Ankita Bhandari Case Mahapanchayat: उत्तराखंड में बहुचिर्चत अंकिता भंडारी केस में अब न्याय की मांग तेज हो गई है. इस कड़ी में रविवार को देहरादून में अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले एक विशाल महापंचायत का आयोजन किया गया. इस सभा में अंकिता के माता पिता, सोनी देवी और वीरेंद्र सिंह भंडारी भी मौजूद रहे. महापंचायत का मुख्य उद्देश्य हत्याकांड के पीछे छिपे वीवीआईपी को बेनकाब करना और मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना था. इस दौरान पांच बड़े प्रस्ताव पास किए गए अब इन्हें राष्ट्रपति को भेजा जाएगा.
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सिटिंग जज की निगरानी में हो जांच
महापंचायत में पारित पहले प्रस्ताव में मांग उठाई गई कि अंकिता के माता पिता ने मुख्यमंत्री को जो प्रार्थना पत्र सौंपा है, उसी को सीबीआई जांच का मुख्य आधार बनाया जाए. इसके साथ ही संघर्ष मोर्चा ने मांग की है कि मामले की पूरी जांच हाईकोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में कराई जाए.
सबूत मिटाने वालों मिले सजा
दूसरे प्रस्ताव में आंदोलनकारियों ने कहा कि अनिल प्रकाश जोशी नामक व्यक्ति की एफआईआर के आधार पर सीबीआई जांच का निर्णय उन्हें मंजूर नहीं है. उनकी मांग है कि ऋषिकेश के लक्ष्मण झूला थाने में दर्ज मूल एफआईआर संख्या 01/2022 के तहत ही जांच आगे बढ़नी चाहिए. इसी एफआईआर के आधार पर उस रसूखदार वीआईपी और सबूत मिटाने वालों को सजा मिलनी चाहिए.
सीएम के पद पर रहने को लेकर उठाई आपत्ति
तीसरे प्रस्ताव में प्रस्ताव में कहा गया कि हत्याकांड के तुरंत बाद वनन्तरा रिज़ॉर्ट के एक महत्वपूर्ण हिस्से पर बुलडोजर चला दिया गया, जिससे केस के कई अहम सबूत नष्ट हो गए. महापंचायत का मानना है कि जब तक इस मामले की जांच पूरी नहीं हो जाती तब तक मुख्यमंत्री धामी को अपने पद से अलग रहना चाहिए ताकि जांच निष्पक्ष बनी रहे.
घटना में सामने आए नामों की हो जांच
चौथे प्रस्ताव में सत्ताधारी पार्टी से जुड़े दो कथित नामों को जांच के घेरे में लाने की मांग की गई है. संघर्ष मोर्चा ने भाजपा के दुष्यंत कुमार गौतम और अजय कुमार को भी जांच प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जाए और इनसे गहन पूछताछ की जाए. साथ ही जांच पूरी होने तक पार्टी को इन दोनों पदाधिकारियों को पदमुक्त किया जाए.
जांच के लिए 15 दिनों का अल्टीमेटम
महापंचायत का अंतिम प्रस्ताव में कहा गया है कि यदि अगले 15 दिनों के भीतर अंकिता के मात पिता की मांग के अनुसार सीबीआई जांच शुरू नहीं हुई और उस वीवीआईपी का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया तो प्रदेश की जनता शांत नहीं बैठेगी. मोर्चा ने ऐलान किया है कि तय समय सीमा बीतने के बाद पूरे उत्तराखंड में एक शांतिपूर्ण लेकिन विशाल जनांदोलन शुरू किया जाएगा.
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