जन्मदिन पर मायावती का बड़ा दांव: ब्राह्मणों को लेकर किया ऐसा ऐलान कि हिल गई यूपी की सियासत, विरोधियों को दी सीधी चुनौती
Mayawati Brahmin strategy: मायावती ने अपने जन्मदिन पर यूपी की राजनीति में बड़ा दांव खेल दिया है. लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बसपा प्रमुख ने ब्राह्मण समाज को लेकर ऐसा बयान दिया कि भाजपा, सपा और कांग्रेस में खलबली मच गई. 2007 की सोशल इंजीनियरिंग की वापसी के संकेत, बीजेपी पर ब्राह्मणों के अपमान का आरोप और 2027 चुनाव की रणनीति, जानिए मायावती के ऐलान की पूरी कहानी.

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने अपने जन्मदिन (15 जनवरी) के अवसर पर उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा धमाका कर दिया है. लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मायावती ने ब्राह्मण समाज को लेकर जो रुख अपनाया, उसने भाजपा, सपा और कांग्रेस तीनों खेमों में हलचल पैदा कर दी है. मायावती ने साफ शब्दों में कहा कि अब ब्राह्मण समाज को किसी का 'चोखा-बाटी' नहीं चाहिए, बल्कि उन्हें सम्मान और सत्ता में उचित भागीदारी चाहिए.
"बीजेपी में हो रहा ब्राह्मणों का अपमान"
मायावती ने पिछले महीने (दिसंबर 2025) यूपी विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान हुई एक गुप्त बैठक का जिक्र करते हुए बीजेपी पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि उस बैठक में सिर्फ बीजेपी के ही नहीं, बल्कि सपा और कांग्रेस के ब्राह्मण विधायक भी शामिल थे, जो वर्तमान सरकार में अपनी उपेक्षा और समाज पर हो रहे अत्याचारों को लेकर चिंतित थे.
विरोधियों पर तीखा प्रहार
पंकज चौधरी द्वारा ब्राह्मण विधायकों को दी गई 'अनुशासनहीनता' की चेतावनी पर कटाक्ष करते हुए मायावती ने कहा कि ब्राह्मण समाज अब किसी की धमकी से डरने वाला नहीं है. उन्होंने कहा, "ब्राह्मणों को अब कांग्रेस, बीजेपी या सपा के बहकावे में आने की जरूरत नहीं है. उन्हें न किसी की मलाई चाहिए और न ही बाटी-चोखा, उन्हें सिर्फ रोजी-रोटी के साधन और मान-सम्मान चाहिए."
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2007 वाली 'सोशल इंजीनियरिंग' की वापसी?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मायावती एक बार फिर 2007 वाले अपने सफल फॉर्मूले को दोहराना चाहती हैं. उस समय ब्राह्मण समाज के समर्थन से ही बसपा ने 206 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी. मायावती ने वादा किया कि अगर 2027 में बसपा की सरकार बनती है, तो ब्राह्मण समाज को हर स्तर पर उचित प्रतिनिधित्व और सुरक्षा दी जाएगी.
नहीं झुकने का संकल्प
अपने जन्मदिन के मौके पर कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए मायावती ने स्पष्ट किया, "मैं न तो कभी झुकने वाली हूं और न ही किसी दबाव या लालच में आकर अपनी पार्टी के मूवमेंट से पीछे हटने वाली हूं." उन्होंने साफ संदेश दिया कि 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए बसपा अब पूरी तरह से ब्राह्मण-दलित गठजोड़ पर ध्यान केंद्रित कर रही है.










