समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और विधायक शिवपाल सिंह यादव हाल ही में रामपुर पहुंचे. रामपुर में उन्होंने जेल में बंद सपा के संस्थापक सदस्य और कद्दावर नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम से लगभग एक घंटे तक मुलाकात की. इसके बाद शिवपाल यादव आजम खान के आवास पर पहुंचे, जहां उन्होंने उनकी पत्नी तजीन फातिमा और बड़े बेटे अदीब से मुलाकात की. अपनी यात्रा के दौरान वे जौहर यूनिवर्सिटी भी गए और वहां के स्टाफ व स्थानीय सपा कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की.
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लेकिन इस दौरे का असली कारण सिर्फ हाल-चाल जानना नहीं था, बल्कि समाजवादी पार्टी के भीतर गहराते सियासी असंतोष को संभालना था. आइए जानते हैं शिवपाल यादव के इस दौरे के पीछे की अंदरूनी कहानी और इसके राजनीतिक मायने:
1. अखिलेश के 'संकटमोचक' के रूप में शिवपाल
मुलायम सिंह यादव (नेताजी) के दौर में शिवपाल सिंह यादव को पार्टी का मुख्य संकटमोचक (ट्रबलशूटर) माना जाता था. जब भी कोई वरिष्ठ नेता या कार्यकर्ता नाराज होता था, तो शिवपाल ही उसे मनाने का जिम्मा संभालते थे. अब अखिलेश यादव के दौर में भी रामपुर के सियासी संकट को सुलझाने के लिए शिवपाल को ही आगे किया गया है. शिवपाल और आजम खान दोनों ही सपा के उस शुरुआती दौर के साथी हैं, जब पार्टी का ढांचा तैयार हो रहा था. दोनों एक-दूसरे के मिजाज और कार्यशैली से बखूबी वाकिफ हैं.
2. आजम खान की नाराजगी की मुख्य वजहें
आजम खान की सपा नेतृत्व से नाराजगी के कई कारण बताए जा रहे हैं:
- जौहर यूनिवर्सिटी विवाद पर सपा की भूमिका: हाल में जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर कार्रवाई और विवाद के दौरान आजम खान उम्मीद कर रहे थे कि अखिलेश यादव खुद रामपुर आकर फ्रंटफुट पर स्टैंड लेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
- सांसद मोहिबुल्ला नदवी से दूरी: रामपुर के मौजूदा सपा सांसद मोहिबुल्ला नदवी की बढ़ती सियासी गतिविधियों से आजम खान सहज नहीं हैं.
- विरोधी गुटों की सपा में एंट्री: रामपुर में डिंपल यादव की मौजूदगी में कुछ ऐसे नेताओं (जैसे पूर्व अपना दल नेता मोहम्मद वकील एडवोकेट, जिन्होंने अब्दुल्ला आजम के खिलाफ चुनाव लड़ा था) को पार्टी में शामिल कराया गया, जिससे आजम समर्थक और असदुद्दीन राजा नाराज दिखे.
3. अखिलेश का 'सॉफ्ट हिंदुत्व' और शिवपाल का 'मुस्लिम कार्ड'
विश्लेषण के मुताबिक, समाजवादी पार्टी इस वक्त एक दोहरी रणनीति पर काम कर रही है:
- अखिलेश यादव लगातार आक्रामक मुस्लिम कार्ड खेलने से बच रहे हैं और 'सॉफ्ट हिंदुत्व' व पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के व्यापक फॉर्मूले पर केंद्रित हैं.
- वहीं, सपा के पुराने कोर मुस्लिम वोट बैंक को सहेजने और आजम खान जैसे बड़े नेता की अनदेखी का संदेश जाने से रोकने के लिए शिवपाल यादव को जिम्मेदारी सौंपी गई है.
- रामपुर दौरे के दौरान शिवपाल यादव ने जेल मैनुअल का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि आजम खान के साथ जेल में अच्छा बर्ताव नहीं हो रहा है और उन्हें जमीन पर लिटाया जा रहा है. इसके साथ ही शिवपाल ने संभल मामले में सपा सरकार बनने पर केस वापस लेने की बात कहकर मुस्लिम मतदाताओं को साधने की कोशिश की.
4. ओवैसी (AIMIM) की घेराबंदी से सपा में बेचैनी
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद, बिजनौर, बहराइच जैसे मुस्लिम बहुल इलाकों में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी (AIMIM) लगातार सक्रिय हो रही है. ओवैसी की रैलियों में उमड़ रही भीड़ ने सपा की चिंता बढ़ा दी है. सपा को डर है कि अगर आजम खान की नाराजगी बनी रही, तो मुस्लिम वोट बैंक का एक हिस्सा छिटक सकता है.
5. AIMIM का तंज: "चुनाव आते ही याद आए आजम खान"
शिवपाल यादव की इस मुलाकात पर AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली ने सोशल मीडिया पर तंज कसा. उन्होंने लिखा कि चुनाव करीब आते ही सपा नेताओं को आजम खान की याद आ जाती है, जबकि पिछले 5 सालों में उनकी सुध लेने कोई नहीं आया.
शिवपाल यादव के रामपुर दौरे से सपा ने एक तीर से दो निशाने साधने की कोशिश की है- पहला, आजम खान की नाराजगी को दूर कर पार्टी के अंदरूनी कलह को शांत करना, और दूसरा, ओवैसी की सेंधमारी के बीच मुस्लिम वोट बैंक को यह संदेश देना कि सपा आजम खान और मुस्लिम मुद्दों के साथ खड़ी है.
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