Sub Inspector Pramod Yadav Dangal Video: ड्यूटी से वापस लौट रहे एक पुलिस अफसर की नजर जब रास्ते में लग रहे मेले और वहां सजे अखाड़े पर पड़ी, तो माहौल अचानक बदल गया. अखाड़े के अंदर से आ रही एक खुली चुनौती ने माहौल में सनसनी फैला दी. इसके बाद जो हुआ, उसने वहां मौजूद भीड़ को दंग कर दिया. खाकी वर्दी और अखाड़े के दांव-पेच के इस अनोखे मेल की कहानी बेहद चौंकाने वाली है. इस पूरे वाकये के पीछे की सच्चाई और अफसर के अतीत का बड़ा रिकॉर्ड जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे.
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खाकी वर्दी और अखाड़े का अनोखा अंदाज
गाजीपुर के बहादुरगंज के रहने वाले प्रमोद यादव इन दिनों भदोही जिले के कोईरोना थाने में दरोगा के पद पर तैनात हैं. वे जितने मुस्तैद अपनी पुलिस ड्यूटी में रहते हैं, अखाड़े के प्रति उनका जुड़ाव भी उतना ही मजबूत है. हाल ही में ड्यूटी से वापस लौटते समय उनकी नजर सोनीचा गांव में लग रहे एक मेले पर पड़ी. वहां चल रहे दंगल को देखकर वे खुद को रोक नहीं सके और उनके कदम अपने आप अखाड़े की तरफ बढ़ गए.
जब मेले में दरोगा जी ने कबूल किया चैलेंज
मेले के अखाड़े में एक पहलवान खुलेआम दूसरों को कुश्ती लड़ने की ललकार दे रहा था. वहां मौजूद लोग सिर्फ तमाशा देख रहे थे. तभी दरोगा प्रमोद यादव आगे आए और उन्होंने उस चुनौती को तुरंत स्वीकार कर लिया. सामने खड़ा पहलवान शायद सोच रहा था कि पुलिस अफसर का पाला सिर्फ डंडे से पड़ता है. लेकिन जैसे ही मुकाबला शुरू हुआ, प्रमोद यादव ने अपनी पकड़ बनाई, सही दांव लगाया और विरोधी को तुरंत जमीन पर पटखनी दे दी.
महज 17 साल की उम्र में मिली थी यूपी पुलिस में एंट्री
प्रमोद यादव का पुलिस विभाग तक पहुंचने का सफर भी काफी अलग रहा है. वे महज साढ़े 17 साल की कम उम्र में खेल कोटे के जरिए यूपी पुलिस में शामिल हुए थे. जिस उम्र में बच्चे खेल को सिर्फ मनोरंजन समझते हैं, उस उम्र में उन्होंने कुश्ती को ही अपना करियर बना लिया. वे यूपी पुलिस की तरफ से कुश्ती प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते हैं और लगातार 16 वर्षों तक गोल्ड मेडल जीतने का शानदार रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके हैं.
देश ही नहीं विदेश में भी जमाया अपना सिक्का
प्रमोद यादव का खेल रिकॉर्ड केवल राज्य तक सीमित नहीं रहा है. उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में आयोजित वर्ल्ड पुलिस कुश्ती चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए सिल्वर मेडल हासिल किया था. इसके अलावा वे सब जूनियर टीम के साथ लाहौर में भी कुश्ती लड़ चुके हैं और नेशनल चैंपियनशिप में भी मेडल जीत चुके हैं. साल 2010 के दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों के लिए भी उनका चयन हुआ था, हालांकि किस्मत और टॉस का फैसला खिलाफ रहने के कारण उन्हें मैदान में उतरने का अवसर नहीं मिल सका.
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सीएम योगी से मिला था गोरखपुर केसरी का सम्मान
दरोगा प्रमोद यादव की कर्मभूमि लंबे समय तक गोरखपुर रही है, जहां वे लगभग 8 सालों तक तैनात रहे. गोरखपुर में रहते हुए उनके खेल के प्रदर्शन को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें 'गोरखपुर केसरी' के प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा था. इसके अलावा कुछ समय पहले भदोही के पूर्व एसपी अभिमन्यु मांगलिक ने भी जोनल पुलिस कुश्ती चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने पर उन्हें सम्मानित किया था.
जुनून और फिटनेस का सबसे बड़ा जरिया
अखाड़े से सालों पुराना नाता और ड्यूटी के साथ कुश्ती का अभ्यास बनाए रखना प्रमोद यादव के जीवन का अहम हिस्सा है. उनके लिए कुश्ती केवल पदक हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि एक पहचान, जुनून और शारीरिक फिटनेस बनाए रखने का तरीका है. रविवार को मेले के दंगल में बिना किसी पूर्व योजना के उनकी अचानक एंट्री और विरोधी को दी गई पटखनी यही साबित करती है कि वे आज भी पूरी तरह फिट और हर चुनौती के लिए तैयार हैं.
इनपुट: महेश जायसवाल
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