'मुझे भाई बुला रहे हैं...' कानपुर में 6 महीने के अंदर एक ही परिवार के तीन भाइयों की रहस्यमयी मौत, आखिर क्या है सपने और मौत के बीच का कनेक्शन?

रंजय सिंह

13 Oct 2026 (अपडेटेड: Oct 13 2026 11:38 AM)

Kanpur Brothers Death Case: उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के बाजिदपुर से एक बेहद दर्दनाक और हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां महज छह महीने के भीतर तीन सगे भाइयों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. परिवार का दावा है कि तीनों भाइयों को डरावने सपने आते थे और वे भूत-प्रेत या मानसिक तनाव से जूझ रहे थे.

कानपुर में 6 महीने में तीन सगे भाइयों की रहस्यमयी मौत
कानपुर में 6 महीने में तीन सगे भाइयों की रहस्यमयी मौत
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Kanpur Brothers Death Case: उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के बाजिदपुर इलाके से तीन भाइयों की रहस्यमयी मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया है. यहां महज छह महीने के भीतर एक ही परिवार के तीन सगे भाइयों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है. इस घटना के बाद से बुजुर्ग माता-पिता और परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है. परिवार इस पूरी घटना को भूत-प्रेत और सपनों के खौफ से जोड़कर देख रहा है, हालांकि पुलिस मामले की जांच कर रही है.

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सपनों का डर और एक जैसी मौत का सिलसिला

कानपुर के बाजिदपुर के रहने वाले रामशंकर के परिवार में तीन बेटे थे- सबसे बड़ा विकास निषाद, उससे छोटा गोविंद और सबसे छोटा अमन. परिवार की यह दर्दनाक कहानी करीब आठ महीने पहले शुरू हुई, जब मझले भाई गोविंद ने अजीब बातें करनी शुरू कीं. परिवार के मुताबिक, गोविंद को डरावने सपने आते थे और वह कहता था कि कोई उसे बुला रहा है. परिजनों ने उसकी झाड़फूंक भी कराई, लेकिन होली के आसपास संदिग्ध हालात में उसकी मौत हो गई.

गोविंद की मौत के कुछ ही दिनों बाद सबसे छोटे भाई अमन ने भी वैसी ही बातें शुरू कर दीं. अमन का कहना था कि गोविंद उसे सपने में दिखाई देता है और अपने पास बुलाता है. परिवार ने उसे ओझा, तांत्रिक और डॉक्टरों तक को दिखाया, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकेगी. कुछ समय बाद अमन की भी मौत हो गई. दो बेटों को खोने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा और तीसरे बेटे विकास को लेकर उनका डर और गहरा गया.

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सबसे बड़े बेटे विकास की भी गई जान, पुलिस जांच में जुटी

परिवार को उम्मीद थी कि सबसे बड़ा बेटा विकास सुरक्षित रहेगा, लेकिन कुछ समय बाद विकास ने भी वही बातें दोहराना शुरू कर दिया. उसकी बहन दामिनी के मुताबिक, विकास लगातार कहता था कि उसके दोनों भाई उसे अपने पास बुला रहे हैं और कोई उसे बचा नहीं पाएगा. परिजनों ने उसे घाटमपुर समेत कई जगहों पर तांत्रिकों और डॉक्टरों के पास दिखाया, लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ. आखिरकार 10 अक्टूबर को विकास की भी मौत हो गई.

घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और विकास के शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया. थाना प्रभारी संजय पांडे के अनुसार, परिवार की ओर से अभी तक कोई लिखित शिकायत या प्रार्थना पत्र नहीं दिया गया है. पुलिस का कहना है कि यदि कोई शिकायत मिलती है तो मामले की गहनता से जांच की जाएगी. इस घटना ने एक तरफ जहां अंधविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े पहलुओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं, वहीं दूसरी तरफ बुजुर्ग माता-पिता को पूरी तरह अकेला छोड़ दिया है.

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