1 अगस्त से बदल गए आपकी जेब से जुड़े ये 8 बड़े नियम: LPG, तत्काल टिकट से लेकर बैंक और टैक्स तक सब कुछ बदला!
न्यूज तक डेस्क
• 10:21 AM • 01 Aug 2026
1 अगस्त से एलपीजी कमर्शियल सिलेंडर सस्ता होने और तत्काल टिकट बुकिंग में टोकन व्यवस्था लागू होने के साथ ही बैंकिंग, क्रेडिट कार्ड, जीएसटी और देर से आईटीआर दाखिल करने पर पेनाल्टी जैसे 8 बड़े नियम बदल गए हैं.
ADVERTISEMENT


1/8
|
नया महीना, नए नियम: अगस्त महीने का आगाज अपने साथ देशवासियों की दिनचर्या और घरेलू बजट से जुड़े कई अहम बदलाव लेकर आया है. हर महीने की पहली तारीख की तरह इस बार भी सरकार और वित्तीय संस्थानों ने कई जरूरी नियमों में संशोधन किए हैं. ये बदलाव सिर्फ सरकारी कागजों तक सीमित नहीं हैं बल्कि इनका सीधा असर आपकी रसोई के बजट, यात्रा के दौरान मिलने वाली सुविधाओं और बैंकिंग लेन-देन पर पड़ने वाला है. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि आज से कौन-कौन से 8 बड़े बदलाव प्रभाव में आ चुके हैं.


2/8
|
रसोई गैस और कमर्शियल सिलेंडर: महीने की शुरुआत में सबसे बड़ी राहत कारोबारियों और होटल-रेस्टोरेंट चलाने वालों के लिए आई है. 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में भारी-भरकम 202 रुपये की कटौती की गई है. इस कटौती के बाद अब राजधानी दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर 2728 रुपये और कोलकाता में 2872.50 रुपये का मिलेगा. हालांकि, घरों में इस्तेमाल होने वाले आम रसोई गैस (घरेलू एलपीजी) सिलेंडर के दामों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है और उसकी दरें यथावत बनी हुई हैं.
ADVERTISEMENT


3/8
|
रेलवे तत्काल बुकिंग: भारतीय रेलवे ने तत्काल टिकट बुकिंग प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने और स्टेशनों पर लगने वाली अनियंत्रित भीड़ पर काबू पाने के लिए नया नियम लागू किया है. अब रिजर्वेशन काउंटरों पर तत्काल खिड़की खुलने के समय ही टोकन बांटे जाएंगे. यात्रियों को पहले यह टोकन प्राप्त करना होगा और फिर उसी के क्रम (सीक्वेंस) के आधार पर काउंटर से टिकट जारी किए जाएंगे. इस व्यवस्था से कालाबाजारी पर रोक लगेगी और आम यात्रियों को लंबी कतारों में बेवजह खड़े रहने से राहत मिलेगी.


4/8
|
बैंकिंग चार्जेस: बैंकिंग सेक्टर में भी आज से नए सर्विस चार्ज प्रभावी हो गए हैं. कई निजी और स्मॉल फाइनेंस बैंक अपनी सेवाओं पर लगने वाले शुल्क की समीक्षा कर रहे हैं. इसी क्रम में उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक ने अपने ग्राहकों को दिए जाने वाले एसएमएस अलर्ट (SMS Alert) शुल्कों में संशोधन किया है. अगर आपका अकाउंट भी इस या ऐसे ही किसी बैंक में है, तो 1 अगस्त से लेन-देन की सूचनाओं पर लगने वाले इन अप्रत्यक्ष खर्चों में आपको थोड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.
ADVERTISEMENT


5/8
|
वैश्विक तनाव का साया: अगर आप नया इलेक्ट्रॉनिक सामान, गाड़ी या घर का सामान खरीदने की सोच रहे हैं, तो थोड़ी अधिक रकम ढीली करने के लिए तैयार रहिए. वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) के कारण लॉजिस्टिक्स और इनपुट कॉस्ट में इजाफा हुआ है. बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि चाय की चुस्की से लेकर कपड़े, टीवी, फ्रिज, वाशिंग मशीन, कार और साबुन तक की कीमतों में 4 से 6 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है. इन सभी वस्तुओं पर महंगाई का असर इस महीने दिखाई दे सकता है.


6/8
|
आईटीआर फाइलिंग: फाइनेंशियल अनुशासन और टैक्स अनुपालन के लिहाज से भी 1 अगस्त का दिन बेहद महत्वपूर्ण है. आईटीआर-1 और आईटीआर-2 दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई को समाप्त हो चुकी है. जिन करदाताओं ने तय सीमा के भीतर अपना आयकर रिटर्न दाखिल नहीं किया है, उन्हें अब 'बिलेटेड आईटीआर' (Belated ITR) दाखिल करना होगा. नियमानुसार, इस देर से भरे जाने वाले रिटर्न पर करदाता की आय के आधार पर 1,000 रुपये से लेकर 5,000 रुपये तक की पेनाल्टी यानी जुर्माना भुगतना पड़ेगा.
ADVERTISEMENT


7/8
|
क्रेडिट कार्ड धारकों को झटका: प्लास्टिक मनी का इस्तेमाल करने वालों के लिए भी 1 अगस्त से समीकरण बदलने वाले हैं. देश के कई प्रमुख बैंकों ने अपने क्रेडिट कार्ड के नियमों और रिवॉर्ड पॉलिसी में संशोधन लागू कर दिए हैं. इसके तहत कार्ड्स पर मिलने वाले रिवॉर्ड पॉइंट्स की दरें घट सकती हैं, वार्षिक रखरखाव शुल्क (Annual Maintenance Fee) में इजाफा हो सकता है या अन्य प्रोसेसिंग चार्ज बदले जा सकते हैं. क्रेडिट कार्ड धारकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने बैंक द्वारा जारी नया 'शेड्यूल ऑफ चार्जेस' ध्यान से पढ़ लें.


8/8
|
सी-केवाईसी 2.0 और ई-वे बिल: वित्तीय और कारोबारी दुनिया को आसान बनाने के उद्देश्य से दो प्रमुख तकनीकी बदलाव हुए हैं. पहला, बैंकिंग, इंश्योरेंस और म्यूचुअल फंड में 'CKYC 2.0' रोलआउट हो रहा है, जिससे डिजिटल अनुमति देकर एक ही सेंट्रल डेटाबेस से ग्राहक का सत्यापन हो जाएगा और बार-बार दस्तावेज जमा नहीं करने होंगे. दूसरा, जीएसटी में ई-इनवॉइस और ई-वे बिल (e-Way Bill) प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए 'बिल-टू-शिप-टू' सौदों में शिप-टू GSTIN और राज्य कोड दर्ज करना अनिवार्य कर दिया गया है.
ADVERTISEMENT











