AMU छात्रसंघ चुनाव में 22 साल की नशरा नईम बनीं उपाध्यक्ष, जानिए कौन हैं वो?

संदीप कुमार

• 01:51 PM • 08 Nov 2026

AMU Vice President Nashra Naeem: अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में करीब आठ साल बाद हुए छात्रसंघ चुनाव के नतीजों ने सबका ध्यान खींचा है. 22 साल की नशरा नईम ने उपाध्यक्ष पद पर जीत दर्ज कर यूनिवर्सिटी के इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया. लेकिन उनकी इस जीत के पीछे एक दिलचस्प कहानी भी है. जानिए कौन हैं नशरा और कैसे तय हुआ उनका चुनावी सफर.

नशरा नईम ने AMU छात्रसंघ चुनाव में उपाध्यक्ष पद पर दर्ज की जीत
नशरा नईम ने AMU छात्रसंघ चुनाव में उपाध्यक्ष पद पर दर्ज की जीत
Google CTA

AMU Female Vice President Nashra Naeem: अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में करीब आठ साल बाद हुए छात्रसंघ चुनाव में 22 साल की नशरा नईम ने इतिहास रच दिया है.  नशरा ने उपाध्यक्ष पद पर 1,273 वोटों से जीत हासिल की. इस जीत के साथ वह यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ के तीन बड़े पदों में से किसी एक पर पहुंचने वाली पहली महिला बन गई हैं. खास बात यह है कि नशरा पहले अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ना चाहती थीं, लेकिन पिता की सलाह पर उन्होंने उपाध्यक्ष पद से चुनाव लड़ा. आखिर कौन हैं नशरा नईम और कैसे उन्होंने यह मुकाम हासिल किया? आइए जानते हैं.

Read more!

जानिए कौन हैं नशरा नईम?

नशरा नईम मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गोरखपुर की रहने वाली है. उनकी उम्र महज 22 साल है. वह AMU की फैकल्टी ऑफ लॉ में बीए एलएलबी (B.A. LL.B.) की पढ़ाई कर रही हैं.  उन्होंने अपनी हायर सेकेंडरी की पढ़ाई भी AMU के वीमेंस कॉलेज से ही पूरी की है.  खास बात यह है कि नशरा के पिता भी इसी विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र रहे हैं. वे वर्तमान में आईटी क्षेत्र में व्यवसाय करते हैं, जबकि उनकी माता गृहिणी हैं. नशरा पढ़ाई के साथ-साथ कैंपस के मुद्दों पर भी हमेशा मुखर रही हैं. वह 'फ्रैटरनिटी मूवमेंट' (Fraternity Movement) की नेशनल एग्जीक्यूटिव कमेटी की सदस्य भी हैं.

चुनावी आंकड़ों में नशरा की धमाकेदार जीत

यूनिवर्सिटी के 13 सेंटरों पर वोट डाले जाने के बाद मतगणना पूरी हुई. उपाध्यक्ष पद के लिए सात प्रत्याशी मैदान में थे, लेकिन मुख्य मुकाबला नशरा और साकिब अली खान के बीच देखने को मिला.

  • नशरा नईम को मिले वोट: 7,091
  • साकिब अली खान को मिले वोट: 5,818
  • जीत का अंतर: 1,273 वोट

इसी चुनाव में अध्यक्ष पद पर मोहम्मद नोमान अशरफ (7,797 वोट) और मानद सचिव पद पर मोहम्मद हमदान (8,385 वोट) को सफलता मिली. खास बात यह भी रही कि 10 सदस्यीय कैबिनेट में 5 सीटों पर महिला उम्मीदवारों ने जीत का परचम लहराया, वहीं एएमयू कोर्ट के लिए भी दो महिला छात्र प्रतिनिधि चुनी गईं.

पिता की सलाह पर बदला था चुनाव लड़ने का इरादा

द इंडियन एक्सप्रेस (The Indian Express) को दिए अपने इंटरव्यू में नशरा ने बताया कि वह पहले अध्यक्ष पद पर किस्मत आजमाना चाहती थीं. हालांकि, उनके पिता को लगा कि लंबे समय बाद हो रहे चुनाव में कैंपस माहौल को देखते हुए किसी महिला का अध्यक्ष बनना थोड़ा कठिन हो सकता है. पिता की इसी सलाह के बाद नशरा ने उपाध्यक्ष पद चुनने का निर्णय लिया. इस पूरे सफर में उनका परिवार मजबूती से उनके साथ खड़ा रहा.

सीमित साधनों और छोटी टीम को दिया जीत का श्रेय

नशरा ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस (The New Indian Express) से बातचीत के दौरान अपनी इस कामयाबी का श्रेय अपनी टीम को दिया. उन्होंने कहा कि समय बहुत कम था और संसाधन भी सीमित थे, लेकिन साथियों के साहस, समर्पण और ईमानदारी के बल पर यह संभव हो सका. नशरा के मुताबिक यह जीत सिर्फ उनकी अपनी नहीं बल्कि उन सभी सहयोगियों की मेहनत का परिणाम है जिन्होंने दिन-रात एक किया.

कोरोना महामारी के बाद युवाओं में आते बदलावों पर जताई चिंता

नशरा ने मीडिया को दिए इंटरव्यू में एक अहम सामाजिक मुद्दे की ओर भी ध्यान खींचा. उनका मानना है कि वैश्विक महामारी कोरोना के बाद युवाओं के सोचने के तौर-तरीकों में बदलाव आया है. उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अब युवा सामाजिक संदर्भों और अपने समुदाय के बारे में सोचने के बजाय व्यक्तिगत दायरों तक सीमित होते जा रहे हैं. नशरा के अनुसार छात्र राजनीति सिर्फ सत्ता या चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह युवाओं को अपने अधिकारों और प्रशासनिक निर्णयों को समझने की सीख देती है.

19 दिनों के लंबे छात्र आंदोलन के बाद बहाल हुए थे चुनाव

दरअसरल, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी प्रशासन ने साल 2019 से ही छात्रसंघ की गतिविधियों को रोक रखा था. इसके खिलाफ छात्रों ने लंबा संघर्ष किया. सितंबर 2026 में छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन काफी तेज हो गया था. MA के छात्र यासिर फहद ने इस दौरान 19 दिनों तक भूख हड़ताल भी की. लगातार चले इस प्रदर्शन और फिर प्रशासन से वार्ता के बाद आखिरकार चुनाव कराने की घोषणा की गई थी. नशरा भी इस पूरे आंदोलन की एक सक्रिय भागीदार रही हैं.

एएमयू के 100 से अधिक सालों के इतिहास में महिला नेतृत्व की नई शुरुआत

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की स्थापना 1920 में हुई थी, जबकि छात्रसंघ की नींव 1884 के सिडन्स यूनियन क्लब (Siddons Union Club) से जुड़ी मानी जाती है. इतने लंबे इतिहास में यह पहला मौका है जब अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या सचिव जैसे मुख्य पदों पर किसी महिला प्रत्याशी ने जीत दर्ज की हो.

नशरा नईम की इस सफलता ने एएमयू की छात्र राजनीति में महिलाओं के लिए नेतृत्व के नए रास्ते खोल दिए हैं. अब देखना होगा कि वह छात्रों की समस्याओं को प्रशासन के सामने किस तरह मजबूती से उठाती हैं.

यह भी पढ़ें: अमेरिकी पॉलिटिक्स के टॉप गैलरी तक पहुंचने वाली गाजियाबाद की सबा हैदर कौन हैं ?