बृजभूषण शरण सिंह का बड़ा धमाका, बताया कौन है सबसे बड़ा 'ठाकुर' नेता, राजा भैया और अभय सिंह पर तोड़ी चुप्पी!

बृजभूषण शरण सिंह ने राजा भैया से तुलना करने वालों को फटकार लगाते हुए राजनाथ सिंह को राजनीति का सबसे बड़ा क्षत्रिय नेता बताया है। साथ ही, मायावती के जन्मदिन पर बसपा के भावी गठबंधन को लेकर दिए गए बयानों ने यूपी की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है.

क्या सच में राजा भैया से बड़े नेता हैं बृजभूषण
क्या सच में राजा भैया से बड़े नेता हैं बृजभूषण

कुमार अभिषेक

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भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह अक्सर अपने बेबाक बयानों के लिए चर्चा में रहते हैं. हाल ही में सोशल मीडिया पर क्षत्रिय नेताओं की तुलना को लेकर चल रही बहस पर बृजभूषण शरण सिंह का गुस्सा फूट पड़ा है. उन्होंने एक वीडियो जारी कर न केवल अपनी नाराजगी जाहिर की बल्कि राजनीति में 'सबसे बड़े क्षत्रिय नेता' के नाम पर भी मुहर लगा दी है.

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राजा भैया मेरे छोटे भाई जैसे, उनके पिता मेरे आदर्श

सोशल मीडिया पर राजा भैया (रघुराज प्रताप सिंह) और बृजभूषण शरण सिंह के बीच 'बड़े नेता' की तुलना को लेकर हो रही पोस्ट्स पर उन्होंने कहा कि राजा भैया के पिता महाराज उदय सिंह उनके आदर्श हैं और राजा भैया उनके छोटे भाई के समान हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि राजा भैया उनके बच्चों के मित्रवत हैं और इस तरह की "बकवास बाजी" सोशल मीडिया पर बंद होनी चाहिए.

कौन है सबसे बड़ा क्षत्रिय नेता?

तुलना करने वालों को जवाब देते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि अगर राजनीति की बात की जाए, तो राजनाथ सिंह हम सभी से बड़े हैं. उन्होंने लोगों से अपील की कि समाज को बांटने और सोशल मीडिया पर झगड़ा लगाने का काम न करें. 

'राष्ट्रकथा' और सियासी संकेत

जनवरी के पहले हफ्ते में हुई 'राष्ट्रकथा' में पूर्वांचल के कई बड़े ठाकुर नेताओं ने शिरकत की थी जिसमें बृजेश सिंह और धनंजय सिंह जैसे नाम शामिल थे. हालांकि, राजा भैया और अभय सिंह इस कार्यक्रम में नजर नहीं आए थे. चर्चा है कि बृजभूषण शरण सिंह की नाराजगी उन नेताओं से भी है जो उनके बुलावे पर मंच पर नहीं पहुंचे. 

मायावती के जन्मदिन पर गठबंधन के संकेत

इसी रिपोर्ट में बसपा सुप्रीमो मायावती के 70वें जन्मदिन पर दिए गए बयानों का भी जिक्र है. मायावती ने साफ किया कि वह फिलहाल किसी गठबंधन में नहीं हैं, लेकिन भविष्य में उस पार्टी के साथ जा सकती हैं जो अपना वोट ट्रांसफर कराने की क्षमता रखती हो. जानकारों का मानना है कि उनका इशारा कांग्रेस की तरफ हो सकता है, बशर्ते वह सवर्ण और ब्राह्मण वोटर्स को जोड़ने में कामयाब रहे.

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