Azamgarh Murder Case: 6 घंटे तक चला खौफनाक ड्रामा, 3 की जान गई... बाहर से पुलिस ने ऐसे चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन, बताई आधी रात की पूरी कहानी

राजीव कुमार

23 Sep 2026 (अपडेटेड: Sep 23 2026 1:10 PM)

Azamgarh Murder Case: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के अरौला थाना क्षेत्र में दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है. एक मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति ने अंधविश्वास के अनुष्ठान के दौरान पत्नी और दो पुजारियों की गोली मारकर हत्या कर दी. घंटों चले एनकाउंटर ऑपरेशन के बाद पुलिस ने आरोपी को ढेर कर दिया.

आजमगढ़ में ट्रिपल मर्डर से सनसनी
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Azamgarh Murder Case: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के अरौला थाना क्षेत्र स्थित शंभूपुर गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. आरोप है कि यहां अरविंद सिंह नामक एक शख्स ने अपनी ही पत्नी और दो में पुजारियों की गोली मारकर निर्मम हत्या कर दी. घटना की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और एटीएस की टीम ने कई घंटों तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद आरोपी को मुठभेड़ में ढेर कर दिया. इस बीच अब पुलिस के इस पूरे घटना की पूरी कहानी बताई है. 

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अंधविश्वास और अनुष्ठान से नाराज था आरोपी

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी व्यक्ति पिछले काफी समय से मानसिक रूप से अस्वस्थ चल रहा था और उसका इलाज भी कराया जा रहा था. हालांकि, उसके परिवार वालों को लगता था कि उस पर किसी भूत-प्रेत का साया है. इसी सिलसिले में परिजनों ने घर पर एक धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किया था और अनुष्ठान कराने के लिए दो लोगों को बुलाया गया था. मानसिक रूप से डिस्टर्ब आरोपी इस अनुष्ठान से काफी नाराज था और इसी बात को लेकर विवाद के बाद उसने रिवॉल्वर से ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी.

मासूम बच्चों को बनाया था बंधक

फायरिंग की इस घटना में आरोपी की पत्नी और अनुष्ठान के लिए आए दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई. हत्या की वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी ने अपने तीन मासूम बच्चों को एक कमरे में बंद कर लिया और खुद भी उसी कमरे में लोडेड हथियारों के साथ छिप गया. जब पुलिस की टीम मौके पर पहुंची, तो आरोपी ने बच्चों को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी, जिससे स्थिति बेहद संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण हो गई.

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6 घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन

घटना की गंभीरता को देखते हुए आजमगढ़ के एसएसपी अनिल कुमार, डीआईजी और एडीजी जोन वाराणसी मौके पर पहुंचे. पुलिस और परिजनों ने आरोपी को आत्मसमर्पण करने के लिए कई बार समझाने का प्रयास किया. लगभग 6 से 7 घंटे तक यह वार्ता और घेराबंदी चलती रही. पुलिस की प्राथमिकता किसी भी तरह से कमरे के अंदर बंद मासूम बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने की थी.

मुठभेड़ के बाद दो बच्चे सकुशल रेस्क्यू

इसी बीच अचानक कमरे के अंदर से फिर से गोली चलने की आवाज सुनाई दी. खतरा बढ़ता देख पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए कमरे का दरवाजा तोड़ दिया. अंदर आरोपी और पुलिस के बीच फायरिंग हुई, जिसमें आरोपी को गोली लगी और बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जबकि एक बच्चा गोली लगने से घायल हो गया, जिसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

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