बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की सुप्रीमो मायावती द्वारा पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाए जाने के बाद पूर्व मंत्री अनंत मिश्रा 'अंटू' की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है. यूपी तक से खास बातचीत में अंटू मिश्रा ने बताया कि उन्हें पार्टी से निकाले जाने की कोई पूर्व जानकारी नहीं थी और न ही कोई कारण बताया गया. उन्हें भी आम लोगों की तरह सोशल मीडिया पर किए गए ट्वीट के जरिए ही अपने निष्कासन की खबर मिली.
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उन्होंने कहा कि बीते एक साल से वे अपने पिता के निधन के बाद पारिवारिक व्यस्तताओं में थे और उन्होंने कभी कोई पार्टी विरोधी गतिविधि नहीं की. इसके बावजूद पार्टी के इस फैसले को वे स्वीकार करते हैं.
मायावती से मांगी सार्वजनिक माफी
बीएसपी से 23 साल पुराना रिश्ता टूटने के बावजूद अंटू मिश्रा ने मायावती के प्रति कोई कड़वाहट नहीं दिखाई. उन्होंने मायावती को अपनी बड़ी बहन बताते हुए कहा कि अगर उनसे अनजाने में भी कोई भूल हुई हो तो वे खुले दिल से उनसे सार्वजनिक माफी मांगते हैं.
उन्होंने कहा कि राजनीति अपनी जगह है, लेकिन उन्होंने मायावती को हमेशा सम्मान दिया है. हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अब उनके दोबारा बीएसपी में वापसी की उम्मीद न के बराबर है.
23 साल का सफर और 2007 में ब्राह्मणों को जोड़ने की भूमिका
अंटू मिश्रा ने बीएसपी में अपने 23 वर्षों के योगदान को याद करते हुए बताया कि 2007 में बीएसपी की सरकार बनने से पहले सतीश चंद्र मिश्रा, बृजेश पाठक और नकुल दुबे के साथ मिलकर उन्होंने ब्राह्मण समाज को पार्टी से जोड़ने के लिए दिन-रात मेहनत की थी. कानपुर मंडल का प्रभार संभालते हुए उन्होंने पार्टी को 32 में से 29 सीटों पर जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी.
अशोक सिद्धार्थ संग जुड़ाव और पार्टी के नुकसान पर चिंता
हाल ही में बीएसपी से निकाले गए दूसरे बड़े नेता अशोक सिद्धार्थ से अपने संबंधों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी के साथ-साथ उनके सामाजिक और पारिवारिक रिश्ते भी होते हैं. उन्होंने दावा किया कि अशोक सिद्धार्थ भी बीएसपी और मायावती के प्रति पूरी तरह वफादार थे और निष्कासन के बाद उनकी आंखों में आंसू थे.
बातचीत के दौरान अंटू मिश्रा ने यह भी कहा कि बीएसपी में आज कई ऐसे लोग मौजूद हैं जो पार्टी का नुकसान कर रहे हैं, जबकि कम परफॉर्म करने वाले लोग मजे में हैं.
आगे का रास्ता: बीजेपी, सपा या कांग्रेस?
भविष्य की राजनीतिक रणनीति के सवाल पर अंटू मिश्रा ने स्पष्ट किया कि अभी तक उन्हें बीजेपी, सपा या कांग्रेस किसी भी दल से कोई आधिकारिक ऑफर नहीं मिला है. उन्होंने कहा कि वे जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेंगे. अगले एक महीने तक वे अपने क्षेत्र में कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच जाएंगे, उनसे संवाद करेंगे और कार्यकर्ताओं की सलाह के आधार पर ही अपने राजनीतिक भविष्य का अंतिम फैसला लेंगे.
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