उत्तर प्रदेश के अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े चढ़ावा चोरी मामले में जांच एजेंसियों ने अब अपनी कार्रवाई तेज कर दी है. मंदिर के दान में हुई इस हेराफेरी की कड़ियों को जोड़ने के लिए पुलिस अब बैंक खातों के ऑडिट वाले सबसे अहम पड़ाव पर पहुंच गई है. अयोध्या पुलिस ने इस मामले में कुल सात बैंकों से पिछले पांच साल का पूरा वित्तीय लेखा-जोखा (रिकॉर्ड) तलब किया है. इन बैंकों में केस के आठों आरोपियों के साथ-साथ श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के भी खाते संचालित हो रहे हैं.
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खंगाली जा रही है फाइनेंशियल ट्रेल
पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जांच एजेंसियां इन सभी बैंक खातों का स्टेटमेंट, लेन-देन (ट्रांजैक्शन) का पूरा ब्योरा और केवाईसी (KYC) से जुड़े दस्तावेज खंगाल रही हैं। इसके पीछे का मुख्य मकसद पैसों के लेन-देन यानी 'फाइनेंशियल ट्रेल' का पता लगाना है. पुलिस यह जांचना चाहती है कि जब ये आरोपी राम मंदिर के दान प्रबंधन (डोनेशन मैनेजमेंट) से जुड़े हुए थे, तब क्या उनके खातों में अचानक कोई बड़ी रकम जमा या निकाली गई थी? या फिर इन खातों से किसी अन्य संदिग्ध खाते में पैसे ट्रांसफर किए गए थे?
SBI शाखा पहुंची पुलिस टीम
जांच के सिलसिले में पुलिस की एक विशेष टीम स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की अयोध्या धाम शाखा पहुंची. इसी ब्रांच में राम मंदिर ट्रस्ट का मुख्य दान खाता है. पुलिस ने वहां से जरूरी बैंकिंग डेटा जुटाया है. इसके अलावा छह अन्य बैंकों के दफ्तरों का भी दौरा किया गया है. अधिकारी अब बैंक की जमा पर्चियों (डिपॉजिट स्लिप) और बैंक स्टेटमेंट्स का मिलान मंदिर प्रशासन के पास मौजूद दान के मूल रिकॉर्ड से कर रहे हैं. इस वित्तीय डेटा को पुख्ता करने के लिए सीसीटीवी (CCTV) फुटेज, डिजिटल सबूतों, उपस्थिति रजिस्टर और नकद जमा रजिस्टर की भी मदद ली जा रही है। पुलिस ने एसबीआई की नया घाट शाखा के अधिकारियों से भी इस संबंध में लंबी पूछताछ की है.
बैंक का बड़ा दावा
इस पूरे घटनाक्रम के बीच एसबीआई से जुड़े सूत्रों ने एक बड़ा और चौंकाने वाला दावा किया है. सूत्रों के मुताबिक बैंक ने इस संदिग्ध वित्तीय गड़बड़ी को लेकर करीब तीन महीने पहले ही पुलिस और राम मंदिर ट्रस्ट दोनों को लिखित या मौखिक रूप से सचेत कर दिया था, लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि बैंक की इस चेतावनी के बावजूद न तो पुलिस ने और न ही ट्रस्ट ने समय रहते कोई ठोस कदम उठाया. यही नहीं, बैंक प्रशासन तीन महीने पहले ही चढ़ावा (कैश) गिनने वाले कर्मचारियों को वहां से हटाकर बदलना चाहता था, लेकिन आरोप है कि ट्रस्ट से जुड़े कुछ लोगों ने इसकी मंजूरी नहीं दी थी. फिलहाल इन दावों और बैंक से मिले रिकॉर्ड्स के बाद अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में कई बड़े खुलासे होने की उम्मीद है.
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