Ayodhya Ram Mandir Donation Controversy: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला लगातार गहराता जा रहा है. इस मामले में पकड़े गए आठ आरोपियों से जब पुलिस और SIT कड़ी पूछताछ कर रही है तो कई ऐसे चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं. पूछताछ के दौरान अब राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के एक बेहद पावरफुल और रसूखदार शख्स की संलिप्तता को लेकर बड़े दावे किए जा रहे हैं. यह शख्स कोई और नहीं, बल्कि ट्रस्टी अनिल मिश्रा हैं, जिनका नाम अब इस पूरे घटनाक्रम में खुलकर सामने आ रहा है.
ADVERTISEMENT
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने इस चोरी के मुख्य किरदारों में से एक अविनाश शुक्ला से करीब दो घंटे तक पूछताछ की. अविनाश शुक्ला वही आरोपी है जिसके घर से पुलिस को भारी मात्रा में कैश बरामद हुआ था. बताया जा रहा है कि इसी पूछताछ के दौरान आरोपियों ने करोड़ों रुपये की चोरी की बात को स्वीकार किया है. आरोपियों ने बताया कि दान राशि की गिनती और उसकी पूरी प्रक्रिया से जुड़े मामलों में ट्रस्टी अनिल मिश्रा की बेहद अहम और मुख्य भूमिका रहती थी.
कैमरों की नजर से बचकर ऐसे पार की जाती थी रकम
पूछताछ में सामने आया है कि मुख्य आरोपी टिन्नू यादव के पास चढ़ावा गिनती वाले कक्ष की एक चाबी रहती थी, जबकि दूसरी चाबी बैंक कर्मियों के पास होती थी. इन लोगों की आपस में पूरी मिलीभगत थी. आरोपियों को मंदिर परिसर में लगे सभी कैमरों की सटीक लोकेशन पता थी. कैमरे की नजर से बचने के लिए जब एक शख्स रकम पार करता था तो बाकी लोग उसके आगे खड़े होकर उसे घेर लेते थे. इसके बाद उस रकम को पहले बाथरूम में छिपाया जाता था और फिर मौका देखकर परिसर से बाहर भेज दिया जाता था.
करीबी होने का फायदा और सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी ढिलाई
हैरानी की बात यह है कि ये आरोपी ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों के बेहद करीबी थे जिसके कारण परिसर में इनकी कोई खास चेकिंग या जांच नहीं की जाती थी. मंदिर परिसर के मुख्य कंट्रोल रूम से सीसीटीवी कैमरों की निगरानी करने वाले यूपी पुलिस के इंस्पेक्टर अर्जुन देव पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं. सूत्रों का कहना है कि सुरक्षा और निगरानी के नाम पर वहां सिर्फ औपचारिकता निभाई जा रही थी. इतना ही नहीं, पावर और रसूख के दम पर इंस्पेक्टर अर्जुन देव के ट्रांसफर को भी बार-बार रुकवाया गया था ताकि वह उसी पद पर बना रहे.
अनिल मिश्रा के रिश्तेदार और करीबियों की भर्ती का खेल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब आरोपी अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा का संबंध सीधे ट्रस्टी अनिल मिश्रा से जुड़ा. लवकुश मिश्रा के घर से भी पुलिस को भारी मात्रा में कैश मिला था. सूत्रों के अनुसार, अनुकल्प और लवकुश आपस में रिश्तेदार हैं और ये दोनों अनिल मिश्रा के भी बेहद करीबी रिश्तेदार बताए जा रहे हैं. दावा किया जा रहा है कि मंदिर प्रबंधन ने अपने स्तर पर जितने भी कर्मचारी रखे थे, उनमें से ज्यादातर अनिल मिश्रा के परिचित या रिश्तेदार थे. वे जिसे चाहते थे, उसे आसानी से नौकरी पर रखवा देते थे और हर काम में उनका सीधा हस्तक्षेप रहता था.
बैंक अधिकारी की चेतावनी को किया गया था नजरअंदाज
इस पूरी गड़बड़ी की भनक बहुत पहले ही लग चुकी थी. सूत्रों के मुताबिक, जब एक बैंक अधिकारी ने पूरी प्रक्रिया में गड़बड़ी की आशंका जताई थी और वहां तैनात सभी गणना कर्मियों को हटाने की सिफारिश की थी, तब ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने इसका पुरजोर विरोध किया था. किसी भी कर्मचारी को हटाने नहीं दिया गया. इस पैरवी में चंपत राय और गोपाल राव भी शामिल थे, लेकिन सबसे ज्यादा और कड़ी सिफारिश अनिल मिश्रा की तरफ से की गई थी. वे इस बात पर अड़ गए थे कि किसी भी कर्मी को वहां से नहीं हटाया जाएगा.
एसआईटी की जांच के घेरे में संपत्ति और कमीशन का मामला
अब इस पूरे मामले की जांच कर रही एसआईटी अनिल मिश्रा पर कमीशन लेने के आरोपों की गहराई से पड़ताल कर रही है. सूत्रों की मानें तो जांच के दौरान अनिल मिश्रा की कई संपत्तियों की जानकारी भी सामने आई है. एसआईटी अब इस बात का पूरा आकलन कर रही है कि ट्रस्टी बनने के बाद उनकी निजी संपत्ति में कितनी बढ़ोतरी हुई है. शुरुआती सूत्रों के अनुसार, उनकी संपत्ति में कई गुना का ऐसा इजाफा हुआ है जो सामान्य नहीं माना जा सकता. एसआईटी जल्द ही अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर शासन के सामने पेश करेगी.
6 जुलाई की बैठक में इस्तीफे पर होगा अंतिम फैसला
इस पूरे विवाद और खुलासे के बीच चंपत राय और अनिल मिश्रा ने पहले ही अपना इस्तीफा दे दिया था. अब ट्रस्ट की अगली महत्वपूर्ण बैठक में इस इस्तीफे को स्वीकार करने या न करने पर अंतिम फैसला होना है. पहले यह बैठक 11 जुलाई को होनी तय हुई थी, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए अब इसे ६ जुलाई को ही आयोजित किया जा रहा है. आरोपियों के बयानों और सबूतों के आधार पर अब यह देखना बेहद अहम होगा कि क्या इस बैठक में उनके इस्तीफे को मंजूर कर लिया जाएगा.
यह भी पढ़ें: राम मंदिर चढ़ावा विवाद में चंपत राय से हुई 3 घंटे की कड़ी पूछताछ, जानें क्या-क्या बताया?
ADVERTISEMENT


