'ट्विशा मेरे पास इलाज के लिए आई थी…' जिस साइकेट्रिस्ट डॉक्टर के पास गईं थीं मृतका, देखें उन्होंने क्या-क्या बताया

Twisha Sharma Death case Update: ट्विशा शर्मा मौत मामले में नया मोड़ सामने आया है. भोपाल के मशहूर मनोचिकित्सक डॉ सत्यकांत त्रिवेदी ने पुष्टि की है कि ट्विशा उनके पास इलाज के लिए आई थीं. डॉक्टर ने प्राइवेसी का हवाला देकर बीमारी बताने से इनकार किया है, लेकिन पुलिस और कोर्ट को सहयोग देने की बात कही है.

ट्विशा शर्मा मौत मामले में मनोचिकित्सक डॉ सत्यकांत त्रिवेदी आए सामने
ट्विशा शर्मा मौत मामले में मनोचिकित्सक डॉ सत्यकांत त्रिवेदी आए सामने

रवीशपाल सिंह

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Twisha Sharma doctor interview: नोएडा की रहने वाली ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है. मामले में ट्विशा की सास गिरीबाला सिंह ने अपने बेल ऑर्डर में और मीडिया से बातचीत के दौरान बड़ा दावा किया था कि ट्विशा इलाज के लिए भोपाल के एक साइकेट्रिस्ट के पास गई थीं. इस दावे के बाद हमारे सहयोगी 'आज तक' ने उसी साइकेट्रिस्ट डॉ सत्यकांत त्रिवेदी से बातचीत की है. उन्होंने बताया है कि ट्विशा शर्मा उनके पास इलाज के लिए आई थीं. इसके साथ ही डॉ सत्यकांत ने इस हाई-प्रोफाइल केस में ट्विशा के इलाज से जुड़े कई अहम पहलुओं पर अपनी बात रखी है. हालांकि डॉक्टर ने केस से जुड़ी अन्य संवेदनशील जानकारियों पर पेशेवर मर्यादा बनाए रखी.

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मेडिकल हिस्ट्री और बीमारी बताने से डॉक्टर का इनकार

इस दौरान डॉक्टर से जब ट्विशा की बीमारी, दवाओं और सिजोफ्रेनिया के इलाज से जुड़े दावों के बारे में सीधा सवाल किया गया तो उन्होंने मरीज की प्राइवेसी का हवाला देते हुए कुछ भी बताने से साफ मना कर दिया. डॉ सत्यकांत ने कहा कि किसी भी मरीज की बीमारी की हिस्ट्री, दवाइयों की जानकारी या उनके क्लिनिक आने की तारीख को सार्वजनिक करना पूरी तरह से अनएथिकल यानी अनैतिक है. यह मरीज की गरिमा के खिलाफ है, इसलिए वे इस पर कोई व्यक्तिगत विवरण साझा नहीं कर सकते.

कोर्ट और पुलिस जांच में सहयोग करने को तैयार

डॉ सत्यकांत त्रिवेदी ने साफ किया कि भले ही वे मीडिया या जनता के सामने मरीज की कोई भी गुप्त जानकारी शेयर नहीं कर सकते, लेकिन वे कानून का पूरा सम्मान करते हैं. उन्होंने कहा कि अगर इस मामले की न्यायिक प्रक्रिया के तहत पुलिस या अदालत उनसे संपर्क करती है और पूछताछ करती है तो वे न्याय का हिस्सा बनते हुए जांच टीम के साथ हर तरह की जरूरी जानकारी साझा करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.

मानसिक बीमारियों में दवा के साथ काउंसलिंग भी जरूरी

डॉक्टर ने किसी खास मरीज का नाम लिए बिना सामान्य तौर पर बताया कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में केवल दवाएं ही काफी नहीं होतीं. लगभग हर मरीज के बेहतर इलाज के लिए दवाइयों के साथ-साथ काउंसलिंग की भी बड़ी भूमिका होती है. उन्होंने बताया कि वे अपने पास आने वाले अमूमन सभी मरीजों को आगे बेहतर थेरेपी के लिए काउंसलर के नाम सुझाते हैं और यह एक सामान्य डॉक्टरी प्रक्रिया का हिस्सा है.

बदलती लाइफस्टाइल और तनाव के कारण बढ़े मानसिक रोग

आज के दौर में बढ़ते मानसिक तनाव पर बात करते हुए डॉ सत्यकांत ने कहा कि कोरोना महामारी के बाद से लोगों में एंग्जायटी, डिप्रेशन और मूड स्विंग्स जैसी समस्याएं काफी ज्यादा बढ़ गई हैं. सोशल मीडिया का प्रभाव, सेल्फ इमेज की चिंता, रिश्तों में बदलाव और भागदौड़ भरी लाइफस्टाइल इसकी बड़ी वजहें हैं. उनके पास तीन साल के बच्चे से लेकर सौ साल तक के बुजुर्ग इलाज के लिए आते हैं. उन्होंने यह भी माना कि शादी के बाद का तनाव या अनप्लांड प्रेग्नेंसी जैसे सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही लाइफ इवेंट्स इंसान के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं.

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