Char Dham Yatra 2026: जोशीमठ से रवाना हुई भगवान बद्रीविशाल की डोली, घाम पहुंचने से पहले यहां विश्राम करती हैं डोलियां

कमल नयन सिलोड़ी

21 Apr 2026 (अपडेटेड: Apr 21 2026 8:30 PM)

भू-वैकुंठ बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. जोशीमठ के नृसिंह मंदिर से गाडू घड़ा और शंकराचार्य की गद्दी पाण्डुकेश्वर के लिए रवाना हो चुकी है. 23 अप्रैल 2026 को सुबह 6:15 बजे शुभ मुहूर्त में मंदिर के द्वार खुलेंगे. जानिए इस दिव्य यात्रा के पड़ाव और मां लक्ष्मी की विशेष पूजा का महत्व.

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चारधाम यात्रा की शुरुआत हो चुकी है. गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुल चुके हैं. वहीं केदारनाथ और बदरीनाथ के कपाट 22 और 23 अप्रैल को खोले जाने हैं. इसी क्रम में आज यानी मंगलवार को भगवान बद्रीविशाल के धाम जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. इसके लिए जोशीमठ के ऐतिहासिक नृसिंह मंदिर में विशेष पंच पूजा और मां लक्ष्मी के आह्वान के साथ डोली यात्रा को रवाना किया गया. इस दौरान सेना के बैंड और स्कूली बच्चों की मधुर धुनों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया. इस दौरान यहां आए सैकड़ों श्रद्धालु इस पावन पल के साक्षी बने. पूरा क्षेत्र जय बद्रीविशाल के जयकारों से गूंज उठा.

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परंपरा के अनुसार आज डोली यात्रा का पहला पड़ाव पाण्डुकेश्वर का योग बद्री मंदिर होगा. ऐसे में जोशीमठ से भगवान के वाहन गरुड़ जी की डोली पवित्र गाडू घड़ा (तेल कलश), आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी और मुख्य पुजारी रावल जी पूरे विधि-विधान के साथ रवाना हुए हैं. आज की रात सभी मूर्तियां और डोलियां योग बद्री मंदिर में विश्राम करेंगी, जहां भक्त दर्शन और पूजा-अर्चना कर सकेंगे.
 

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वहीं यात्रा का अगला चरण बुधवार की सुबह योग बद्री मंदिर से शुरू होगा. यहां से भगवान बद्रीविशाल के सखा उद्धव जी और धन के देवता कुबेर जी की मूर्तियां भी डोली यात्रा में शामिल हो जाएंगी. इसके बाद यह पूरी देव यात्रा बद्रीनाथ धाम की ओर प्रस्थान करेगी. बुधवार से ही मुख्य मंदिर को हजारों क्विंटल रंग-बिरंगे फूलों से सजाने का काम भी युद्ध स्तर पर शुरू हो जाएगा.

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गौरतलब है कि 23 अप्रैल 2026 को सुबह ठीक 6 बजकर 15 मिनट पर बद्रीनाथ धाम के कपाट ग्रीष्मकाल के लिए खोल दिए जाएंगे. इसी के साथ इस वर्ष की चारधाम यात्रा का पूर्ण आगाज हो जाएगा. गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट पहले ही खुल चुके हैं, अब हर किसी की नजरें बद्रीनाथ और केदारनाथ के कपाट खुलने पर टिकी हैं.
 

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परंपरा के अनुसार बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने से पूर्व नृसिंह मंदिर में मां लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शीतकाल में मां लक्ष्मी भगवान बद्रीविशाल के साथ गर्भगृह में विराजमान रहती हैं. कपाट खुलने पर उन्हें भगवान से अलग होकर बाहर लक्ष्मी मंदिर में आना होता है. इसलिए पुजारी और हक-हकूकधारी मां लक्ष्मी को मनाने और उनकी अनुमति लेने के लिए यह विशेष अनुष्ठान करते हैं.
 

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इस वर्ष यात्रा को लेकर भक्तों में जबरदस्त जोश देखा जा रहा है. जोशीमठ में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही. महिलाओं ने भजन-कीर्तन कर भगवान नारायण का ध्यान किया, वहीं युवाओं और बुजुर्गों में शंकराचार्य जी की गद्दी के दर्शन की होड़ लगी रही. हजारों की संख्या में तीर्थयात्री धीरे-धीरे बद्रीनाथ धाम की ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहे हैं ताकि कपाट खुलने के साक्षी बन सकें.

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यात्रा के सफल संचालन के लिए मंदिर समिति और प्रशासन ने कमर कस ली है. मुख्य पुजारी रावल, धर्माधिकारी वेद पाठी और सभी हक-हकूकधारी इस पावन कार्य में जुटे हैं. मंदिर परिसर को दिव्य रूप देने के लिए सजावट जारी है. भक्तों की सुविधा और सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि 23 अप्रैल की सुबह भगवान के दर्शन सुगमता से हो सकें.

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