के समय चंपत राय उनसे मिलने आए थे और वह सस्ता अवैध खनन वाला पत्थर खोज रहे थे. गहलोत के मुताबिक, उन्होंने चंपत राय को सलाह दी थी कि यह पूरे देश की आस्था और पवित्र काम का मामला है, इसलिए सिर्फ वैध (लीगल) खनन के पत्थरों का ही इस्तेमाल करें, लेकिन वे नहीं माने और अवैध पत्थर ले जाए गए.
गहलोत ने बताया कि बाद में मामला पीएमओ (PMO) तक गया और नृपेंद्र मिश्रा के संपर्क में आने के बाद राम मंदिर के काम को सुचारू रूप से चलाने के लिए उस क्षेत्र को फॉरेस्ट लैंड से बाहर निकालने की सिफारिश की गई थी.
सुप्रीम कोर्ट के जज से जांच की मांग
अशोक गहलोत ने वर्तमान राम मंदिर ट्रस्ट को तुरंत भंग करने की मांग की है. उन्होंने उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा गठित की गई एसआईटी (SIT) की जांच पर अविश्वास जताते हुए कहा कि उन्हें और देश की जनता को इस पर रंच मात्र भी भरोसा नहीं है. गहलोत ने मांग की कि इस पूरे घोटाले की जांच सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग या रिटायर्ड जज की निगरानी में होनी चाहिए और उसकी रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाना चाहिए. उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि नया ट्रस्ट बनाया जाए जिसमें धार्मिक लोगों, धर्माचार्यों और शंकराचार्यों को शामिल किया जाए.
इसके साथ ही उन्होंने मांग की कि राम जन्मभूमि को अब तक कितना चंदा मिला और कहां कितना खर्च हुआ, इसका पूरा डेटा सार्वजनिक किया जाए ताकि दानदाताओं को सच पता चल सके.
'चंदा चोरी पर पीएम मोदी मौन क्यों?'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए अशोक गहलोत ने कहा कि जब मंदिर का निर्माण और उद्घाटन हो रहा था, तब पीएम मोदी आगे बढ़कर श्रेय ले रहे थे और हर जगह वही केंद्र में थे. लेकिन अब जब करोड़ों रुपये के चंदे की चोरी और घोटाले का आरोप लग रहा है, तो प्रधानमंत्री इस पर मौन क्यों हैं? उन्हें खुद सामने आकर इस पर अपनी राय रखनी चाहिए.
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